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यूपी: नाना पाटेकर के निधन से कलाकार स्तब्ध, बोले- पर्दे का शेर और जमीन से जुड़ा इंसान खो दिया; दी श्रद्धांजलि

Sat, 17 Oct 2026 03:35 PM IST
Aman Vishwakarma अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: Aman Vishwakarma Updated Sat, 17 Oct 2026 03:35 PM IST
सार

नाना पाटेकर के निधन से काशी के कलाकारों में शोक है। संगीता कुमारी ने उन्हें मजलूमों और किसानों की आवाज बताया। रंगमंच कलाकार मनोज विश्वकर्मा ने नाना को अपना द्रोणाचार्य बताते हुए कहा कि उनकी तस्वीर से प्रेरणा लेकर अभिनय की साधना करते रहे। वैभव बिंदुसार ने उनकी सहजता, विचारों और कला जगत को दी गई विरासत को अनमोल बताया।

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Artists shocked Nana Patekar passing; describe lion on screen man deeply rooted ground pay tribute
नाना पाटेकर। - फोटो : एएनआई

विस्तार

हिंदी और मराठी सिनेमा के दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर के निधन से कला जगत में शोक की लहर है। आठ अक्तूबर को 75 वर्ष की उम्र में उनके निधन के बाद देशभर में प्रशंसक और कलाकार उन्हें श्रद्धांजलि दे रहे हैं। 

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काशी के रंगमंच कलाकारों ने भी उन्हें याद करते हुए कहा कि नाना पाटेकर केवल पर्दे पर दमदार अभिनय करने वाले कलाकार नहीं थे, बल्कि सादगी, संवेदनशीलता और समाज के कमजोर वर्गों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता के लिए भी याद किए जाएंगे।
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संगीता कुमारी ने श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि पर्दे पर दहाड़ने वाला शेर शांत हो गया, लेकिन मजलूमों और किसानों के हक में उठाई गई उनकी आवाज हमेशा गूंजती रहेगी। उन्होंने कहा कि नाना पाटेकर सिर्फ अभिनय के नटसम्राट नहीं थे, बल्कि वास्तविक जीवन में भी सादगी की मिसाल थे। उनके जाने से कला जगत ने अपनी बेबाक और संवेदनशील आवाज खो दी है।

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रंगमंच के कलाकार वैभव बिंदुसार, संगीता कुमार और मनोज विश्वकर्मा। - फोटो : अमर उजाला

मनोज विश्वकर्मा के लिए द्रोणाचार्य जैसे थे नाना
रंगमंच कलाकार और अभिनेता मनोज विश्वकर्मा ने नाना पाटेकर को अपना गुरु बताते हुए भावुक श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा कि ऐसा लग रहा है, जैसे उन्होंने ऐसे गुरु को खो दिया हो, जिनसे वह कभी प्रत्यक्ष रूप से मिले ही नहीं। मनोज के मुताबिक, नाना उनके लिए द्रोणाचार्य की तरह थे। जब भी उन्हें रंगमंच, टीवी धारावाहिकों या फिल्मों में काम करने का अवसर मिला, उन्होंने नाना की तस्वीर को गुरु मानकर एकलव्य की तरह साधना करने की कोशिश की।

उन्होंने कहा कि वह नहीं जानते कि एकलव्य की तरह उस आदर्श तक पहुंच पाएंगे या नहीं, लेकिन नाना के दिखाए रास्ते पर चलने का प्रयास जारी रखेंगे। उन्होंने दिवंगत अभिनेता को श्रद्धांजलि देते हुए ईश्वर से उन्हें अपने श्रीचरणों में स्थान देने की प्रार्थना की।

सहजता और विचारों की विरासत हमेशा रहेगी
कलाकार वैभव बिंदुसार ने नाना पाटेकर के जीवन दर्शन और सहजता को याद किया। उन्होंने नाना के उस विचार का उल्लेख किया कि इंसान दुनिया से कुछ लेकर नहीं जाता और अंत में बारह मन लकड़ी ही उसकी संपत्ति होती है। वैभव ने कहा कि नाना ने अभिनय और व्यक्तित्व के जरिए जो विरासत सौंपी, वह कलाकारों के लिए अनमोल पूंजी है।

उन्होंने कहा कि नाना की सहजता उनके लिए सबसे बड़ी सीख है। वह भावुक और स्तब्ध हैं, लेकिन उन्हें विश्वास है कि नाना पाटेकर किसी खुशबू की तरह कलाकारों के बीच हमेशा मौजूद रहेंगे और अपनी कला व विचारों से उन्हें सही राह दिखाते रहेंगे।

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