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बीएचयू में जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल खत्म
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
Updated Sun, 20 Mar 2016 02:40 AM IST
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बीएचयू में जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल खत्म
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तकरीबन 43 घंटे बाद शनिवार की अपराह्न डेढ़ बजे बीएचयू के जूनियर डॉक्टरों ने हड़ताल समाप्त कर दी। विश्वविद्यालय प्रशासन और पुलिस अफसरों ने जूनियर डॉक्टरों से वार्ता की और उन्हें पूरी सुरक्षा का भरोसा दिलाया। साथ ही मारपीट के आरोपी छात्र एवं छात्रा के खिलाफ कार्रवाई का भी आश्वासन दिया। इससे सहमत होकर जूनियर डॉक्टर काम पर लौट आए। साथ ही दो दिन बाद सर सुंदरलाल अस्पताल और ट्रामा सेंटर में चिकित्सा सेवा भी पटरी पर लौट आई।
सर सुंदरलाल अस्पताल स्थित रेडियो डायग्नोसिस एंड इमेजिंग विभाग की अल्ट्रासाउंड यूनिट में बुधवार को कुछ छात्रों ने जूनियर डॉक्टरों की पिटाई कर दी थी। इसके विरोध में गुरुवार की शाम जूनियर डॉक्टर हड़ताल पर चले गए। इससे सर सुंदरलाल अस्पताल और ट्रामा सेंटर में इमरजेंसी के साथ ही ओपीडी सेवाएं बाधित हो गईं। इसका सीधा असर मरीजों पर पड़ने लगा। इलाज के लिए दूरदराज से आए मरीज और तीमारदार दर-दर भटकने लगे।
शनिवार को दोपहर में आईएमएस निदेशक प्रो. वीके शुक्ला की मौजूदगी में विवि के अधिकारियों और जूनियर डॉक्टरों के बीच वार्ता हुई। बातचीत के दौरान जूनियर डॉक्टरों ने अपनी मांगें रखीं। कहा कि मारपीट के आरोपी छात्र एवं छात्रा के खिलाफ विश्वविद्यालय प्रशासन मुकदमा दर्ज कराए और उन पर यूपी मेडिकेयर सर्विस पर्सन एंड मेडिकेयर सर्विस इंस्टीट्यूशन एक्ट लगाया जाए। जूनियर डॉक्टरों की दोनों मांगें मान ली गईं। इसके बाद वे काम पर लौट आए।
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सर सुंदरलाल अस्पताल स्थित रेडियो डायग्नोसिस एंड इमेजिंग विभाग की अल्ट्रासाउंड यूनिट में बुधवार को कुछ छात्रों ने जूनियर डॉक्टरों की पिटाई कर दी थी। इसके विरोध में गुरुवार की शाम जूनियर डॉक्टर हड़ताल पर चले गए। इससे सर सुंदरलाल अस्पताल और ट्रामा सेंटर में इमरजेंसी के साथ ही ओपीडी सेवाएं बाधित हो गईं। इसका सीधा असर मरीजों पर पड़ने लगा। इलाज के लिए दूरदराज से आए मरीज और तीमारदार दर-दर भटकने लगे।
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शनिवार को दोपहर में आईएमएस निदेशक प्रो. वीके शुक्ला की मौजूदगी में विवि के अधिकारियों और जूनियर डॉक्टरों के बीच वार्ता हुई। बातचीत के दौरान जूनियर डॉक्टरों ने अपनी मांगें रखीं। कहा कि मारपीट के आरोपी छात्र एवं छात्रा के खिलाफ विश्वविद्यालय प्रशासन मुकदमा दर्ज कराए और उन पर यूपी मेडिकेयर सर्विस पर्सन एंड मेडिकेयर सर्विस इंस्टीट्यूशन एक्ट लगाया जाए। जूनियर डॉक्टरों की दोनों मांगें मान ली गईं। इसके बाद वे काम पर लौट आए।
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