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बॉर्डर पर शहीद हुआ बलिया का लाल, पिता बोले- अब पोतों को करूंगा देश सेवा के लिए तैयार
ब्यूरो,अमर उजाला,बलिया
Updated Fri, 15 Sep 2017 02:58 PM IST
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बीएसएफ के जवान बृजेंद्र बहादुर सिंह के घर मचा कोहराम
- फोटो : अमर उजाला
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जम्मू के आरएस पुरा सेक्टर के अरनिया में बीती रात पाकिस्तान ने सीजफायर का उल्लंघन किया। इसमें बोर्डर की सुरक्षा में लगा बलिया का लाल शहीद हो गया। बीएसएफ कांस्टेबल बृजेंद्र बहादुर सिंह की शहादत से पूरा बलिया शोक में डूब गया है।
अरनिया सेक्टर में तैनात बीएसएफ के जवान बृजेंद्र बहादुर सिंह की शहीद होने की खबर मिलते ही घर,गांव और पूरे क्षेत्र में कोहराम मच गया। बृजेंद्र बांसडीह कोतवाली क्षेत्र के नारायणपुर गांव के निवासी थे। शुक्रवार की सुबह 5:00 बजे यूनिट से सेना के अधिकारियों ने परिवार को सूचित किया।
परिजनों को जैसे ही ब्रिजेंद्र की शहादत की खबर आई पूरे परिवार में मातम फैल गया। सूचना मिलने के बाद जवान के घर लोग पहुंचने लगे। कोई परिवार को ढ़ाढस बढा रहा था तो कोई कायर पाकिस्तान को कोस रहा था।
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नारायणपुर गांव निवासी अशोक कुमार सिंह के पुत्र बृजेंद्र एकलौते पुत्र थे, जो बीएसएफ में वर्ष 2005 में 192 बटालियन में भर्ती हुए थे। दो माह पहले बृजेंद्र का जोधपुर से अरनिया ट्रांसफर हुआ था। उनके शहीद होने की सूचना मिलते ही पत्नी सुष्मिता और उनके माता-पिता का कर बुरा हाल है।
बृजेंद्र के दो बेटे हैं। एक सात वर्षीय भूपेंद्र और पांच वर्षीय संत राज। शहीद जवान का शव शनिवार सुबह तक आने की संभावना है। शहीद बृजेंद्र के पिता का कहना है कि उन्होंने देश के लिए अपना इकलौता बेटा खो दिया पर वो अपने दोनों मासूम पोतों को भारत माता की सुरक्षा के लिए तैयार करेंगे।
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अरनिया सेक्टर में तैनात बीएसएफ के जवान बृजेंद्र बहादुर सिंह की शहीद होने की खबर मिलते ही घर,गांव और पूरे क्षेत्र में कोहराम मच गया। बृजेंद्र बांसडीह कोतवाली क्षेत्र के नारायणपुर गांव के निवासी थे। शुक्रवार की सुबह 5:00 बजे यूनिट से सेना के अधिकारियों ने परिवार को सूचित किया।
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परिजनों को जैसे ही ब्रिजेंद्र की शहादत की खबर आई पूरे परिवार में मातम फैल गया। सूचना मिलने के बाद जवान के घर लोग पहुंचने लगे। कोई परिवार को ढ़ाढस बढा रहा था तो कोई कायर पाकिस्तान को कोस रहा था।
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नारायणपुर गांव निवासी अशोक कुमार सिंह के पुत्र बृजेंद्र एकलौते पुत्र थे, जो बीएसएफ में वर्ष 2005 में 192 बटालियन में भर्ती हुए थे। दो माह पहले बृजेंद्र का जोधपुर से अरनिया ट्रांसफर हुआ था। उनके शहीद होने की सूचना मिलते ही पत्नी सुष्मिता और उनके माता-पिता का कर बुरा हाल है।
बृजेंद्र के दो बेटे हैं। एक सात वर्षीय भूपेंद्र और पांच वर्षीय संत राज। शहीद जवान का शव शनिवार सुबह तक आने की संभावना है। शहीद बृजेंद्र के पिता का कहना है कि उन्होंने देश के लिए अपना इकलौता बेटा खो दिया पर वो अपने दोनों मासूम पोतों को भारत माता की सुरक्षा के लिए तैयार करेंगे।