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काशी विश्वनाथ के दर पहुंचे थल सेनाध्यक्ष बिपिन रावत, इस विधि से किया अभिषेक
ब्यूरो,अमर उजाला,वाराणसी
Updated Fri, 10 Nov 2017 09:07 PM IST
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थल सेनाध्यक्ष जनरल बिपिन रावत
- फोटो : अमर उजाला
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थल सेनाध्यक्ष जनरल बिपिन रावत ने शुक्रवार को काशी विश्वनाथ के दरबार में हाजिरी लगाई। उन्होंने रूद्र सूक्त विधि से बाबा विश्वनाथ का अभिषेक किया। उन्होंने बाबा दरबार में वीर सैनिकों के साथ ही राष्ट्र की सलामती की कामना की। बाबा के दर्शन के बाद उन्होंने मंदिर परिसर को देखा और वहां के बारे में जानकारी ली।
छत्ताद्वार पर पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि सेना हर तरह से सक्षम और किसी भी तरह की परिस्थिति का सामना करने के लिए तैयार है। थल सेनाध्यक्ष सुबह 7:25 बजे अपनी पत्नी के साथ विश्वनाथ मंदिर पहुंचे।
वहां गर्भगृह में मंदिर के शास्त्री राकेश पाराशर, तीर्थराज त्रिपाठी और देवेंद्र ने सविधि षोडशोपचार पूजन कराया। इसके बाद रूद्र सूक्त के सस्वर पाठ के बीच उन्होंने बाबा विश्वनाथ का रूद्राभिषेक किया। उन्होंने मंदिर की ऐतिहासिकता के बारे में यहां के कर्मियों से जानकारी ली।
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थल सेनाध्यक्ष ने निर्माणाधीन गोयनका भवन परिसर भी देखा। मंदिर के कर्मचारियों ने बताया कि विस्तारीकरण योजना के तहत परिसर को चौड़ा करने के साथ ही नए निर्माण कराए जा रहे हैं। इसके बाद मंदिर परिसर में मौजूद लोगों का अभिवादन स्वीकार करते हुए वह छत्ताद्वार पहुंचे।
वहां पत्रकारों से कहा कि सेना के शौर्य और साहस पर संदेह नहीं किया जाना चाहिए। सेना हर परिस्थिति का सामना करने में सक्षम और तैयार है। इससे पहले मंदिर के पर्यवेक्षक योगेंद्र गर्ग ने उन्हें अंगवस्त्रम, प्रसाद और बाबा की भस्म भेंट की
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छत्ताद्वार पर पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि सेना हर तरह से सक्षम और किसी भी तरह की परिस्थिति का सामना करने के लिए तैयार है। थल सेनाध्यक्ष सुबह 7:25 बजे अपनी पत्नी के साथ विश्वनाथ मंदिर पहुंचे।
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वहां गर्भगृह में मंदिर के शास्त्री राकेश पाराशर, तीर्थराज त्रिपाठी और देवेंद्र ने सविधि षोडशोपचार पूजन कराया। इसके बाद रूद्र सूक्त के सस्वर पाठ के बीच उन्होंने बाबा विश्वनाथ का रूद्राभिषेक किया। उन्होंने मंदिर की ऐतिहासिकता के बारे में यहां के कर्मियों से जानकारी ली।
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थल सेनाध्यक्ष ने निर्माणाधीन गोयनका भवन परिसर भी देखा। मंदिर के कर्मचारियों ने बताया कि विस्तारीकरण योजना के तहत परिसर को चौड़ा करने के साथ ही नए निर्माण कराए जा रहे हैं। इसके बाद मंदिर परिसर में मौजूद लोगों का अभिवादन स्वीकार करते हुए वह छत्ताद्वार पहुंचे।
वहां पत्रकारों से कहा कि सेना के शौर्य और साहस पर संदेह नहीं किया जाना चाहिए। सेना हर परिस्थिति का सामना करने में सक्षम और तैयार है। इससे पहले मंदिर के पर्यवेक्षक योगेंद्र गर्ग ने उन्हें अंगवस्त्रम, प्रसाद और बाबा की भस्म भेंट की
