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BHU: बीएचयू परिसर में लगेगा नो हॉर्न जोन का बोर्ड, मनमानी करने पर लगेगा जुर्माना
Thu, 21 Mar 2024 08:50 AM IST
वाराणसी ब्यूरो
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
Published by: वाराणसी ब्यूरो
Updated Thu, 21 Mar 2024 08:50 AM IST
सार
बीएचयू परिसर में नो हॉर्न जोन का बोर्ड लगेगा। ध्वनि प्रदूषण कम करने को लेकर सहमति बनी है। इस बात पर भी सहमति बनी कि विश्वविद्यालय में अस्पताल और ट्रामा सेंटर के पास भी साइलेंस जोन के बोर्ड लगाए जाएंगे।
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BHU Hospital
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
बीएचयू परिसर में जगह-जगह नो हाॅर्न जोन का बोर्ड लगाया जाएगा। निर्धारित मानक से अधिक ध्वनि पर जुर्माना भी लगाया जाएगा। बीएचयू के चीफ प्रॉक्टर कार्यालय में आयोजित कार्यक्रम के माध्यम से लोगों से ध्वनि प्रदूषण कम करने की अपील की गई।
सत्या फाउंडेशन के सहयोग से आयोजित कार्यक्रम में चेतन उपाध्याय ने ध्वनि प्रदूषण कम करने के बारे में विस्तार से जानकारी दी। सहमति बनी कि विश्वविद्यालय में अस्पताल और ट्राॅमा सेंटर के पास भी साइलेंस जोन के बोर्ड लगाए जाएंगे। साथ ही इस पर भी सहमति बनी कि विश्वविद्यालय की बाहरी दीवार से सटे सभी द्वारों पर भी कानून की जानकारी के उद्देश्य से डिस्प्ले बोर्ड लगाए जाएंगे। इसमें विशेषकर विश्वविद्यालय के साइलेंस जोन में आने, 100 मीटर के दायरे में किसी भी किस्म का ध्वनि प्रदूषण न करने की अपील की जाएगी।
चीफ प्रॉक्टर ने यह भी बताया कि डिस्प्ले बोर्ड में इस बात का भी जिक्र रहेगा कि मानक का पालन न करने वालों को पर्यावरण संरक्षण अधिनियम-1986 के तहत एक लाख रुपये तक जुर्माना या पांच साल तक की कैद या एक साथ दोनों सजा हो सकती है।
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सत्या फाउंडेशन के सहयोग से आयोजित कार्यक्रम में चेतन उपाध्याय ने ध्वनि प्रदूषण कम करने के बारे में विस्तार से जानकारी दी। सहमति बनी कि विश्वविद्यालय में अस्पताल और ट्राॅमा सेंटर के पास भी साइलेंस जोन के बोर्ड लगाए जाएंगे। साथ ही इस पर भी सहमति बनी कि विश्वविद्यालय की बाहरी दीवार से सटे सभी द्वारों पर भी कानून की जानकारी के उद्देश्य से डिस्प्ले बोर्ड लगाए जाएंगे। इसमें विशेषकर विश्वविद्यालय के साइलेंस जोन में आने, 100 मीटर के दायरे में किसी भी किस्म का ध्वनि प्रदूषण न करने की अपील की जाएगी।
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चीफ प्रॉक्टर ने यह भी बताया कि डिस्प्ले बोर्ड में इस बात का भी जिक्र रहेगा कि मानक का पालन न करने वालों को पर्यावरण संरक्षण अधिनियम-1986 के तहत एक लाख रुपये तक जुर्माना या पांच साल तक की कैद या एक साथ दोनों सजा हो सकती है।
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