{"_id":"69bf0184a42a544793070e44","slug":"bhojpuri-is-the-basis-for-the-development-of-hindi-governor-varanasi-news-c-20-vns1021-1329232-2026-03-22","type":"story","status":"publish","title_hn":"हिंदी के विकास का आधार है भोजपुरी : राज्यपाल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
हिंदी के विकास का आधार है भोजपुरी : राज्यपाल
विज्ञापन
पिंडरा स्थित बनारस पब्लिक स्कूल में तथागत संस्था द्वारा कार्यक्रम में तेलंगला के राजपाल द्वारा
- फोटो : samvad
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
भोजपुरी हिंदी भाषा के विकास का आधार है। भोजपुरी बोलने वाले तो बहुत हैं लेकिन भाषा विवाद के कारण उसे क्षेत्रीय भाषा की मान्यता नही मिल सकी। यह बातें शनिवार को तेलंगाना के राज्यपाल शिवप्रताप शुक्ला ने बनारस पब्लिक स्कूल में हुए राहुल सांकृत्यायन लोकभाषा भोजपुरी तथागत सम्मान समारोह में कहीं।
उन्होंने कहा कि साहित्य का मुकाम सम्मान देना होता है। आज के इस सम्मान से न केवल साहित्यकारों को ऊर्जा मिलेगी बल्कि आने वाले भावी प्रतिभाशाली साहित्यकारों को एक मंच मिलेगा। इससे उन्हें रचना के प्रति प्रेरणा मिलेगी। उन्होंने कहा कि विदेशी साहित्यकार मस्क्युलर ने भी अध्ययन बाद कहा कि है कि यदि वेद नही रहता तो संसार में कुछ नही रहता। उन्होंने कहा कि बोली हमारी जीवन पद्धति है लेकिन भाषा हमारे संस्कार है। आज मॉरीशस में भोजपुरी भाषा दूसरी राष्ट्र भाषा के रूप में स्थापित है। लेकिन भारत देश में भोजपुरी को वह सम्मान नही मिल सका जो मिलना चाहिए।
साहित्यकार व कवि प्रोफेसर डॉ. प्रकाश उदय पांडेय के अरज निहोरा कृति को राहुल सांकृत्यायन लोकभाषा भोजपुरी सम्मान से 51 हजार राशि और तथागत लोकभाषा व्याकरण सम्मान भोजपुरी शब्दकोश के लेखक चंद्रशेखर परवाना को 21 हजार नकद पुरस्कार से सम्मानित किया गया। संस्था की ओर से हुए दूसरे सम्मान समारोह के दौरान तथागत पांडुलिपि प्रकाशन योजना के तहत चयनित चार पुस्तकों जिसमें प्रतिभा सिंह की रचित पुस्तक जब नेह का धागा टूटे, आकृति विज्ञा अर्पण की कृति ललमुनिया, लालबहादुर चौरसिया की कृति चुभे लागल बरगद के छाव व रामवचन यादव की कृति अंगूठा कहत हमार बा के पुस्तक का विमोचन राज्यपाल ने किया। संस्था के संरक्षक और पूर्व आईएएस डॉ. एनपी सिंह ने स्वागत भाषण दिया। अध्यक्षता डॉ. सदानंद शाही और संचालन डॉ गोपाल यादव ने किया। साहित्यकार सीमा पांडेय, तथागत ट्रस्ट की अध्यक्षा बिंदु सिंह रहीं। इस दौरान साहित्यकार प्रदीप शुक्ला, प्रधानाचार्य परिषद के प्रदेश संरक्षक देवकृष्ण शर्मा, प्रधानाचार्य एके शुक्ला, पूर्व प्रधानाचार्य डॉ बलधारी मौजूद यादव रहे।
विज्ञापन
विज्ञापन
उन्होंने कहा कि साहित्य का मुकाम सम्मान देना होता है। आज के इस सम्मान से न केवल साहित्यकारों को ऊर्जा मिलेगी बल्कि आने वाले भावी प्रतिभाशाली साहित्यकारों को एक मंच मिलेगा। इससे उन्हें रचना के प्रति प्रेरणा मिलेगी। उन्होंने कहा कि विदेशी साहित्यकार मस्क्युलर ने भी अध्ययन बाद कहा कि है कि यदि वेद नही रहता तो संसार में कुछ नही रहता। उन्होंने कहा कि बोली हमारी जीवन पद्धति है लेकिन भाषा हमारे संस्कार है। आज मॉरीशस में भोजपुरी भाषा दूसरी राष्ट्र भाषा के रूप में स्थापित है। लेकिन भारत देश में भोजपुरी को वह सम्मान नही मिल सका जो मिलना चाहिए।
विज्ञापन
साहित्यकार व कवि प्रोफेसर डॉ. प्रकाश उदय पांडेय के अरज निहोरा कृति को राहुल सांकृत्यायन लोकभाषा भोजपुरी सम्मान से 51 हजार राशि और तथागत लोकभाषा व्याकरण सम्मान भोजपुरी शब्दकोश के लेखक चंद्रशेखर परवाना को 21 हजार नकद पुरस्कार से सम्मानित किया गया। संस्था की ओर से हुए दूसरे सम्मान समारोह के दौरान तथागत पांडुलिपि प्रकाशन योजना के तहत चयनित चार पुस्तकों जिसमें प्रतिभा सिंह की रचित पुस्तक जब नेह का धागा टूटे, आकृति विज्ञा अर्पण की कृति ललमुनिया, लालबहादुर चौरसिया की कृति चुभे लागल बरगद के छाव व रामवचन यादव की कृति अंगूठा कहत हमार बा के पुस्तक का विमोचन राज्यपाल ने किया। संस्था के संरक्षक और पूर्व आईएएस डॉ. एनपी सिंह ने स्वागत भाषण दिया। अध्यक्षता डॉ. सदानंद शाही और संचालन डॉ गोपाल यादव ने किया। साहित्यकार सीमा पांडेय, तथागत ट्रस्ट की अध्यक्षा बिंदु सिंह रहीं। इस दौरान साहित्यकार प्रदीप शुक्ला, प्रधानाचार्य परिषद के प्रदेश संरक्षक देवकृष्ण शर्मा, प्रधानाचार्य एके शुक्ला, पूर्व प्रधानाचार्य डॉ बलधारी मौजूद यादव रहे।
विज्ञापन