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बनारस बनेगा गारमेंट हब: साड़ियों की नगरी का ग्लोबल अवतार, अमेरिका-यूरोप तक निर्यात; पूर्वांचल की बदलेगी पहचान

Mon, 26 Oct 2026 10:23 AM IST
Pragati Chand अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: Pragati Chand Updated Mon, 26 Oct 2026 10:23 AM IST
सार

साड़ी की नगरी काशी अब ग्लोबल गारमेंट हब बनेगी। सूरत से लेकर बेंगलुरु तक के दिग्गजों की नजर बनारस पर है। ऐसे में अब काशी में तैयार गारमेंट्स का अमेरिका, यूरोप और खाड़ी देशों में निर्यात होगा।

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Banaras to Become Garment Hub City of Sarees Transforms for Global Stage with Exports Reaching US and Europe
वाराणसी में पीएम मोदी - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार
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काशी अब पारंपरिक हथकरघा और बनारसी साड़ियों के गौरव के साथ-साथ आधुनिक औद्योगिक वस्त्र निर्माण (रेडीमेड गारमेंट्स) के एक प्रमुख केंद्र के रूप में तेजी से उभर रही है। देश के प्रमुख टेक्सटाइल समूहों में शुमार अरविंद लिमिटेड की नई इकाई का उद्घाटन रविवार को राजातालाब के खोचवां में रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया। इस यूनिट की स्थापना पर करीब 150 करोड़ रूपये का निवेश किया गया है। इस परियोजना के जमीन पर उतरने के साथ ही राज्य सरकार ने देशभर के बड़े वस्त्र एवं परिधान निवेशकों को पूर्वांचल और विशेषकर वाराणसी में निवेश करने का खुला न्योता दिया है। जिसके बाद बैंग्लोर, अहमदाबाद और सूरत के बड़े निवेशक वाराणसी में निवेश की तैयारी में हैं।

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खोचवां संयंत्र में आधुनिक सिलाई, कटिंग और फिनिशिंग मशीनों के साथ विश्वस्तरीय मैन्युफैक्चरिंग सुविधाएं स्थापित की गई हैं, जिससे उच्च गुणवत्ता वाले रेडीमेड गारमेंट्स का बड़े पैमाने पर उत्पादन संभव होगा। इस यूनिट से स्थानीय युवाओं, विशेष रूप से महिलाओं को बड़े पैमाने पर प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार मिलेगा।
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स्थानीय हुनरमंद कारीगरों को आधुनिक तकनीक से जोड़कर उनकी उत्पादकता और आय दोनों बढ़ाने का खाका तैयार किया गया है। इसके अलावा इस प्लांट में बनने वाले उच्च-मानक परिधानों को न केवल घरेलू बाजार में भेजा जाएगा, बल्कि अमेरिका, यूरोप और खाड़ी देशों में निर्यात करने की भी पूरी तैयारी है।

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अरविंद लिमिटेड की इस नई यूनिट के सफल संचालन के बाद उत्तर प्रदेश सरकार की टेक्सटाइल एवं गारमेंटिंग नीति के तहत अन्य प्रमुख कॉर्पोरेट घरानों को भी यहां क्लस्टर आधारित विकास के लिए आमंत्रित किया गया है। निवेशकों के लिए सिंगल-विंडो क्लीयरेंस, भूमि आवंटन में सरलता और आकर्षक वित्तीय सब्सिडी का प्रावधान किया गया है। पारंपरिक बनारसी सिल्क और हथकरघा कला की मजबूत बुनियाद पर आधुनिक गारमेंट उद्योग के इस नए विस्तार से काशी न केवल स्थानीय कारीगरों को आत्मनिर्भर बना रही है, बल्कि भारत के कुल परिधान निर्यात में भी अपनी मजबूत हिस्सेदारी दर्ज कराने की ओर अग्रसर है।

टेक्सटाइल हब के रूप में बदल रहा है बनारस
डीएवी अर्थशास्त्र विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. अनूप मिश्रा बताते हैं कि पूर्वांचल एक्सप्रेसवे, रिंग रोड और बाबतपुर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे की कनेक्टिविटी ने वाराणसी में लॉजिस्टिक्स को बेहद आसान और तेज बना दिया है। इसके अलावा पंडित दीनदयाल उपाध्याय हस्तकला संकुल जैसे आधुनिक व्यापार सुविधा केंद्रों के जरिए स्थानीय बुनकरों को पहले से ही अंतरराष्ट्रीय बाजार से जोड़ा जा रहा है। बुनकरों के लिए रमना में 75 एकड़ का टेक्सटाइल पार्क का निर्माण पहले से किया जा रहा है। 
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