Independence Day 2021: बनारस में 1930 से ही मनाया जाता है स्वतंत्रता दिवस, जानें वजह
कांग्रेस ने जब 1930 में पूर्ण स्वतंत्रता का संकल्प लिया था तो इसी के साथ बनारस में तिरंगा फहराया जाने लगा। लाहौर में संकल्प के बाद कांग्रेस हर साल 26 जनवरी को स्वतंत्रता दिवस मनाती थी। शहीदों की याद में कांग्रेसी हर साल मशाल जुलूस निकालते हैं।
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देश को आजादी 1947 में मिली, लेकिन बनारस में स्वतंत्रता दिवस 1930 से ही मनाया जाता था। कांग्रेस ने जब 1930 में पूर्ण स्वतंत्रता का संकल्प लिया था तो इसी के साथ बनारस में तिरंगा फहराया जाने लगा। लाहौर में संकल्प के बाद कांग्रेस हर साल 26 जनवरी को स्वतंत्रता दिवस मनाती थी। जब असल स्वतंत्रता दिवस 15 अगस्त हो गया तो इसी तिथि को कांग्रेस कमेटी भी टाउनहाल में ही मनाने लगी। अंग्रेजों का शासन था इसलिए कांग्रेसजन चुपके से टाउनहाल में जाते थे और झंडा फहरा देते थे।
कांग्रेस के पूर्व जिलाध्यक्ष प्रजानाथ शर्मा ने बताया कि अगस्त क्रांति के आंदोलन में बनारस जिले में चार स्थानों पर हुए गोलीकांड में कई लोग शहीद हुए। सबसे पहले दशाश्वमेध में 13 अगस्त की शाम कांग्रेस के जुलूस पर अंग्रेजों ने गोली चलाई। विंदेश्वरी पाठक तिरंगा लेकर आगे बढ़े और उनकी गिरफ्तारी होने पर पथराव शुरू हो गया। 26 राउंड गोली चली।
चार शहीद और दर्जनों घायल हुए। दूसरा धानापुर में 16 अगस्त को कामता प्रसाद विद्यार्थी के नेतृत्व में विद्रोह हुआ। इस दौरान हीरा सिंह, रघुनाथ सिंह, मंहगू शहीद हुए। भीड़ ने अनवारुल हक दरोगा सहित तीन पुलिस कर्मियों को भी मार दिया। तीसरा 17 अगस्त को चोलापुर में अंादोलन हुआ। आयर से वीरबहादुर सिंह के साथ जुलूस थाने पहुंचा। इसमें रामनरेश उपाध्याय, निरहू भर, श्रीराम, चौथी नोनिया और पंचम राम शहीद हुए। चौथा 28 अगस्त को सैयदराजा में हुआ।
जगत नारायन दुबे ने जुलूस का नेतृत्व किया। फेकू, श्रीधर और रामभरोस शहीद हुए। इसके अलावा बाबतपुर में विश्वनाथ सिंह, पहाड़ा रेलवे स्टेशन फूंकने में झुलसे। बीएचयू के छात्र नरेश सिन्हा, कैलहट स्टेशन फूंकने में और पंजाब के छात्र कश्मीरा सिंह गिरफ्तार हुए। उन्हें बीएचयू की अस्थायी जेल में रखा गया, जहां कश्मीरा की मौत हो गई थी।
जिला कांग्रेस जांच समिति के अनुसार, पुलिस उत्पीड़न एवं यातना के चलते रामगति, सिद्धराज व गिरधारी ने जान गंवाई। 1942 के आंदोलन में बनारस जिले में 20 लोग शहीद हुए। दशाश्वमेध गोलीकांड में काशी उसी दिन शहीद हो गए। तीन शहादतें 14 अगस्त को हुईं। उन शहीदों की याद में 14 अगस्त को मशाल जुलूस निकालने की परंपरा कांग्रेस कमेटी ने शुरू की।