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Varanasi News: भोले बाबा की नगरिया गुलजार बा, सावनी बयार बा ना

Sat, 02 Sep 2023 01:04 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sat, 02 Sep 2023 01:04 AM IST
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Bhole Baba Ki Nagari Gulzar Ba, Sawani Bayar Ba Na
कण-कण शंकर की नगरी में कजरी की तान से विश्वेश्वर से केदारखंड तक झंकृत हो उठा। शाम ढलने के बाद शुरू हुए लोकगीतों के तार जब जुड़े तो परंपरा भी परवान चढ़ी। काशीवासियों ने परंपराओं को सहेजा और अपने आराध्य के चरणों में सबसे पहले कजरी अर्पित की। आदिश्वेश्वर का धाम जब कजरी से गुलजार हुआ तो श्रद्धालु भी झूम उठे।शुक्रवार की शाम को नवोदित कलाकार शिवांगी पाठक, प्रिया, मृणालिनी, गोल्डी और वृंदा ने भोले बाबा के दरबार में कजरी की लोकधुनों से बाबा का अभिषेक किया। उन्होंने भोले बाबा की नगरिया गुलजार बा, सावनी बयार बा ना...को जब सुर दिया तो हर किसी को भादो के महीने में सावन का अहसास अंतस तक महसूस हुआ। इसके बाद उन्होंने छीटिया पहिर के जइबे सखिया, भोले बाबा पुजनवा ना..., सावन के बरसे रिमझिम बदरिया, चुए बाबा भोला के झोपड़िया ना... की सुमधुर प्रस्तुतियां दीं। इसके बाद उन्होंने भोले वास करें काशी मा गौरा पार्वती के साथ...से समापन किया। वहीं दूसरी तरफ गौरी केदारेश्वर मंदिर की चौखट पर गवनहारिनों की टोली की जुटान हुई। अस्सी से आने वाली महिलाओं की टोली बाबा का मंदिर बंद होने के बाद मध्यरात्रि तक बाबा को कजरी, झूला का श्रवण कराया।
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पहले खेली फिर गाई जमकर कजरी
वाराणसी। शहर से गांव तक रतजगा मनाया गया। कजरी पर रस रसीला जलेबा की मिठास भी जबान पर घुलती रही। शाम से ही बाजार में जलेबा नजर आने लगा था। शहर से लेकर गांव तक जलेबा की दुकानें शाम से ही गुलजार हो उठीं। कजरी तीज का व्रत रखने वाली महिलाओं के साथ ही पुरुषों ने भी जलेबा और पूजा पाठ का सामान खरीदा। तीज का व्रत रखने वाली महिलाओं ने कजरी गीत और सोहर गाकर रतजगा किया। मंडुवाडीह में भी महिलाओं ने कजरी की परंपरा निभाई, पहले कजरी खेली और फिर कजरी गाकर और जलेबा खाकर रतजगा मनाया।
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डेढ़ करोड़ से अधिक का बिक गया जलेबा
वाराणसी। कजरी तीज पर शहर से लेकर गांव तक देर रात तक जलेबा की बिक्री होती रही। व्यापारियों के अनुसार डेढ़ करोड़ से अधिक का जलेबा बिक गया। देसी घी का जलेबा सामान्य दुकानों पर चार सौ रुपये किलो, चौरेठा में खोवा मिलाकर बना गुलगुला चार सौ रुपये किलो, देसी गुड़ से बना देसी घी का जलेबा चार सौ रुपये किलो तक बिका। शहर की बड़ी दुकानों पर जलेबा छह सौ से आठ सौ रुपये किलो और वनस्पति का जलेबा 160 से 220 रुपये किलो तक बिक गया। मच्छोदरी इलाके में जलेबा की दुकान लगाने वाले विनोद जायसवाल ने बताया कि इस वर्ष चीनी और गुड़ का जलेबा बनाया गया है। बच्चों को गुड़ का जलेबा ज्यादा पसंद आ रहा था। उधर, मैदागिन, दारानगर, मुकीमगंज, प्रह्लाद घाट और राजघाट में भी हलवाइयों ने जलेबा की दुकानें सजाई हुई थी।
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