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BHU News: अब सिर्फ दो साल के लिए होगी शोधार्थी की अस्थायी निकासी
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काशी हिंदू विश्वविद्यालय ने पीएचडी कार्यक्रम की गाइडलाइन में विभिन्न स्तरों पर बदलाव किया है। शोधार्थी को लंबी अवधि का अवकाश (अस्थायी निकासी) उसके शोध निर्देशक की सेवानिवृत्ति तिथि के अंदर ही स्वीकृत किया जाएगा। अस्थायी निकासी दो स्पेल में सिर्फ दो वर्ष के लिए होगी। डिपार्टमेंटल रिसर्च कमेटी (डीआरसी) की बैठक हर 15 दिन पर कराई जाएगी और बैठक के दो दिन के भीतर उसकी रिपोर्ट संबंधित एकेडमिक सेक्शन को भेजी जाएगी।
बीएचयू के डिप्टी रजिस्ट्रार (एकेडमिक) पुष्यमित्र त्रिवेदी की ओर से विश्वविद्यालय के सभी संस्थानों के डायरेक्टर, डीन, महिला महाविद्यालय की प्राचार्य, विभागों के हेड और को-ऑर्डिनेटरों को जारी गाइडलाइन में कहा है कि अगर कोई शोधार्थी कुछ महीनों या वर्षों के लिए शोध कार्य से अलग होता है यानी अस्थायी निकासी करता है तो डीआरसी को यह सुनिश्चित करना होगा कि उसने वैध रूप से अस्थायी निकासी ली है।
अगर कोई शोधार्थी शोध अवधि के दौरान कहीं और ज्वाइन करता है तो सुपरवाइजर को यह भी तय करना होगा कि शोधार्थियों को अपना विभाग छोड़ने से पहले अस्थायी निकासी की मंजूरी मिल गई है। सुपरवाइजर अपने शोधार्थी को बताएंगे कि यह निकासी अस्थायी है। अगर कोई शोधार्थी अपने विभाग को रिपोर्ट नहीं कर रहा है तो उसका कारण चाहे जो हो, ऐसे मामलों को समय पर और निर्धारित तरीके से निपटाया जाना चाहिए। सत्र कोई भी हो, निवास अवधि का विस्तार फीस रसीद में अंकित तिथि से ही गिना जाएगा।
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बीएचयू के डिप्टी रजिस्ट्रार (एकेडमिक) पुष्यमित्र त्रिवेदी की ओर से विश्वविद्यालय के सभी संस्थानों के डायरेक्टर, डीन, महिला महाविद्यालय की प्राचार्य, विभागों के हेड और को-ऑर्डिनेटरों को जारी गाइडलाइन में कहा है कि अगर कोई शोधार्थी कुछ महीनों या वर्षों के लिए शोध कार्य से अलग होता है यानी अस्थायी निकासी करता है तो डीआरसी को यह सुनिश्चित करना होगा कि उसने वैध रूप से अस्थायी निकासी ली है।
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अगर कोई शोधार्थी शोध अवधि के दौरान कहीं और ज्वाइन करता है तो सुपरवाइजर को यह भी तय करना होगा कि शोधार्थियों को अपना विभाग छोड़ने से पहले अस्थायी निकासी की मंजूरी मिल गई है। सुपरवाइजर अपने शोधार्थी को बताएंगे कि यह निकासी अस्थायी है। अगर कोई शोधार्थी अपने विभाग को रिपोर्ट नहीं कर रहा है तो उसका कारण चाहे जो हो, ऐसे मामलों को समय पर और निर्धारित तरीके से निपटाया जाना चाहिए। सत्र कोई भी हो, निवास अवधि का विस्तार फीस रसीद में अंकित तिथि से ही गिना जाएगा।
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