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काशी में भगवानदास ने जगाई थी शिक्षा की अलख

Sat, 13 Jan 2018 02:01 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Updated Sat, 13 Jan 2018 02:01 PM IST
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Bhagwandas initiative for education in kashi
भारत रत्न डॉ. भगवानदास
भारत रत्न डॉ. भगवानदास का स्वतंत्रता आंदोलन के साथ-साथ शिक्षा के क्षेत्र में अहम योगदान रहा है, जिसे भुलाया नहीं जा सकता। महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ की स्थापना में मुख्य भूमिका अदा करने वाले भगवानदास विद्यापीठ के न केवल पहले कुलपति रहे बल्कि बीएचयू के दर्शनशास्त्र विभाग में आचार्य भी रहे।
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महामना ने बीएचयू की स्थापना की तो भगवान दास ने विद्यापीठ की स्थापना का काशी में शिक्षा की अलख जगाई। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने 1920 के अंत में शुरू किए असहयोग आंदोलन में सरकारी सहायता से चलने वाली शिक्षण संस्थाओं को छोड़ने वाले आचार्यों में से एक भगवानदास भी शामिल रहे।
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12 जनवरी 1869 को बनारस में साहू परिवार में जन्म लेने के बाद पाश्चात्य दर्शन विषय से एमए की पढ़ाई पूरी की। 1899-1914 तक सेंट्रल हिंदू कॉलेज के संस्थापक सदस्य और अवैतनिक मंत्री पद पर रहने के बाद काशी विद्यापीठ की स्थापना में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। 
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बीएचयू में नाम पर है छात्रावास

Bhagwandas initiative for education in kashi
BHU
भारत रत्न प्राप्त करने वाले भगवान दास के कार्यकाल को लोग आज भी याद करते रहते हैं। छात्र-छात्राओं सहित सभी को इसकी याद रहे इसके लिए विश्वविद्यालय के केंद्रीय पुस्तकालय का नाम उनके नाम पर रखा गया है। साथ ही बीएचयू में इनके नाम पर छात्रावास भी है।

महमूरगंज की मोतीझील कालोनी में उनका मकान रहा है। शिक्षाविद होने के साथ-साथ भगवानदास जी के साथ कई राजनीतिक उपलब्धियां भी जुड़ी हैं। 40 के दशक में लंबे समय तक बनारस जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष रहे।

नगर महापालिका चुनाव में पार्टी को ऐतिहासिक जीत के साथ ही महापालिका अध्यक्ष रहते हुए कई सुधार के कार्य किए। उन्होने डॉक्टर एनी बेसेन्ट के साथ व्यवसायी सहयोग किया, जो बाद मे सेन्ट्रल हिन्दू कालेज की स्थापना का प्रमुख कारण बना। डॉ. भगवान दास ने हिन्दी और संस्कृत मे ३० से भी अधिक पुस्तकों का लेखन किया है।
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