बवाल के बाद बीएचयू अस्पताल में रेजीडेंट डॉक्टरों की हड़ताल जारी, बढ़ी मरीजों की मुसीबत
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बीएचयू के सर सुंदरलाल अस्पताल में जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल बुधवार को भी जारी रही। हड़ताल की वजह से ट्रॉमा सेंटर की ओपीडी, वार्ड और इमरजेंसी में सेवाएं प्रभावित रहीं। दूर दराज से आए मरीजों को इलाज के लिए परेशान होना पड़ा। कई लोग तो बिना इलाज के ही लौट गए। जूनियर डॉक्टरों की मांग है कि 46 डॉक्टरों पर दर्ज मुकदमा वापस लिया जाए और हॉस्टल तथा अस्पताल परिसर में सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। इस हड़ताल को एम्स के रेजीडेंट डॉक्टरों और आईएमए बनारस शाखा ने भी समर्थन दिया है।
रेजीडेंट डॉक्टरों ने मंगलवार सुबह ही हड़ताल पर जाने की घोषणा करते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन को बुधवार तक उनकी मांगों को मानने का समय दिया था। विश्वविद्यालय प्रशासन ने मांगों पर ध्यान नहीं दिया तो बुधवार दोपहर तीन बजे रेजीडेंट डॉक्टरों ने इमरजेंसी सेवाओं से भी खुद को अलग कर लिया। इससे इमरजेंसी में भी मरीजों की दिक्कतें बढ़ गईं।
मरीजों को बिना इलाज के लौटना पड़ा। इससे पहले दोपहर को डीएम सुरेंद्र सिंह, एसएसपी आनंद कुलकर्णी अस्पताल पहुंचे और चिकित्सा अधीक्षक प्रो. विजयनाथ मिश्र के साथ बैठक कर बातचीत की। करीब आधे घंटे की बैठक के बाद ट्रॉमा सेंटर पहुंचकर रेजीडेंट डॉक्टरों को सुरक्षा, जल्द कार्रवाई का भरोसा भी दिलाया लेकिन यह वार्ता सफल नहीं हो सकी।
उधर बुधवार को दिन में भारी फोर्स के साथ विश्वविद्यालय पहुंचकर डीएम, एसएसपी ने सात हॉस्टलों को खाली कराया, इसके बाद विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से कमरों को सील कर दिया गया। यहां सर्च आपरेशन चलाने के साथ ही पुलिस ने द्रोण से भी निगरानी की।
यह था मामला
सोमवार की रात मरीज के परिजन से मारपीट के बाद एक महिला की शिकायत पर लंका थाने में 46 डॉक्टरों के खिलाफ मारपीट, बलवा सहित अन्य मामलों में मुकदमा दर्ज किया गया था। इनमें दो वरिष्ठ चिकित्सक और चार रेजीडेंट डॉक्टरों को नामजद किया गया था। इसके विरोध में जब जूनियर डॉक्टरों ने विश्वविद्यालय का गेट बंद किया तो अन्य हॉस्टलों के छात्रों से भी उनका विवाद हो गया। यह विवाद इतना बढ़ा कि सोमवार आधी रात से मंगलवार सुबह तक कैंपस में पत्थरबाजी, आगजनी और तोड़फोड़ हुई। पुलिस तथा जिला प्रशासन को हस्तक्षेप करना पड़ा।
रेजीडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन ने स्वास्थ्य मंत्री को भेजा पत्र
आईएमएस बीएचयू के रेजीडेंट डॉक्टरों की हड़ताल का समर्थन एम्स नई दिल्ली के रेजीडेंट डॉक्टरों ने किया है। एम्स के रेजीडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन की ओर से इस आशय का एक पत्र 26 सितंबर को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा को भेजते हुए साथी के साथ वार्ड में मारपीट, फिर हॉस्टल पर पत्थरबाजी, आगजनी की निंदा करने के साथ ही घटना को अंजाम देने वालों की गिरफ्तारी की मांग की।
उसकी एक प्रति आईएमएस बीएचयू के रेजीडेंट डॉक्टरों को, उत्तर प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह और कुलपति बीएचयू को भी दी गई है। उधर, आईएमए बनारस शाखा भी डॉक्टरों के समर्थन में आ गई है। एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. हरजीत सिंह भट्ठी ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री को भेजे पत्र में अस्पताल में बेड की कमी, अस्पताल में सुरक्षा सहित अन्य कमियों को दूर करने के लिए बीएचयू प्रशासन को जिम्मेदार माना है।
