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हरियाली का पैगाम लेकर काशी पहुंची ‘ऑटो रन’
ब्यूरो/ अमर उजाला, वाराण्ासी
Updated Sun, 10 Apr 2016 02:28 AM IST
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हरियाली का पैगाम लेकर काशी पहुंची ‘ऑटो रन’
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पेेड़ाें को बचाने और धरा को हरा-भरा बनाने का पैगाम लेकर निकली ‘ऑटो रन’ शनिवार को काशी पहुंची। जैसलमेर से शिलांग तक के 26 सौ किलोमीटर की यात्रा में अलग-अलग देशों की 70 टीमें शामिल हैं। ये सभी टीमें अपने-अपने ऑटो से यात्रा पर निकली हैं। यात्रा की शुरुआत जैसलमेर से पहली अप्रैल को हुई थी।
शनिवार को ‘ऑटो रन’ में शामिल कई टीमों का पड़ाव बनारस रहा। यहां के प्रमुख होटलों की पार्किंग में लग्जरी गाड़ियों केे बीच रंग-बिरंगे ऑटो खड़े नजर आए। शनिवार को लहरतारा पुल से गुजरते समय ऑटो रन में शामिल अमेरिकी दल लोगों के आकर्षण का केंद्र बना।
होटल रामाडा पहुंचने के बाद जब अमेरिकी यात्री पैडी एस्ट्रीज और क्रिश पेडफेगल से बात की गई तो उन्होंने बताया कि यह पर्यावरण संरक्षण के लिए चैरिटेबल ऑटो रन है। कई टीमें शहर के अन्य प्रमुख होटलों में ठहरी हुई हैं। बताया कि वे जैसलमेर से ऑटो से चले हैं और शिलांग तक जाएंगे। छह दिन का सफर पूरा हो चुका है। सिर्फ दिन में ही सफर किया जाता है।
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आगामी छह दिनों में वे शिलांग पहुंचेंगे। बताया कि ऑटो से सफर का लुत्फ भी अलग है और इसके जरिये पर्यावरण संरक्षण के प्रति जनजागरूकता का उद्देश्य भी पूरा हो रहा है। उधर, अमाया होटल में रुके कांपेल और गोमी ने बताया कि ऑटो का एस्कलेटर घुमाते-घुमाते कलाइयां दर्द करने लगी हैं। जर्मनी के मार्क और ऐटम ने बताया कि बीच में कई जगह ऑटो खराब हुई लेकिन भारतीय लोग हर समस्या में साथ खड़े रहे। न्यूजीलैंड की स्टेल और जेंडी ने बताया कि उन्होंने रास्ते में पड़ने वाले ढाबे में स्थानीय व्यंजनों का स्वाद भी चखा।
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शनिवार को ‘ऑटो रन’ में शामिल कई टीमों का पड़ाव बनारस रहा। यहां के प्रमुख होटलों की पार्किंग में लग्जरी गाड़ियों केे बीच रंग-बिरंगे ऑटो खड़े नजर आए। शनिवार को लहरतारा पुल से गुजरते समय ऑटो रन में शामिल अमेरिकी दल लोगों के आकर्षण का केंद्र बना।
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होटल रामाडा पहुंचने के बाद जब अमेरिकी यात्री पैडी एस्ट्रीज और क्रिश पेडफेगल से बात की गई तो उन्होंने बताया कि यह पर्यावरण संरक्षण के लिए चैरिटेबल ऑटो रन है। कई टीमें शहर के अन्य प्रमुख होटलों में ठहरी हुई हैं। बताया कि वे जैसलमेर से ऑटो से चले हैं और शिलांग तक जाएंगे। छह दिन का सफर पूरा हो चुका है। सिर्फ दिन में ही सफर किया जाता है।
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आगामी छह दिनों में वे शिलांग पहुंचेंगे। बताया कि ऑटो से सफर का लुत्फ भी अलग है और इसके जरिये पर्यावरण संरक्षण के प्रति जनजागरूकता का उद्देश्य भी पूरा हो रहा है। उधर, अमाया होटल में रुके कांपेल और गोमी ने बताया कि ऑटो का एस्कलेटर घुमाते-घुमाते कलाइयां दर्द करने लगी हैं। जर्मनी के मार्क और ऐटम ने बताया कि बीच में कई जगह ऑटो खराब हुई लेकिन भारतीय लोग हर समस्या में साथ खड़े रहे। न्यूजीलैंड की स्टेल और जेंडी ने बताया कि उन्होंने रास्ते में पड़ने वाले ढाबे में स्थानीय व्यंजनों का स्वाद भी चखा।