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पुरावशेषों की सटीक जानकारी देगा बीएचयू, इस तरह का अध्ययन करने वाला बनेगा देश का पहला केंद्र

Sat, 27 Jul 2019 11:40 AM IST
Sayali Maurya रबीश श्रीवास्तव, अमर उजाला, वाराणसी
रबीश श्रीवास्तव, अमर उजाला, वाराणसी Published by: Sayali Maurya Updated Sat, 27 Jul 2019 11:40 AM IST
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BHU Become india first Antiquity testing center in varanasi
बीएचयू परिसर में बनकर तैयार सेंट्रल डिस्कवरी सेंटर - फोटो : अमर उजाला

खुदाई में मिलने वाले पुरावशेषों के बारे में अब सटीक जानकारी मिल सकेगी। उनकी सही उम्र का भी पता लगाया जा सकेगा। इस तरह का अध्ययन करने वाला बीएचयू देश का पहला केंद्र होगा। इसके लिए डिपार्टमेंट ऑफ साइंस एंड टेक्नालॉजी (DST) 26 जुलाई को आईआईटी मुंबई में 125 करोड़ रुपये का स्वीकृति पत्र दिया। अब तक इतिहासविद् और पुरातत्वविद् केवल आकलन ही कर पाते थे। सही उम्र का पता लगाने के लिए पुरावशेषों को विदेशों के विश्वविद्यालयों में भेजना पड़ता है। 

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काशी हिंदू विश्वविद्यालय परिसर में बनकर तैयार सेंट्रल डिस्कवरी सेंटर (CDC) में इसके लिए आधुनिक उपकरण लगाए जाएंगे। सेटअप के लिए 25 करोड़ रुपये पहले ही मिल चुके हैं, जबकि डीएसटी की ओर से बीएचयू को 125 करोड़ रुपये और दिए जा रहे हैं।
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कुलपति कार्यालय के पास बनकर तैयार छह मंजिला सीडीसी में उपकरण लगाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। करीब 150 करोड़ रुपये से जो उपकरण लगाए जा रहे हैं, उसमें आइसोटोप्स रेशियो मॉस स्पेक्ट्रोमेट्री (IRMS) की भूमिका महत्वपूर्ण होगी। इससे पुरावशेषों की सही उम्र का पता लग सकेगा।
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विज्ञान संस्थान के निदेशक प्रो. अनिल कुमार त्रिपाठी ने बताया कि अब तक उम्र की सटीक जानकारी के लिए पुरावशेष अमेरिका के विश्वविद्यालयों में भेजने पड़ते थे। इसके लिए संबंधित संस्थान को 500 डालर खर्च करने होते थे। आईआरएमएस के स्थापित होने के बाद पूरी जानकारी यहीं मिल जाएगी। उपकरणों के लिए देशभर से आठ संस्थानों ने आवेदन किया था, लेकिन बीएचयू को यह उपलब्धि मिली।

बीएचयू के कुलपति प्रो. राकेश भटनागर का कहना है कि शोध छात्रों और शिक्षकों के लिए सीडीसी अविष्कार का बड़ा केंद्र होगा। उन्हें किसी भी उपकरण के लिए दूसरी जगहों पर जाने की जरूरत नहीं होगी। फिलहाल 125 करोड़ से उपकरण मंगाए जाएंगे, जल्द ही और सुविधाएं भी मिलने लगेंगी।

कोशिकीय अध्ययन भी होगा आसान 

डीएसटी की स्कीम सैफ (सुपर स्फीकेटेड एनालिटिकल इक्यूपमेंट) के तहत मिलने वाली इस धनरािश से यहां दो बड़े सेटअप में छोटे-बड़े दस उपकरण लगेंगे। इसमें इमेजिंग सेटअप और मैटेरियल एनालिसिस, आईसीपीएमएस शामिल हैं। इमेजिंग सेटअप में इलेक्ट्रान माइक्रोस्कोप लगाया जाएगा। इससे छोटी से छोटी कोशिका के भाग देखे जा सकेंगे, जबकि कनफोकल माइक्रोस्कोप से किसी भी मैटेरियल की वस्तुस्थिति को जाना जा सकेगा। मैटेरियल एनालिसिस में किसी मेटल के बारे में बारीकियों के जानने में आसानी होगी। 


स्टार्टअप और वीडियो कांफ्रेंसिंग की भी सुविधा :
एक ही छत के नीचे न केवल बीएचयू, बल्कि देश के किसी भी विश्वविद्यालय, उच्च शिक्षण संस्थानों के शिक्षक और छात्र विज्ञान, तकनीकी, इतिहास, कृषि, मेडिकल आदि से जुड़े शोध कर सकेंगे। यहां शोध के साथ ही स्टार्टअप शुरू करने की भी सुविधा रहेगी। अगर शोध कार्य के दौरान किसी शिक्षक या शोध छात्र को दूसरे विश्वविद्यालयों के शिक्षकों से कोई जानकारी चाहिए हो तो वह वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से बात कर सकेंगे। इसके लिए अलग कांफ्रेंस रूम भी बनाया गया है। इसके अलावा विद्वानों के लेक्चर भी ऑनलाइन यहां होंगे।

यह भी है खास

  • अटल इन्क्यूबेशन सेंटर
  • हाई परफार्मेंस कंप्यूटिंग सेंटर
  • एजूकेशनल मीडिया और इन्नोवेशन सेंटर
  • हाई इमेजिनरी लैब
  • छह मंजिला भवन में हर मंजिल पर एक लैब
     
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