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बीएचयूः कार्यकाल के बीच अवकाश पर जाने वाले पांचवें कुलपति बने प्रो. जीसी त्रिपाठी
amarujala.com, written by रबीश श्रीवास्तव
Updated Wed, 04 Oct 2017 06:57 PM IST
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प्रो. जीसी त्रिपाठी
- फोटो : self
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बीएचयू कैंपस में बतौर कुलपति कार्यकाल बीच में ही छोड़कर जाने वालों की परंपरा नई नहीं है। 1990 के बाद से प्रो. जीसी त्रिपाठी ऐसे पांचवें कुलपति हैं। इससे पहले प्रो. रामचंद्र राव, मोती लाल धर, चंद्रशेखर झा और डीएन मिश्रा भी कार्यकाल के बीच ही छुट्टी पर चले गए थे।
मोती लाल धर 2 फरवरी, 1977 से 15 दिसंबर, 1977 तक ही कुलपति रहे थे, जबकि चंद्रशेखर झा ने 1 मई, 1991 से 14 जून, 1993 तक यानी केवल 25 महीने से कुलपति पद की जिम्मेदारी संभाली। इसी तरह डीएन मिश्रा 8 फरवरी, 1994 से 27 जून, 1995 तक की अवधि में ही इस पद पर रहे।
बीएचयू के कुलपति का कार्यकाल तीन साल का होता है। अगर किसी कारणवश कुलपति समय से पहले पद छोड़ देते हैं या लंबे अवकाश पर चले जाते हैं, तो शेष अवधि में रेक्टर और रेक्टर न होने पर कुलसचिव को चार्ज दिया जाता है।
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23 सितंबर को छात्राओं पर लाठीचार्ज और इसके बाद हुए बवाल के बाद प्रो. त्रिपाठी को कार्यकाल खत्म होने से दो महीने पहले ही लंबी छुट्टी पर जाना पड़ा है। अब उनकी वापसी पर अटकलें लगाई जा रही हैं।
दूसरी ओर इसी विश्वविद्यालय में कुलपति का दूसरा कार्यकाल पाने वालों में चार कुलपति शामिल हैं। एक नवंबर, 1969 को कुलपति बने कालू लाल श्रीमाली, 30 अप्रैल, 1985 में आरपी रस्तोगी, 19 अक्तूबर, 1981 को पदभार संभालने वाले इकबाल नारायन और इसके बाद वाईसी सिमाद्री 31 अगस्त, 1998 से 20 फरवरी, 2002 तक इस पद पर रहे।
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मोती लाल धर 2 फरवरी, 1977 से 15 दिसंबर, 1977 तक ही कुलपति रहे थे, जबकि चंद्रशेखर झा ने 1 मई, 1991 से 14 जून, 1993 तक यानी केवल 25 महीने से कुलपति पद की जिम्मेदारी संभाली। इसी तरह डीएन मिश्रा 8 फरवरी, 1994 से 27 जून, 1995 तक की अवधि में ही इस पद पर रहे।
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बीएचयू के कुलपति का कार्यकाल तीन साल का होता है। अगर किसी कारणवश कुलपति समय से पहले पद छोड़ देते हैं या लंबे अवकाश पर चले जाते हैं, तो शेष अवधि में रेक्टर और रेक्टर न होने पर कुलसचिव को चार्ज दिया जाता है।
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23 सितंबर को छात्राओं पर लाठीचार्ज और इसके बाद हुए बवाल के बाद प्रो. त्रिपाठी को कार्यकाल खत्म होने से दो महीने पहले ही लंबी छुट्टी पर जाना पड़ा है। अब उनकी वापसी पर अटकलें लगाई जा रही हैं।
दूसरी ओर इसी विश्वविद्यालय में कुलपति का दूसरा कार्यकाल पाने वालों में चार कुलपति शामिल हैं। एक नवंबर, 1969 को कुलपति बने कालू लाल श्रीमाली, 30 अप्रैल, 1985 में आरपी रस्तोगी, 19 अक्तूबर, 1981 को पदभार संभालने वाले इकबाल नारायन और इसके बाद वाईसी सिमाद्री 31 अगस्त, 1998 से 20 फरवरी, 2002 तक इस पद पर रहे।
