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पैकेट वाले दूध से बाबा का अभिषेक अशास्त्रीय
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पैकेट वाले दूध से बाबा का अभिषेक अशास्त्रीय
वाराणसी। बाबा विश्वनाथ मंदिर में पूजन के दौरान पैकेट वाला दूध चढ़ाना जल्द ही प्रतिबंधित कर दिया जाएगा। इसकी वजह न्यास अध्यक्ष द्वारा जताई गई आपत्ति है। उन्होंने पैकेट वाले दूध को अशास्त्रीय बताया है। इसके बाद न्यास के अधिकारी इसे प्रतिबंधित करने की तैयारी में जुट गए हैं।
काशी विश्वनाथ मंदिर में भक्त प्रतिदिन हजारों लीटर दूध से बाबा का अभिषेक करते हैं। जब दूध कम हुआ तो लोग पैकेट वाला दूध शिवलिंग पर चढ़ाने लगे। इसे देखते हुए एक कंपनी ने मंदिर परिसर के अंदर एक कांउटर खोला। यहां दूध और पेड़ा की बिक्री शुरू हुई।
न्यास के अध्यक्ष आचार्य अशोक द्विवेदी ने अब पैकेट वाले दूध को अशास्त्रीय बताया है। उन्होंने कहा कि पाश्चुराइजेशन प्रक्रिया के दौरान दूध को पहले निश्चित तापमान तक गर्म किया जा है। फिर ठंडा कर पैकेट में भरा जाता है। इस दूध में फैट और अन्य पोषक तत्व मेंटेन किए जाते हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी पूजा में गर्म दूध नहीं चढ़ाया जाता है, इसलिए पैकेट वाला दूध का पूजन में प्रयोग नियमों के विरुद्ध है। इसीलिए पैकेट वाले दूध को प्रतिबंधित करने के लिए कहा गया है।
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बाबा को शुद्ध दूध चढ़ाया जाए इसके लिए मंदिर प्रशासन जल्द ही नगर निगम की एक गोशाला गोद लेगा। जिलाधिकारी सुरेंद्र सिंह ने यह प्रस्ताव न्यास की बैठक के दौरान दिया था। उन्होंने कहा कि न्यास एक गोशाला लेकर उसमें रखी जाने वाली गायों का पालन करे। गोशाला से मिलने वाले दूध बाबा के अभिषेक में उपयोग किया जाए। इससे बाबा के पूजन में शुद्धता बनी रहेगी। इस पर न्यास परिषद ने सहमति दे दी है।
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वाराणसी। बाबा विश्वनाथ मंदिर में पूजन के दौरान पैकेट वाला दूध चढ़ाना जल्द ही प्रतिबंधित कर दिया जाएगा। इसकी वजह न्यास अध्यक्ष द्वारा जताई गई आपत्ति है। उन्होंने पैकेट वाले दूध को अशास्त्रीय बताया है। इसके बाद न्यास के अधिकारी इसे प्रतिबंधित करने की तैयारी में जुट गए हैं।
काशी विश्वनाथ मंदिर में भक्त प्रतिदिन हजारों लीटर दूध से बाबा का अभिषेक करते हैं। जब दूध कम हुआ तो लोग पैकेट वाला दूध शिवलिंग पर चढ़ाने लगे। इसे देखते हुए एक कंपनी ने मंदिर परिसर के अंदर एक कांउटर खोला। यहां दूध और पेड़ा की बिक्री शुरू हुई।
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न्यास के अध्यक्ष आचार्य अशोक द्विवेदी ने अब पैकेट वाले दूध को अशास्त्रीय बताया है। उन्होंने कहा कि पाश्चुराइजेशन प्रक्रिया के दौरान दूध को पहले निश्चित तापमान तक गर्म किया जा है। फिर ठंडा कर पैकेट में भरा जाता है। इस दूध में फैट और अन्य पोषक तत्व मेंटेन किए जाते हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी पूजा में गर्म दूध नहीं चढ़ाया जाता है, इसलिए पैकेट वाला दूध का पूजन में प्रयोग नियमों के विरुद्ध है। इसीलिए पैकेट वाले दूध को प्रतिबंधित करने के लिए कहा गया है।
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बाबा को शुद्ध दूध चढ़ाया जाए इसके लिए मंदिर प्रशासन जल्द ही नगर निगम की एक गोशाला गोद लेगा। जिलाधिकारी सुरेंद्र सिंह ने यह प्रस्ताव न्यास की बैठक के दौरान दिया था। उन्होंने कहा कि न्यास एक गोशाला लेकर उसमें रखी जाने वाली गायों का पालन करे। गोशाला से मिलने वाले दूध बाबा के अभिषेक में उपयोग किया जाए। इससे बाबा के पूजन में शुद्धता बनी रहेगी। इस पर न्यास परिषद ने सहमति दे दी है।