साथ ही बीएचयू प्रशासन पर दोषियों को बचाने का आरोप लगाते हुए कहा है कि इस वजह से आए दिन मेडिकल छात्रों की पिटाई हो रही है। सोमवार की रात भी ऐसा ही हुआ। चेतावनी दी कि यदि 48 घंटे के भीतर मांगों पर कार्रवाई नहीं हुई तो 28 सितंबर की शाम छह बजे से बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन शुरू होगा।
आईएमए में अध्यक्ष डॉ. अरविंद सिंह की अध्यक्षता में आपात बैठक में घटना में दोषियों के जल्द गिरफ्तारी की मांग की गई है। सचिव डॉ. मनीषा सिंह ने बताया कि यदि प्रशासन ने मामले में न्याय नहीं किया तो आईएमए आंदोलन को बाध्य होगा। इस दौरान डॉ. अजीत सैगल, डॉ. अशोक कुमार राय, डॉ. एनपी सिंह,डॉ. संजय राय आदि मौजूद रहे।
कहीं माहौल बिगाड़ने की साजिश तो नहीं
विश्वविद्यालय का माहौल एक बार फिर बिगड़ने लगा है। हालांकि इसकी वजह मारपीट ही बताई जा रही है लेकिन इसके पीछे कुछ लोगों की साजिश भी मानी जा रही है। इसमें बीएचयू और सर सुंदरलाल अस्पताल से जुड़े कुछ लोग भी शामिल हैं। अप्रैल में भी तीन दिन तक जूनियर डॉक्टरों ने हड़ताल की थी लेकिन उस घटना के बाद भी किसी ने गंभीरता से नहीं लिया था।
बीएचयू के सर सुंदरलाल अस्पताल में दो दिन से जारी रेजीडेंट डॉक्टरों की हड़ताल से चिकित्सा सेवा पूरी तरह से लड़खड़ा गई है। वार्डों में भर्ती मरीजों को भी परेशानियां झेलनी पड़ रही हैं। दूर दराज से आ रहे मरीज बिना इलाज लौटने को मजबूर हैं। सीनियर डॉक्टरों के जरिए कुछ ओपीडी चलीं भी लेकिन ज्यादातर मरीज ओपीडी के आगे पर्चा लेकर ही खड़े रहे। वार्ड और ओपीडी के अलावा ट्रामा सेंटर की इमरजेंसी, अस्पताल की इमरजेंसी, बच्चा वार्ड, ऑपरेशन थिएटर हर जगह जूनियर डॉक्टर समेत सभी रेजीडेंट डॉक्टरों ने अपनी सेवाएं देने से मना कर दिया है।
हॉस्टल में लगेंगे बायोमेट्रिक, आईएमएस में पुख्ता होगी सुरक्षा व्यवस्था
बीएचयू में बाहरी और अवांछनीय तत्वों को रोकने लिए विश्वविद्यालय प्रशासन अब नई व्यवस्थाएं करेगा। इसमें हास्टल से लेकर आईएमएस तक सुरक्षा व्यवस्था पुख्ता करने का भी निर्णय लिया गया। आईएमएस में स्वतंत्र सुरक्षा इकाई स्थापित करने और उपाधीक्षक या रिटायर्ड आईपीएस को नोडल अधिकारी नियुक्त किया जाएगा। इसके अलावा हॉस्टल एलाट होने वाले छात्रों के अभिभावकों से बांड भी लिया जाएगा। आईएमएस में तीन छात्रों की कमेटी बनाई जाएगी और बीएचयू प्रशासन से संपर्क में रहकर संवाद करेगी।
बीएचयू प्रशासन के साथ प्रशासनिक अधिकारियों की बैठक में निर्णय लिया गया कि हॉस्टल में बायोमेट्रिक और आई कार्ड व्यवस्था लागू की जाएगी। प्रतिमाह बच्चों से सीधा संवाद करने के लिए कमेटी गठित की गई है। इसमें कुलपति और विश्वविद्यालय के अधिकारियों के अलावा प्रशासन व पुलिस के अधिकारी भी शामिल रहेंगे।
आईएमएस में चिकित्सकों के अलावा मरीजों व तीमारदाराें की सुरक्षा की व्यवस्था होगी। पूरे कैंपस में सीसीटीवी कैमरों को भी दुरुस्त कराए जाने का निर्णय लिया गया। इस बीच रेजीडेंट डॉक्टरों ने भी अस्पताल प्रशासन के समक्ष एक ही तरफ से प्रवेश और निकासी की व्यवस्था करने, वार्ड में पास व्यवस्था लागू करने की मांग रखी।
जिलाधिकारी सुरेंद्र सिंह ने बताया कि बीएचयू प्रशासन के हर निर्णय का क्रियान्वयन कराया जाएगा। हमारा उद्देश्य बीएचयू के शैक्षणिक माहौल को सुधारना होगा। इसके लिए कठोर निर्णय भी लिए जाएंगे।