सेना को और अत्याधुनिक हथियारों की जरूरत
थल सेनाध्यक्ष जनरल बिपिन रावत
- फोटो : अमर उजाला
ल सेनाध्यक्ष जनरल बिपिन रावत ने कहा कि सेना को और अत्याधुनिक हथियारों की जरूरत है। हमें अपने हथियारों को समय-समय पर अपग्रेड करना चाहिए। हमारे पास हथियारों की कमी नहीं है लेकिन उसे नई तकनीक से लैस करने की जरूरत है। इस दिशा में सकारात्मक प्रयास किए जा रहे हैं।
सेनाध्यक्ष शुक्रवार को 39 जीटीसी में 9 जीआर गोरखा रायफल की स्थापना के दो सौ साल पूरे होने पर आयोजित स्थापना दिवस समारोह में शामिल होने 39 जीटीसी आए थे।
यहां उन्होंने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि दोकलम विवाद पर सेना और सरकार अपनी-अपनी रणनीति में कामयाब रहे हैं। हालांकि सेना अब भी वहां पूरी सतर्कता बरत रही है। जनरल रावत ने काशी प्रवास के दौरान गुरुवार की शाम गंगा आरती देखी और शुक्रवार सुबह काशी विश्वनाथ मंदिर में दर्शन-पूजन किया। इसके बाद पत्रकारों से बातचीत के दौरान एक सवाल के जवाब में कहा कि ईश्वर से कोई चीज मांगी नहीं जाती। हम तो ईश्वर से सिर्फ इतना चाहते हैं कि भारतीय सेना पर उनकी कृपा बनी रहे।
कश्मीर के मसले पर कहा कि वहां पत्थरबाजी की घटनाएं कम हुई हैं। सेना, पुलिस समेत सभी फोर्स मिलकर काम रही हैं। ऐसी समस्याएं एक दिन में हल नहीं होतीं। जनरल करियप्पा को भारत रत्न देने की मांग के मसले पर कहा कि ये सरकार का काम है कि वह किसे भारत रत्न दे और किसे न दे।
कहा कि 9 गोरखा रायफल के दो सौ साल पूरे हुए हैं। रेजीमेंट के जवानों ने अपने अदम्य साहस से पिछले दो सौ साल में इतिहास रचा है। मुझे ऐसे समारोह में शामिल होने का सुअवसर मिला, इसके लिए मैं खुद को भाग्यशाली मानता हूं। जनरल बिपिन रावत ने जीटीसी के वार मेमोरियल ग्राउंड पर शहीदों को सलामी दी और स्मृतिधाम में आगंतुक पुस्तिका पर हस्ताक्षर किए।
सेनाध्यक्ष शुक्रवार को 39 जीटीसी में 9 जीआर गोरखा रायफल की स्थापना के दो सौ साल पूरे होने पर आयोजित स्थापना दिवस समारोह में शामिल होने 39 जीटीसी आए थे।
यहां उन्होंने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि दोकलम विवाद पर सेना और सरकार अपनी-अपनी रणनीति में कामयाब रहे हैं। हालांकि सेना अब भी वहां पूरी सतर्कता बरत रही है। जनरल रावत ने काशी प्रवास के दौरान गुरुवार की शाम गंगा आरती देखी और शुक्रवार सुबह काशी विश्वनाथ मंदिर में दर्शन-पूजन किया। इसके बाद पत्रकारों से बातचीत के दौरान एक सवाल के जवाब में कहा कि ईश्वर से कोई चीज मांगी नहीं जाती। हम तो ईश्वर से सिर्फ इतना चाहते हैं कि भारतीय सेना पर उनकी कृपा बनी रहे।
कश्मीर के मसले पर कहा कि वहां पत्थरबाजी की घटनाएं कम हुई हैं। सेना, पुलिस समेत सभी फोर्स मिलकर काम रही हैं। ऐसी समस्याएं एक दिन में हल नहीं होतीं। जनरल करियप्पा को भारत रत्न देने की मांग के मसले पर कहा कि ये सरकार का काम है कि वह किसे भारत रत्न दे और किसे न दे।
कहा कि 9 गोरखा रायफल के दो सौ साल पूरे हुए हैं। रेजीमेंट के जवानों ने अपने अदम्य साहस से पिछले दो सौ साल में इतिहास रचा है। मुझे ऐसे समारोह में शामिल होने का सुअवसर मिला, इसके लिए मैं खुद को भाग्यशाली मानता हूं। जनरल बिपिन रावत ने जीटीसी के वार मेमोरियल ग्राउंड पर शहीदों को सलामी दी और स्मृतिधाम में आगंतुक पुस्तिका पर हस्ताक्षर किए।