{"_id":"ef427617a0ee6cc1d6461d26d1e68b57","slug":"based-on-life-values-advocated-for-education-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"जीवन मूल्यों पर आधारित शिक्षा की वकालत","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
जीवन मूल्यों पर आधारित शिक्षा की वकालत
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
Updated Sat, 12 Sep 2015 02:18 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
काशी हिंदू विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. गिरीश चंद्र त्रिपाठी ने कहा कि शिक्षा केवल मस्तिष्क की ही नहीं हृदय की भी होनी चाहिए। ऐसा तभी होगा जब शिक्षा देश की संस्कृति और जीवन मूल्यों पर आधारित हो। प्रो. त्रिपाठी ने ये बातें शुक्रवार से महमूरगंज स्थित माहेश्वरी भवन में शुरू विद्या भारती की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक के उद्घाटन सत्र में कहीं। मुख्य अतिथि प्रो. त्रिपाठी ने कहा कि जीवन और जगत के प्रति दृष्टिकोण के आधार पर ही भारत विश्वगुरु रहा और अध्यात्म, साहित्य संगीत कला आदि में अग्रणी बना। मगर जब हम जीवन मूल्यों से कट गए तो राजनीतिक सत्ता भी गई और स्वतंत्रता भी।
कुलपति प्रो. त्रिपाठी ने जीवन मूल्यों पर आधारित शिक्षा की वकालत करने के साथ ही संस्कृति की शिक्षा पर जोर दिया। कहा कि शिक्षा की नई नीति ऐसी बनानी होगी, जिसमें शिक्षा सामाजिक सशक्तिकरण का माध्यम बने। शिक्षा नीति का केंद्र बिंदु राष्ट्र है इसलिए नई शिक्षा नीति में राष्ट्र को केंद्र में रखकर विचार करना पड़ेगा। मौजूदा सरकार इस दिशा में विचार कर रही है। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे विद्या भारती के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. गोविंद शर्मा
ने कहा कि शिक्षा के साथ-साथ भाषा की नीति पर भी चिंतन जरूरी है। प्राथमिक शिक्षा मातृभाषा में दी जाए ऐसा शिक्षाविदों का मानना है। शिक्षा के बारे में कौन विचार करे यह भी तय होना चाहिए। कहा कि जब तक अच्छे शिक्षक हम तैयार नहीं करेंगे, शिक्षा नीति का प्रभावी क्रियान्वयन संभव नहीं है। प्रारंभ में बैठक की प्रस्तावना विद्या भारती के राष्ट्रीय सह संगठनमंत्री जेएम काशीपति ने रखी। सरस्वती वंदना के पश्चात राष्ट्रीय महामंत्री ललित बिहारी गोस्वामी ने दिवंगत शिक्षाविदों के योगदान की चर्चा की।
विज्ञापन
विज्ञापन
कुलपति प्रो. त्रिपाठी ने जीवन मूल्यों पर आधारित शिक्षा की वकालत करने के साथ ही संस्कृति की शिक्षा पर जोर दिया। कहा कि शिक्षा की नई नीति ऐसी बनानी होगी, जिसमें शिक्षा सामाजिक सशक्तिकरण का माध्यम बने। शिक्षा नीति का केंद्र बिंदु राष्ट्र है इसलिए नई शिक्षा नीति में राष्ट्र को केंद्र में रखकर विचार करना पड़ेगा। मौजूदा सरकार इस दिशा में विचार कर रही है। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे विद्या भारती के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. गोविंद शर्मा
विज्ञापन
ने कहा कि शिक्षा के साथ-साथ भाषा की नीति पर भी चिंतन जरूरी है। प्राथमिक शिक्षा मातृभाषा में दी जाए ऐसा शिक्षाविदों का मानना है। शिक्षा के बारे में कौन विचार करे यह भी तय होना चाहिए। कहा कि जब तक अच्छे शिक्षक हम तैयार नहीं करेंगे, शिक्षा नीति का प्रभावी क्रियान्वयन संभव नहीं है। प्रारंभ में बैठक की प्रस्तावना विद्या भारती के राष्ट्रीय सह संगठनमंत्री जेएम काशीपति ने रखी। सरस्वती वंदना के पश्चात राष्ट्रीय महामंत्री ललित बिहारी गोस्वामी ने दिवंगत शिक्षाविदों के योगदान की चर्चा की।
विज्ञापन