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नींद में वीडीए, 174 करोड़ की योजना दांव पर

Sat, 16 Apr 2016 01:53 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी Updated Sat, 16 Apr 2016 01:53 AM IST
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BDO in sleep, 174 million plan at stake
रोक के बावजूद वरुणा नदी के किनारे किया जा रहा है अवैध निर्माण।
मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के ड्रीम प्रोजेक्ट ‘वरुणा कॉरिडोर’ के लिए ड्रेजिंग की शुरुआत के बाद भी सरकारी मशीनरी इसे मूर्तरूप देने में कोई खास दिलचस्पी नहीं ले रही है। खासकर वीडीए की सुस्ती से 174 करोड़ की इस योजना के भविष्य पर सवाल खड़े हो गए हैं।
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नदी क्षेत्र में कराए गए अवैध निर्माणों को गिराए बिना वरुणा कॉरिडोर को विकसित नहीं किया जा सकता और कमिश्नर के निर्देश के बाद भी वीडीए की आंखें खुल नहीं रही हैं। बस एक दिन वरुणा किनारे की बुद्ध विहार कॉलोनी में अभियान चलाकर वीडीए ने मानो अपनी जिम्मेदारियों से ही मुक्ति पा ली है। जबकि, वीडीए ने जहां अभियान चलाया था वहीं बगल में ही धड़ल्ले से अवैध निर्माण कराया जा रहा है। वीडीए का यही रवैया रहा तो वरुणा कॉरिडोर का हाल भी अन्य योजनाओं की तरह हो जाएगा। 
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चौकाघाट और वरुणा पुल से रोजाना वीआईपी और उच्चाधिकारी गुजरते हैं लेकिन वीडीए, नगर निगम और भू-माफिया के गठजोड़ से मनमाने तरीके से कराए गए अवैध निर्माणों पर किसी की नजर नहीं पड़ती। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव का ड्रीम प्रोजेक्ट होने के बावजूद वीडीए के अधिकारियों को इसकी तनिक भी परवाह नहीं। हालात ऐसे हैं कि नदी की तलहटी तक घुसकर निर्माण कराए गए हैं। नदी क्षेत्र में कराए गए अवैध निर्माणों में कई रिहायशी भवन और होटल भी हैं। इन्हें तोड़ने की जहमत कोई नहीं उठा रहा है। अलबत्ता, छह भवनों को नोटिस जारी कर वीडीए ने अपनी जिम्मेदारियों से किनारा कर लिया है।
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बता दें, वरुणा किनारे चौकाघाट पुल से दिखने वाले अवैध निर्माण को पिछले साल तत्कालीन डीएम प्रांजल यादव ने सील कराया था। उनके जाने के कुछ ही महीनों बाद पांच मंजिलें भवन में खिड़कियां और दरवाजे लगने शुरू हो गए। वीडीए ने इस ओर ध्यान देने की जरूरत नहीं समझी। जबकि, उच्चाधिकारियों, जनप्रतिनिधियों से लेकर वीवीआईपी तक चौकाघाट पुल से गुजरते हैं लेकिन अवैध निर्माणों पर नजर फेरने की जहमत कोई नहीं उठाता। वरुणा कॉरिडोर के तहत अब तक 15 करोड़ रुपये स्वीकृत हुए हैं, जिसके तहत ड्रेजिंग कराई जा रही है। 


 
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