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Varanasi News: कन्याओं के पखारे पांव, पूजन कर उतारी आरती, घरों-मंदिरों-पूजा पंडालों में हुई अष्टमी और नवमी की पूजा

Tue, 20 Oct 2026 12:25 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Tue, 20 Oct 2026 12:25 AM IST
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Ashtami and Navami rituals were performed in homes, temples, and puja pandals.
रविंद्रपुरी स्थित कीनाराम आश्रम में आयोजित कन्या पूजन में शामिल बच्चियां। अमर उजाला
वाराणसी। शारदीय नवरात्र पर सोमवार को अष्टमी और नवमी पूजा हुई। भक्तों ने घर से लेकर मंदिरों और पूजा पंडालों में मंत्रोच्चार के साथ हवन पूजन और देवी की आराधना की। जगह-जगह सामूहिक कन्या पूजन हुआ। लोगों ने कन्याओं के पांव पखारे, पूजन कर आरती उतारी और भोज करवा कर उपहार दिए।
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रविन्द्रपुरी स्थित सिद्धपीठ बाबा कीनाराम स्थल क्रीं-कुण्ड में नवमी पर कन्या व भैरव पूजन हुआ। सुबह आश्रम की साफ-सफ़ाई और दैनिक आरती-पूजन के बाद नवमी कन्या पूजन हुई। आश्रम के पीठाधीश्वर अघोराचार्य बाबा सिद्धार्थ गौतम राम की अगुवाई में साधु-संतों ने नौ कन्याओं को देवी और एक बालक को भैरव रूप में शृंगार कर उनका पांव पखारे।
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अन्नपूर्णा मंदिर में अष्टमी के बाद नवमी लगते ही पूजन हुआ। सुगंधित फूलों से सजी माता की झांकी के दर्शन के लिए भीड़ रही। मंदिर के महंत शंकरपुरी महाराज के नेतृत्व में हवन के बाद माता का सुगंधित माला-फूलों से शृंगार हुआ। श्री गीता सोसाइटी की ओर से सामने घाट आश्रम में नवमी पूजा हुई। स्वामी त्रिगुणातीतानन्द पुरी ने 101 कन्याओं का पूजन कर आरती उतारी। वृन्दाप्रना की अगुवाई में लोक कल्याण के लिए हवन हुआ। उधर, ग्रामीण इलाकों के मंदिरों, पूजा पंडालों में भी अष्टमी व नवमी पूजा के साथ कन्या पूजन हुआ।
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श्रीकाशी विश्वनाथ धाम में शारदीय नवरात्रि की महानवमी पर वैदिक मंत्रोच्चार के साथ हवन-पूजन एवं कन्या पूजन हुआ। मां विशालाक्षी को शृंगार सामग्री अर्पित की गई। धाम परिसर में मंदिर चौक में आयोजित अनुष्ठान में श्री काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास के मुख्य कार्यपालक अधिकारी सत्यम मिश्र यजमान रहे।


43 मिनट की संधी पूजा, धुनची नृत्य की रही धूम
बंगीय पंडालों में शक्ति की आराधना की गई। अष्टमी और नवमी की तिथि के बीच सुबह सात से साढ़े आठ बजे के बीच कुल 45 मिनट संधी पूजा हुई। इसके बाद दिनभर नवमी पूजा हुई। भारतसेवा श्रम संघ सिगरा, बीडीएस बंगाली टोला, इगल क्लब सोनारपुरा, भेलूपुर, सोनारपुरा आदि इलाकों में सजे पूजा पंडालों में देवी की आराधना में महिलाएं, पुरुष और बच्चे पूजन अर्चन के साथ ढाक की थाप पर नृत्य किए।
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