फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Varanasi News ›   Before birth of Tirthankaras in Kashi rained gems continuously for 15 month

Varanasi: तीर्थंकरों के जन्म से पहले काशी में 15 महीने लगातार हुई रत्नों की बरसात, ये है सर्वधर्म की राजधानी

Sat, 20 Apr 2024 01:19 PM IST
अमन विश्वकर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: अमन विश्वकर्मा Updated Sat, 20 Apr 2024 01:19 PM IST
सार

Varanasi News: हिंदू, मुस्लिम, सिख और इसाई के अलावा काशी जैन धर्म के अनुयायियों के लिए बेहद पावन है। जैन धर्म के चार तीर्थंकरों की जन्मस्थली जैनियों की आस्था का प्रमुख केंद्र है।

विज्ञापन
Before birth of Tirthankaras in Kashi rained gems continuously for 15 month
23वें तीर्थंकर पार्श्वनाथ काशी की पावन धरा पर अवतरित हुए - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

प्रसिद्ध अमेरिकी लेखक मार्क ट्वेन लिखते हैं कि बनारस इतिहास से भी पुरातन है, परंपराओं से पुराना है, किंवदंतियों से भी प्राचीन है और जब इन सबको एकत्र कर दें, तो उस संग्रह से भी दोगुना प्राचीन है। काशी को सर्वविद्या ही नहीं सर्वधर्म की राजधानी भी कहा जाता है।

विज्ञापन


जैन ग्रंथों के अनुसार, काशी में तीर्थंकरों के जन्म के पहले लगातार 15 महीने तक रत्नों की बरसात हुई। जैन धर्म के सातवें तीर्थंकर सुपार्श्वनाथ, आठवें तीर्थंकर चंद्रप्रभु, 11वें तीर्थंकर श्रेयांसनाथ और 23वें तीर्थंकर पार्श्वनाथ काशी की पावन धरा पर अवतरित हुए। 
विज्ञापन


जैनियों के चार तीर्थंकरों ने लिया था पावन काशी में जन्म
आनंदकानन के वन में जैन तीर्थंकरों ने ज्ञान के लिए साधना की और अपने ज्ञान के प्रकाश से विश्व को प्रकाशित किया। 23वें तीर्थंकर श्री पार्श्वनाथ का जन्मस्थान जैनियों के लिए सबसे खास तीर्थ है। भेलूपुर में 2880 साल पहले काशी के महाराज अश्वसेन के महल में उन्होंने जन्म लिया। 
विज्ञापन
विज्ञापन


तीर्थंकर पार्श्वनाथ की भारतवर्ष में सर्वाधिक प्रतिमाएं और मंदिर हैं। उनके जन्म स्थान भेलूपुर में बहुत ही भव्य और विशाल दिगंबर और श्वेतांबर जैन मंदिर बना हुआ है।

जैन समाज के सुरेंद्र जैन ने बताया कि 24 तीर्थंकरों में भगवान पार्श्वनाथ लोकजीवन में सर्वाधिक प्रतिष्ठित हैं। हर राज्य में भगवान पार्श्वनाथ विभिन्न विशेषणों के साथ पूजे जाते हैं। सातवें तीर्थंकर श्री सुपार्श्वनाथ भगवान का जन्मस्थान भदैनी में गंगा के तट पर है। 


घाट किनारे ही उनके दो मंदिर हैं। एक प्रभु घाट और दूसरा जैन घाट पर। आठवें तीर्थंकर चंद्र प्रभु का जन्मस्थान चौबेपुर के पास गंगा के किनारे चंद्रावती गांव है। 11वें तीर्थंकर श्रेयांसनाथ का जन्म इक्ष्वाकु वंश में सारनाथ के पास सिंहपुरी में राजा विष्णु के यहां हुआ था। सारनाथ में उनका मंदिर भी है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed