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वाराणसी: अखिलेश, ओवैसी पर मुकदमा दर्ज करने की अर्जी खारिज
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अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम/एमपी-एमएलए कोर्ट के प्रभारी उज्जवल उपाध्याय की कोर्ट ने ज्ञानवापी में मिले कथित शिवलिंग को लेकर विवादित बयान का आरोप लगाकर सपा प्रमुख अखिलेश यादव, सांसद असद्दुद्दीन ओवैसी समेत अन्य लोगों पर मुकदमा दर्ज करने की अर्जी को खारिज कर दिया।
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि तीनों नेताओं के कथन के संबंध में यह कहना पर्याप्त है कि कानून व्यवस्था का प्राथमिक उत्तरदायित्व राज्य एवं उनकी एजेंसियों का है। जिन भी घटनाओं एवं कथनों का उल्लेख किया गया है, उनके घटने या फिर न घटने के संबंध में वादी को जानकारी हो ऐसा भी नही हो सकता है। वादी द्वारा पत्र भी प्रेषित किये जाने का कथन किया गया है। ऐसे में यदि राज्य और उसकी एजेंसियों को कानून व्यवस्था बिगड़नेे की स्थिति, कोई हिंसा के उकसावे की स्थिति उत्पन्न नहीं प्रतीत होती है। साथ ही प्रार्थना पत्र में संलग्न प्रपत्रों के अवलोकन से ऐसा अन्य विशेष आधार दर्शित नहीं होता है कि राज्य के उक्त अभिनिर्धारण का अतिक्रमण वांछनीय व समीचीन बनाता हो। ऐसी परिस्थिति में कोई संज्ञेय अपराध कारित होना दर्शित नहीं होता है। ऐसे में आवेदन निरस्त किया जाता है।
अधिवक्ता हरिशंकर पांडेय ने कोर्ट में दिए गए आवेदन में कहा था कि 6 मई 2022 को सैकड़ों मुसलमान ज्ञानवापी पहुंचे, जो वजुखाने में जाकर हाथ मुंह धोए। 16 मई को सर्वे के दौरान वजू खाने का पानी हटाने पर कथित आदि विश्वेश्वर का शिवलिंग मिला। आरोप लगाया कि विपक्षीगण ने श्रद्धालुजन के आस्था पर कुठाराघात करते हुए जान मानस में विद्वेष फैलाया। आवेदन में यह भी कहा गया कि सपा प्रमुख अखिलेश सिंह यादव ने विवादित बयान दिया कि किसी पीपल के पेड़ के नोचे पत्थर रख दो, झंडा लगा दो तो वहीं मंदिर बन जाता है और यह शिवलिंग नहीं हैै। जबकि सांसद असुद्दीन ओवैशी व उनके भाई लगातार हिंदुओं के धार्मिक मामलों और स्वयं भू ज्योतिर्लिंग के खिलाफ अपमानजनक बयान दिया।
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अदालत ने अपने आदेश में कहा कि तीनों नेताओं के कथन के संबंध में यह कहना पर्याप्त है कि कानून व्यवस्था का प्राथमिक उत्तरदायित्व राज्य एवं उनकी एजेंसियों का है। जिन भी घटनाओं एवं कथनों का उल्लेख किया गया है, उनके घटने या फिर न घटने के संबंध में वादी को जानकारी हो ऐसा भी नही हो सकता है। वादी द्वारा पत्र भी प्रेषित किये जाने का कथन किया गया है। ऐसे में यदि राज्य और उसकी एजेंसियों को कानून व्यवस्था बिगड़नेे की स्थिति, कोई हिंसा के उकसावे की स्थिति उत्पन्न नहीं प्रतीत होती है। साथ ही प्रार्थना पत्र में संलग्न प्रपत्रों के अवलोकन से ऐसा अन्य विशेष आधार दर्शित नहीं होता है कि राज्य के उक्त अभिनिर्धारण का अतिक्रमण वांछनीय व समीचीन बनाता हो। ऐसी परिस्थिति में कोई संज्ञेय अपराध कारित होना दर्शित नहीं होता है। ऐसे में आवेदन निरस्त किया जाता है।
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अधिवक्ता हरिशंकर पांडेय ने कोर्ट में दिए गए आवेदन में कहा था कि 6 मई 2022 को सैकड़ों मुसलमान ज्ञानवापी पहुंचे, जो वजुखाने में जाकर हाथ मुंह धोए। 16 मई को सर्वे के दौरान वजू खाने का पानी हटाने पर कथित आदि विश्वेश्वर का शिवलिंग मिला। आरोप लगाया कि विपक्षीगण ने श्रद्धालुजन के आस्था पर कुठाराघात करते हुए जान मानस में विद्वेष फैलाया। आवेदन में यह भी कहा गया कि सपा प्रमुख अखिलेश सिंह यादव ने विवादित बयान दिया कि किसी पीपल के पेड़ के नोचे पत्थर रख दो, झंडा लगा दो तो वहीं मंदिर बन जाता है और यह शिवलिंग नहीं हैै। जबकि सांसद असुद्दीन ओवैशी व उनके भाई लगातार हिंदुओं के धार्मिक मामलों और स्वयं भू ज्योतिर्लिंग के खिलाफ अपमानजनक बयान दिया।
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