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बनारसीपन और सादगी थी डॉ. रघुनाथ सिंह की पहचान, कई बार ठुकराया मंत्री पद, 1952 से लगातार रहे सांसद  

Sun, 25 Apr 2021 12:36 PM IST
गीतार्जुन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: गीतार्जुन गौतम Updated Sun, 25 Apr 2021 12:36 PM IST
सार

कल मनाई जाएगी 29वीं पुण्यतिथि, सादगी से होगा आयोजन

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Banarasipan and simplicity were the identity of Dr. Raghunath Singh, several times rejected ministerial post, MP continuously since 1952
डॉ. रघुनाथ सिंह - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

आजाद भारत में काशी के पहले निर्वाचित सांसद डॉ. रघुनाथ सिंह की 29वीं पुण्यतिथि 26 अप्रैल को मनाई जाएगी। डॉ. सिंह ने सांसद रहते हुए कभी भी कोई सरकारी सुविधा नहीं ली।
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औरंगाबाद स्थित आवास पर प्रपौत्र सतीश कुमार सिंह ने बताया कि डॉ. रघुनाथ सिंह की 29वीं पुण्यतिथि लॉकडाउन के कारण सादगी से मनाई जाएगी। उन्होंने बताया कि उनके आवास पर कभी पं. नेहरू, इंदिरा जी, चौधरी चरण सिंह और शास्त्री जी जैसे शीर्ष नेताओं का आना-जाना लगा रहता था। परदादा डॉ. रघुनाथ सिंह हमेशा काशी के चहुंमुखी विकास को ध्यान में रखते हुए इसे क्षितिज पर पहुंचाने के लिये प्रयासरत रहते थे । 1952 से लगातार सांसद रहे डॉ. रघुनाथ सिंह ने जनता के बीच बने रहने के लिए कई बार मंत्री पत्र को भी ठुकरा दिया।
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Banarasipan and simplicity were the identity of Dr. Raghunath Singh, several times rejected ministerial post, MP continuously since 1952
डॉ. रघुनाथ सिंह - फोटो : अमर उजाला
पं. लाल बहादुर शास्त्री जब प्रधानमंत्री हुआ करते थे तब भी डॉ. रघुनाथ सिंह ने मंत्री पद को यह कहते हुए ठुकरा दिया था कि इससे मुझपर क्षेत्रवाद का आरोप लग जाएगा। दशाश्वमेध स्थित अपने आवास पर हर शाम को महामना पं. मदन मोहन मालवीय, डॉ. संपूर्णानंद, पं. कमलापति त्रिपाठी सहित हर वर्गों के विशिष्ट लोगों के साथ आवश्यक मुद्दों पर विचार विमर्श किया करते थे।
 

उन्होंने अपने जीवन काल में कई पुस्तकें लिखीं थीं। इसमें अंग्रेजी में टुवड्र्स फ्रीडम, बुद्ध कथा, योग वशिष्ठï, आधुनिक राजनीति के कखग, एक कोना चौड़ा, कहां संस्कार, जागृत नेपाल, विश्व के धर्म प्रवर्तक, सर्वधर्म समभाव, लावारिस, दक्षिण पूर्व एशिया, आर्यन और ऑस्ट्रेलिया सहित अनेक पुस्तकें लिखीं।

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