अर्जुन पुरस्कार पाकर बोलीं प्रशांति, बनारस की मिट्टी और प्रेम से मिला यह मुकाम
‘अर्जुन पुरस्कार प्राप्त करते ही परिवार को एक अलग पहचान मिल गई है। मेहनत, समर्पण और त्याग हमारे सपनों को सच में बदल देता है। मैं आज जिस मुकाम पर हूं उसमें बनारस की मिट्टी और यहां के लोगों के आशीर्वाद व प्रेम का बड़ा योगदान है।’ यह कहना है खेल दिवस पर मंगलवार को अर्जुन पुरस्कार पाने वाली प्रशांति सिंह का।
प्रशांति ने कहा कि कामयाबी का रास्ता हिम्मत और मेहनत से तय होता है। जब सातवीं क्लास में थी तब बड़ी बहनों को खेलता देख बास्केटबाल के प्रति लगाव हुआ। बड़ी बहन प्रियंका की उंगली पकड़कर ग्राउंड पर उतरी तो सोचा भी नहीं था कि यह पहला कदम मुझे यहां तक लेकर आएगा।
प्रशांति सिंह क्रिकेटर ईशांत शर्मा की साली हैं। ईशांत की शादी प्रतिमा सिंह से हुई है। महिला बास्केटबॉल में प्रशांति यूपी की पहली और देश की तीसरी अर्जुन अवार्डी बनी हैं। इनके पहले 1991 में एस. शर्मा और 2004 में गीतू आना जोश को यह सम्मान मिला था।
प्रशांति सिंह बनारस के ‘सिंह सिस्टर्स’ घराने की पांच बहनों में तीसरी हैं। पांचों बहनें प्रियंका, दिव्या, प्रशांति, प्रतिभा, आकांक्षा बास्केटबॉल प्लेयर हैं। पिता गौरीशंकर सिंह, मां उर्मिला सिंह व भाई विक्रांत सिंह समेत सभी लोग दिल्ली में होने वाले समारोह में शरीक होने गए हुए हैं।
बचपन में बेड से गिरकर कट गई थी जीभ
प्रशांति ने बताया कि बचपन में एक बार सोते समय बेड से गिर गई और जीभ कट गई। पिता जी के घर आने से पहले मां और बहन के साथ हिम्मत के साथ हॉस्पिटल गई और बोली पापा को न पता चले, ठीक हो जाऊंगी। पिताजी के आने से पहले दवा लेकर घर आ गई। वह जज्बा आज भी बरकरार है। ग्राउंड में चोट लगने के बाद भी हिम्मत नहीं हारती।
2002 में शामिल हुईं भारतीय टीम में
प्रशांति भारतीय महिला बास्केटबाल टीम में 2002 में शामिल हुई थीं। कप्तान के तौर पर वियतनाम में हुए थर्ड एशियन इंडोर गेम्स में सिल्वर मेडल जीता और 16वें एशियन गेम्स में भी नेतृत्व किया। उन्होंने राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं 23 मेडल जीते।
प्रशांति इकलौती ऐसी महिला खिलाड़ी हैं जिन्होंने भारतीय टीम का 2006 के कॉमनवेल्थ गेम्स में और दो बार एशियन गेम्स (2010, 2014) में प्रतिनिधित्व किया। वे एशियन एकेडमी ऑफ फिल्म एंड टेलीविजन की अंतरराष्ट्रीय महिला फिल्म फोरम की सदस्य भी हैं।
इकलौती महिला बास्केटबाल प्लेयर हैं जिनके जीवन पर डॉक्यूमेंट्री फिल्म ‘बी क्यूब’(बास्के बास्केटबाल बनारस) बनी और सत्यजीत रे फिल्म फेस्टिवल की प्रमुख छह फिल्मों में शामिल रही।
बॉस्केटबाल में रहा है सिंह सिस्टर्स का दबदबा
बड़ी बहन प्रियंका सिंह, नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ स्पोर्ट्स में बॉस्केटबाल कोच हैं। दूसरी बहन दिव्या सिंह अंडर 16 भारतीय पुरुष बास्केटबाल टीम की कोच हैं। तीसरे नंबर पर प्रशांति सिंह है जो फिलहाल भारतीय महिला राष्ट्रीय बॉस्केटबाल टीम की कप्तान है।
छोटी बहन आकांक्षा भारतीय महिला बास्केटबाल टीम की सदस्य हैं। प्रतिमा सिंह जूनियर भारतीय महिला बॉस्केटबाल टीम में हैं और इनकी शादी हालही में भारतीय क्रिकेट टीम के खिलाड़ी ईशांत शर्मा से हुई है। प्रियंका ने बाद में बास्केटबॉल खेलना छोड़ दिया।
प्रमुख उपलब्धियां
- साउथ एशियन बीच गेम श्रीलंका में गोल्ड मेडल
- नेताजी सुभाष नेशनल इंस्टीट्यूट स्पोर्ट्स में गोल्ड मेडलिस्ट
- चेन्नई में सीनियर नेशनल बॉस्केटबाल चैंपियनशिप में टॉप स्कोरर
- श्री प्रकाश ज्योति अवार्ड
- एक्सिलेंस इन स्पोर्ट्स अवार्ड
- प्रदेश सरकार की ओर से सेंचुरी अवार्ड
- फीवा में 2006, 07, 09
- डेढ़ दशक से भारतीय टीम का हिस्सा हैं
- महिला खेल फाउंडेशन की तरफ से मिला अचीवर्स अवार्ड