IIT BHU: इंडस्ट्रीज की जरूरतों के अनुसार रिसर्च करेंगे बीटेक छात्र, एक करोड़ के फंड से मिलेगी सहायता
Varanasi News: आईआईटी बीएचयू में बीटेक छात्र इंडस्ट्रीज की जरूरतों के अनुसार रिसर्च करेंगे। छात्रों को वर्कशॉप के साथ ही लैब में भी काम करने का मौका मिलेगा।
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आईआईटी बीएचयू के टेक्नोसेवी अब बीटेक के साथ ही इंडस्ट्रीज की जरूरतों के अनुसार रिसर्च भी कर सकेंगे। इंडस्ट्रीज का दौरा कर उनकी मांग के अनुसार तकनीक विकसित कर सकेंगे। वर्कशॉप के साथ ही लैब में भी काम करने का मौका मिलेगा। इसके लिए संस्थान को एक करोड़ रुपये का फंड मिला है।
इस फंड के तहत उन छात्रों के रिसर्च को बढ़ावा दिया जाएगा तो कोर्स के हटकर कुछ काम कर रहे हों। जिन छात्रों का मानसिक स्तर बिजनेस में कुछ नया और बड़ा करके दिखाने का हो, उनको इस फंड का फायदा दिया जाएगा। संस्थान के ही पूर्व छात्र वेंकट मोक्कापति की ओर से आईआईटी बीएचयू को एक करोड़ की धनराशि दी गई है। इन्हें आईआईटी बीएचयू फाउंडेशन की ओर से दानकर्ताओं के पायनियर क्लब में शामिल कर लिया है।
1986 बैच के छात्र रहे मोक्कापति ने इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग में बीटेक किया था। वहीं, इसी साल फरवरी महीने में उन्होंने आईआईटी बीएचयू में आकर 40 रियूनियन मनाया था। इस फंड की सहायता से आईआईटी बीएचयू के जो छात्र कोर्स के अलावा रिसर्च कार्य करते हैं, उनकी पहचान कर उनको आगे बढ़ाने में मदद की जाएगी।
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क्लास रूम और उद्योगों की वास्तविक चुनौतियों के बीच खाई पाटा जाएगा। यानी क्लास रूम के बाहर कंपनियों की जरूरतों के आधार पर रिसर्च करते हुए बीटेक कराया जाएगा। अंतर विषयक अनुसंधान और नवाचार की गति और विस्तार को बढ़ाया जाएगा।
आईआईटी बीएचयू की शैक्षणिक और रिसर्च प्रतिष्ठा मजबूत होगी। चिह्नित टेक्नोसेवियों को ऐसे स्किल और मेंटालिटी से लैस किया जाएगा जो कि सिर्फ क्लासरूम के ही समीकरणों का हल नहीं ढूंढेंगे बल्कि वास्तविक दुनिया की समस्याओं को भी खत्म करने का माद्दा रखते हो।
दान कर्ताओं की राशि के अनुसार आईआईटी बीएचयू ने चार कैटेगरी बनाई हैं। मिलेनियम ग्रुप, दूसरा पायनियर ग्रुप, तीसरा फाउंडेशन क्लब और चौथा ट्रेल ब्लेजर ग्रुप। इन सबमें अलग-अलग राशि तय की गई है। सबसे ज्यादा दानकर्ता ट्रेल ब्लेजर में हैं।