कार्यवाहक कुलपति की तलाश शुरू
बीएचयू
- फोटो : SELF
बीएचयू के कुलपति प्रो. जीसी त्रिपाठी के लंबी छुट्टी पर जाने के बाद अब मानव संसाधन मंत्रालय ने कार्यवाहक कुलपति की तलाश शुरू कर दी है। इसके लिए दो महिलाओं समेत पांच लोगों के नाम की चर्चा है। सूत्रों की मानें तो विश्वविद्यालय की ओर से शिक्षकों की सूची भी मंत्रालय को भेजी जा रही है।
सोशल मीडिया से लेकर विश्वविद्यालय परिसर में कार्यवाहक कुलपति पद के लिए जिन नामों की सबसे ज्यादा चर्चा है, इनमें बीकानेर में महाराजा गंगा सिंह यूनिवर्सिटी की कुलपति रह चुकीं बीएचयू की पूर्व डीन प्रो. चंद्रकला पाडिया, पूर्व में कार्यवाहक कुलपति के तौर पर जिम्मेदारी निभा चुके आईआईटी बीएचयू के डायरेक्टर प्रो. राजीव संगल, आईएमएस के डायरेक्टर प्रो. वीके शुक्ला और राजनीति विज्ञान विभाग की पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो. अंजू शरण उपाध्याय का नाम शामिल है। उधर, कला संकाय प्रमुख और वरिष्ठतम प्रोफेसर कुमार पंकज का नाम भी इसकी दौड़ में बताया जा रहा है।
पुराना प्राक्टोरियल बोर्ड फिर से बहाल
बीएचयू कैंपस में पहले से चला आ रहा प्राक्टोरियल बोर्ड बहाल हो गया है। विश्वविद्यालय में नए चीफ प्राक्टर की तैनाती के बाद से नई टीम बनाने की तैयारी चल रही थी, जिसमें अधिक से अधिक संख्या में महिलाओं को रखे जाने का फैसला हुआ था।
फिलहाल पुरानी टीम ही अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करेगी। इस बारे में चीफ प्राक्टर प्रो. रोयाना सिंह ने बताया कि बोर्ड में फिलहाल किसी तरह का कोई बदलाव नहीं किया जा रहा है।
बता दें कि कुलपति प्रो. जीसी त्रिपाठी के छुट्टी पर चले जाने की वजह से नई टीम बनाने संबंधी प्रस्ताव पर मुहर नहीं लग पाने की वजह से ही ऐसा फैसला लिया गया है।
सोशल मीडिया से लेकर विश्वविद्यालय परिसर में कार्यवाहक कुलपति पद के लिए जिन नामों की सबसे ज्यादा चर्चा है, इनमें बीकानेर में महाराजा गंगा सिंह यूनिवर्सिटी की कुलपति रह चुकीं बीएचयू की पूर्व डीन प्रो. चंद्रकला पाडिया, पूर्व में कार्यवाहक कुलपति के तौर पर जिम्मेदारी निभा चुके आईआईटी बीएचयू के डायरेक्टर प्रो. राजीव संगल, आईएमएस के डायरेक्टर प्रो. वीके शुक्ला और राजनीति विज्ञान विभाग की पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो. अंजू शरण उपाध्याय का नाम शामिल है। उधर, कला संकाय प्रमुख और वरिष्ठतम प्रोफेसर कुमार पंकज का नाम भी इसकी दौड़ में बताया जा रहा है।
पुराना प्राक्टोरियल बोर्ड फिर से बहाल
बीएचयू कैंपस में पहले से चला आ रहा प्राक्टोरियल बोर्ड बहाल हो गया है। विश्वविद्यालय में नए चीफ प्राक्टर की तैनाती के बाद से नई टीम बनाने की तैयारी चल रही थी, जिसमें अधिक से अधिक संख्या में महिलाओं को रखे जाने का फैसला हुआ था।
फिलहाल पुरानी टीम ही अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करेगी। इस बारे में चीफ प्राक्टर प्रो. रोयाना सिंह ने बताया कि बोर्ड में फिलहाल किसी तरह का कोई बदलाव नहीं किया जा रहा है।
बता दें कि कुलपति प्रो. जीसी त्रिपाठी के छुट्टी पर चले जाने की वजह से नई टीम बनाने संबंधी प्रस्ताव पर मुहर नहीं लग पाने की वजह से ही ऐसा फैसला लिया गया है।