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बीएचयू में दलितों के साथ भेदभाव की सबसे ज्यादा शिकायतें

Tue, 07 Feb 2017 05:37 PM IST
टीम डिजिटल, अमर उजाला वाराणसी
टीम डिजिटल, अमर उजाला वाराणसी Updated Tue, 07 Feb 2017 05:37 PM IST
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BHU Most complaints of discrimination against Dalits
जाॉब बीएचयू - फोटो : cpstown

वर्ष 2015-16 में केंद्रीय विश्वविद्यालयों में दलितों के साथ जाति आधारित भेदभाव की सबसे ज्यादा शिकायतें काशी हिंदू विश्वविद्यालय में दर्ज की गई हैं। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग की रिपोर्ट के मुताबिक बीएचयू के बाद गुजरात विश्वविद्यालय का नंबर आता है जिसमें सबसे ज्यादा 18 शिकायतें की गई हैं।

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हिंदुस्तान टाइम्स की खबर के मुताबिक सोमवार को लोकसभा में जाति आधारित भेदभाव को लेकर पूछे एक सवाल के जवाब में यूजीसी के इस आंकड़ें का हवाला दिया गया। रिपोर्ट के मुता‌बिक वर्ष 2015-16 में दलितों के साथ भेदभाव की 102 और आदिवासियों के साथ भेदभाव की 40 शिकायतें आईं ।
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विश्वविद्यालयों में जाति आधारित भेदभाव का हैदराबाद विश्वविद्यालय में रोहित वेमुला की आत्महत्या के बाद प्रकाश में आया। उधर, इस मामले में बीएचयू के कुलपति प्रोफेसर गिरिश चंद त्रिपाठी ने दावा किया कि बीएचयू में किसी के साथ जाति आधारित भेदभाव नहीं होता।
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कुलपति ने कहा कि उनकी जानकारी में ऐसा कोई मामला नहीं आया है। बता दें कि यूजीसी की ये रिपोर्ट विश्वविद्यालय ही भेजते हैं। यूपी और गुजरात दोनों ही राज्यों में जाति आधारित भेदभाव की सबसे ज्यादा शिकायतें आई हैं। वहीं दिल्ली में इग्नू में सात और जेएनयू में तीन शिकायतें मिली हैं।

राज्यसभा में उठा छात्रों पर बीएचयू प्रशासन की सख्ती का मामला

BHU Most complaints of discrimination against Dalits
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इससे पहले राज्यसभा सदस्यों ने बीएचयू में इंटरनेट के इस्तेमाल तथा मांसाहारी भोजन पर रोक का मामला भी उठाया। सांसदों ने कहा कि इन कदमों से केंद्रीय विश्वविद्यालयों में छात्रों के साथ सख्ती बरते जाने का पता चलता है।

जनता दल यूनाईटेड (जदयू) के सांसद अली अनवर अंसारी ने बीएचयू द्वारा नौ छात्रों के निलंबन का मामला उठाते हुए कहा कि इन छात्रों ने एक साल पहले साइबर लाइब्रेरी को चौबीसों घंटे खुले रखने की मांग की थी तथा विरोध प्रदर्शन किया था।

उन्होंने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय परिसर में छात्रों के दो समूहों में झगड़ा होने के बाद कुलपति के खिलाफ प्रदर्शन करने वाले छात्रों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई थी। उन्होंने आगे कहा कि जहां लड़के हॉस्टल में मांसाहार खा सकते हैं वहीं लड़कियों को इसकी इजाजत नहीं है।

इसी तरह लड़कियों को शाम आठ बजे तक हॉस्टल लौटना अनिवार्य है तथा वे नौ बजे के बाद मोबाइल का इस्तेमाल भी नहीं कर सकती हैं। लड़कों को 24 घंटे इंटरनेट का इस्तेमाल करने की सुविधा है पर लड़कियों को इससे भी वंचित रखा गया है।

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