रेसलिंग की दुनिया में छाने को बेताब भदोही के रिंकू, कनाडाई प्रतिद्वंद्वी को चंद मिनटों में दी पटकनी
- वर्ल्ड रेसलिंग एंटरटेनमेंट में हिस्सा लेकर देश का नाम रौशन किया
- इंडस शेरों की जोड़ी ने कनाडाई जोड़ी को पटकनी ने सुर्खियां बटोरी
- अब तक बेसबाल खिलाड़ी के रूप में थी रिंकू की दुनिया में पहचान
विस्तार
बेसबाल के बाद अब भदोही के रिंकू सिंह रेसलिंग की दुनिया में छाने को बेताब हैं। इसकी शुरुआत उन्होंने वर्ल्ड रेसलिंग एंटरटेनमेंट (डब्ल्यूडब्ल्यूई) से की है। रिंकू सिंह और सौरव गुर्जर की भारतीय जोड़ी ने अपने कनाडाई प्रतिद्वंद्वी को चंद मिनटों में पटकनी दे न केवल देश का नाम रौशन किया बल्कि अपने दमखम का लोहा भी मनवाया।
कालीन नगरी के छोटे से गांव होलपुर से निकलकर सात समंदर पार अमेरिका पहुंचने वाले जिले के लाल रिंकू सिंह के पंच से विदेशी पहलवान चंद मिनटों में ही चित हो रहे हैं। बृहस्पतिवार को डब्ल्यूडब्ल्यूई की रिंग में कनाडाई पहलवानों की जोड़ी को हराकर रिंकू ने अगले दौर में प्रवेश किया। रिंकू को दशक भर पहले तब पहचान मिली थी, जब उन्होंने अमेरिका में बेसबाल खेला। उस समय देश में बेसबाल में कम लोग ही रुचि दिखाते थे।
यह रिंकू वही हैं, जिनके जीवन पर डिज्नी ने ‘द मिलियन डॉलर आर्म’ नाम से फिल्म बनाई गई थी। अब फिर रिंकू सिंह देश का नाम दुनिया भर में रौशन कर रहे हैं। डब्ल्यूडब्ल्यूई का नाम आते ही हमारे देश के खली यानी दलीप सिंह राणा का नाम हर भारतीय के जेहन में आ जाता है और अब रिंकू भी डब्ल्यूडब्ल्यूई में भारत की पहचान बन गए हैं। छह फिट तीन इंच लंबे और 102 किलोग्राम वजनी रिंकू ने दुबई में अप्रैल 2017 में डब्ल्यूडब्ल्यूई चयन प्रशिक्षण में भाग लिया था।
रिंकू एक साधारण परिवार से ताल्लुक रखते हैं। रिंकू के पिता ब्रह्मदीन सिंह पेशे से एक ट्रक ड्राइवर थे और उन्होंने ड्राइविंग कर रिंकू का पालन-पोषण किया। जब रिंकू बेसबाल खेलने अमेरिका गए, तब घर की माली हालत सुधरी। 68 वर्षीय पिता ब्रह्मदीन सिंह आज भी गांव में ही रहते हैं और जब रिंकू के बारे में कोई चर्चा कर दे तो फिर जो भाव उनके चेहरे पर नजर आता है, उस गर्व और सुखानुभूति को शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता है। रिंकू सिंह और सौरव गुर्जर की टीम का नाम है इंडस शेर। बृहस्पतिवार को उन्होंने ईवर राइज टीम की कनाडा के पहलवानों चेस पार्कर और मैट मार्टल को हराया।
रिंकू सिंह के जीवन पर बन चुकी है फिल्म
ज्ञानपुर। जूनियर राष्ट्रीय भाला प्रतियोगिता के विजेता रिंकू की राह शुरुआती दिनों में आसान नहीं थी। यही कारण है कि जब वर्ष 2008 में टेलीविजन शो ‘द मिलियन डॉलर आर्म’ में भाग लेने का मौका मिला तो रिंकू ने प्रतियोगिता को जीतकर ही दम लिया। उसके बाद तो रिंकू ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। उनका अमेरिका की नामी बेसबाल टीम से करार हो गया। रिंकू के जीवन संघर्ष से प्रभावित होकर उन पर डिज्नी ने ‘द मिलियन डॉलर आर्म’ नामक फिल्म भी बनाई थी।