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बीएचयू IIT के डायरेक्टर के ड्राइवर ने लगाई फांसी, सुसाइड नोट में लिखा कारण
ब्यूरो,अमर उजाला,वाराणसी
Updated Wed, 30 Aug 2017 10:43 AM IST
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बीएचयू आईआईटी के निदेशक राजीव संगल के चालक संतोष कुमार (62) ने गैरेज में पंखे के हुक से फांसी लगा कर जान दे दी। मंगलवार की सुबह इसकी जानकारी होने पर बीएचयू परिसर में सनसनी मच गई।
सूचना के बाद पहुंची लंका पुलिस ने गैरेज का दरवाजा तोड़कर शव को बाहर निकाला और पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। पुलिस को संतोष के पास से सुसाइड नोट मिला है, जिस पर लिखा है कि बेटी की शादी न होने से वह परेशान था, इसलिए आत्महत्या कर रहा है।
मूल रूप से पांडेयपुर निवासी संतोष कुमार महामनापुरी कॉलोनी में मकान बनवाकर रहते थे। परिवार में पत्नी तारावती, तीन बेटे विनोद पटेल, अमित, शुभम और सरोज, आरती, सुनीता समेत तीन बेटियां हैं।
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इनमें विनोद, अमित और सरोज, आरती बीएचयू में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी हैं। बाकी एक बेटा और एक बेटी बीएचयू में पढ़ रहे हैं। संतोष रिटायर्ड होने के बाद दो साल के लिए एक्सटेंसन पर थे।
सोमवार की रात वह आईआईटी के निदेशक को उनके आवास पर छोड़ने के बाद कार को गैरेज में खड़ी करने चले गए। रात दस बजे तक जब संतोष घर नहीं पहुंचे तो परिवार वालों ने निदेशक को फोन कर उनके बारे में पूछा।
निदेशक ने उन्हें बताया कि वह तो सात बजे ही घर चले गए थे। मंगलवार को सुबह परिवारीजनों के साथ प्रोक्टोलियल बोर्ड के लोगों ने तलाश शुरू की तो गैरेज में संतोष की लाश फांसी के फंदे पर झूलती मिली।
सूचना पाकर लंका एसओ राजीव सिंह पहुंचे और शव को कब्जे में ले लिया। एसओ का कहना था कि दो बेटियों की शादी न होने के कारण संतोष परेशान थे। इसी वजह से उन्होंने आत्महत्या की है।
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सूचना के बाद पहुंची लंका पुलिस ने गैरेज का दरवाजा तोड़कर शव को बाहर निकाला और पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। पुलिस को संतोष के पास से सुसाइड नोट मिला है, जिस पर लिखा है कि बेटी की शादी न होने से वह परेशान था, इसलिए आत्महत्या कर रहा है।
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मूल रूप से पांडेयपुर निवासी संतोष कुमार महामनापुरी कॉलोनी में मकान बनवाकर रहते थे। परिवार में पत्नी तारावती, तीन बेटे विनोद पटेल, अमित, शुभम और सरोज, आरती, सुनीता समेत तीन बेटियां हैं।
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इनमें विनोद, अमित और सरोज, आरती बीएचयू में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी हैं। बाकी एक बेटा और एक बेटी बीएचयू में पढ़ रहे हैं। संतोष रिटायर्ड होने के बाद दो साल के लिए एक्सटेंसन पर थे।
सोमवार की रात वह आईआईटी के निदेशक को उनके आवास पर छोड़ने के बाद कार को गैरेज में खड़ी करने चले गए। रात दस बजे तक जब संतोष घर नहीं पहुंचे तो परिवार वालों ने निदेशक को फोन कर उनके बारे में पूछा।
निदेशक ने उन्हें बताया कि वह तो सात बजे ही घर चले गए थे। मंगलवार को सुबह परिवारीजनों के साथ प्रोक्टोलियल बोर्ड के लोगों ने तलाश शुरू की तो गैरेज में संतोष की लाश फांसी के फंदे पर झूलती मिली।
सूचना पाकर लंका एसओ राजीव सिंह पहुंचे और शव को कब्जे में ले लिया। एसओ का कहना था कि दो बेटियों की शादी न होने के कारण संतोष परेशान थे। इसी वजह से उन्होंने आत्महत्या की है।