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बीएचयू आईएमएस के रेजीडेंट डॉ. मीत मीनारे निष्कासित

Wed, 12 Apr 2017 08:35 PM IST
ब्यूरो,अमर उजाला,वाराणसी
ब्यूरो,अमर उजाला,वाराणसी Updated Wed, 12 Apr 2017 08:35 PM IST
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bhu ims resident doctor meet minare suspaind
सीनियर प्रोफेसरों के साथ दुर्व्यवहार का आरोप - फोटो : file
सीनियर प्रोफेसरों के साथ बदसलूकी करने वाले जूनियर रेजीडेंट डॉ. मीत मिनारे को बीएचयू प्रशासन ने निष्कासित कर दिया है। दो अलग-अलग मामलों में बीएचयू प्रोफेसरों के साथ दुर्व्यवहार और मारपीट करने का आरोप डॉ. मीत पर है।
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मामले की जांच के बनाई गई कमेटी की रिपोर्ट में दोषी पाए जाने के बाद कुलपति प्रो. जीसी त्रिपाठी ने तत्काल प्रभाव से डॉ. मीत की सेवाएं समाप्त कर दी हैं। पिछले दिनों बीएचयू छात्रों से मारपीट में भी डॉ. मीत का नाम सामने आया था। 
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आईएमएस बीएचयू के एनेस्थिसिया विभाग के जूनियर डॉक्टर डॉ. मीत मिनारे के खिलाफ बीएचयू के ही शिक्षकों के साथ मारपीट और अभद्र व्यवहार की कई शिकायतें विश्वविद्यालय प्रशासन तक पहुंची थीं। बीते साल 21 अगस्त को मेडिसिन विभाग के डॉ. धीरज किशोर के साथ डॉ. मीत ने मारपीट और अभद्रता की थी।
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इसके दस दिन बाद 31 अगस्त को पर्यावरण एवं धारणीय विकास संस्थान के डॉ. जय प्रकाश वर्मा और उनकी पत्नी के साथ भी दुर्व्यवहार करने का आरोप डॉ. मीत पर था। दोनों प्रोफेसरों की शिकायत पर जनरल सर्जरी के प्रो. एसके गुप्ता की अध्यक्षता में जांच कमेटी गठित की गई थी।

कमेटी की रिपोर्ट में डॉ. मीत को दोषी पाया गया है। डॉ. धीरज के मामले में कमेटी का साफ कहना है कि किसी भी छात्र का अपने शिक्षक के साथ दुर्व्यवहार करना अनुशासनहीनता के दायरे में आता है और यह कृत्य कतई बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। वहीं दूसरे मामले में कमेटी ने रिपोर्ट में लिखा है कि कोई भी डॉक्टर मरीज के साथ दुर्व्यवहार नहीं कर सकता, यह मेडिकल एथिक्स के खिलाफ है। 

बता दें कि बीते 28 मार्च को सर सुंदरलाल अस्पताल के लेबर रूम में जूनियर डॉक्टरों और बीएचयू छात्राें के बीच विवाद हुआ था। उसके बाद जूनियर डॉक्टर हड़ताल पर चले गए थे। आरोप था कि डॉ. मीत मीनारे ने एक छात्र को थप्पड़ मारा, उसी के चलते विवाद भड़का।

डॉ. मीत के खिलाफ कार्रवाई के लिए बीएचयू के छात्रों ने धरना भी दिया था। 

कई मामलों में थी डॉ. मीत की शिकायत

सीनियर प्रोफेसरों से दुर्व्यवहार के अलावा कई अन्य मामलों में डॉ. मीत के खिलाफ मारपीट और अभद्रता की गंभीर शिकायतें विश्वविद्यालय प्रशासन तक पहुंची थीं। बीते दिनों डॉ. मीत ने एक गार्ड का सिर फोड़ दिया था।

अस्पताल में जूनियर डॉक्टरों और छात्रों के बीच होने वाले विवाद और हड़ताल के केंद्र में भी डॉ. मीत का नाम सामने आता रहा है।

आईएमएस के ही एक प्रोफेसर की मानें तो एमबीबीएस की पढ़ाई के दौरान से डॉ. मीत का ट्रैक रिकार्ड खराब रहा है। शिकायत के बावजूद विश्वविद्यालय प्रशासन कार्रवाई से बचता रहा। सीनियर प्रोफेसरों से दुर्व्यवहार के जिन दो मामलों में उसके निष्कासन की कार्रवाई की गई है, उसकी जांच रिपोर्ट बीते दिसंबर में ही सौंप दी गई थी लेकिन विश्वविद्यालय प्रशासन को कार्रवाई करने में तीन महीने से ज्यादा का वक्त लग गया।

विश्वविद्यालय प्रशासन से जुड़े सूत्रों का कहना है कि कार्रवाई में देरी की दो वजहें रहीं। एक तो डॉ. मीत का दलित होना, दूसरे उसे कार्य-व्यवहार में सुधार के लिए पर्याप्त अवसर देना। 
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