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अपना दल से और मजबूत होगी भाजपा की दोस्ती
amarujala.com, written by प्रदीप मिश्र
Updated Mon, 03 Jul 2017 04:42 PM IST
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जन स्वाभिमान रैली में सीएम योगी और केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल
- फोटो : अमर उजाला
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2014 के लोकसभा चुनाव से पहले भाजपा ने अपना दल के साथ जिस गठबंधन की नींव डाली थी, ठीक एक साल पहले उसे भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह की अगुआई में विधानसभा चुनाव में बरकरार रखने की बात हुई।
अपना दल संस्थापक डॉ. सोनेलाल पटेल की 68वीं जयंती पर रविवार को आयोजित जन स्वाभिमान रैली में इस गठबंधन को प्रदेश में और ईमानदारी से मजबूत करने के लिए एक कदम और बढ़ गया है। इसे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और डॉ. पटेल की बेटी और केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण राज्यमंत्री अनुप्रिया पटेल अपना दल (एस) के बैनर तले अंजाम देंगे।
दोनों नेताओं ने इस एकजुटता को आगे भी बनाए रखने का संदेश साफ-साफ दे दिया।प्रदेश में सत्तारूढ़ गठबंधन में शामिल अद (एस) का कद विधानसभा में कांग्रेस से बड़ा है। इस समय विधानसभा में कांग्रेस के सात सदस्यों के मुकाबले अद (एस) के नौ सदस्य हैं।
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अद (एस) को विधानसभा में यह कामयाबी केवल 12 सीटों पर चुनाव लड़ने से ही मिल गई थी। लोकसभा में उत्तर प्रदेश से अपना दल के दो सदस्य हैं तो कांग्रेस की संख्या दो ही है। रैली में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से लेकर स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री सिद्धार्थ नाथ सिंह ने विधानसभा में अद (एस) सदस्यों की संख्या कांग्रेस से ज्यादा होने के तथ्य का उल्लेख भी किया।
वहीं अद (एस) का इरादा प्रदेश में सपा और बसपा का विकल्प बनने का है। यही वजह है कि केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल ने संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अंबेडकर के सामाजिक न्याय की सोच को कार्यरूप देने की इच्छा के साथ-साथ राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग को संवैधानिक दर्जा देने में अड़ंगा डालने के लिए सपा-बसपा पर निशाना साधा।
साथ ही मुख्यमंत्री से उत्तर प्रदेश पिछड़ा वर्ग आयोग को सक्रिय करने के साथ-साथ न्यायपालिका में पिछड़ों और दलितों की हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए प्रयास करने की मांग भी की। राष्ट्रपति पद के लिए रामनाथ कोविंद को प्रत्याशी बनाने के लिए उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रशंसा करते हुए कांग्रेस की कथनी-करनी पर सवाल खड़े किए।
मुख्यमंत्री योगी ने अनुप्रिया की मेहनत, समझ और सांगठनिक क्षमता तारीफ करते हुए कहा कि उनकी पार्टी कांग्रेस से राष्ट्रीय पार्टी का हक छीनने जा रही है। डॉ. पटेल को उन्होंने डॉ. अंबेडकर द्वारा शुरू की गई समानता की लड़ाई को आगे बढ़ाने वालों में सबसे बड़ा पुरोधा करार दिया।
कहा-‘डॉ. पटेल 25 साल पहले सामाजिक न्याय के लिए संघर्ष शुरू किया था। उनकी बेटी अनुप्रिया पटेल ने उनके सपने को साकार करके दिखा दिया है।’ भारी भीड़ से गदगद मुख्यमंत्री ने साफ कहा कि किसी समाज के साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा।
यों तो रैली अद (एस) की थी लेकिन इसमें भाजपा के कार्यकर्ताओं ने पूरी शिद्दत से भागीदारी की। मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह के अलावा बेसिक शिक्षा मंत्री अनुपमा जायसवाल ने यह बताने में गुरेज नहीं की कि उनकी जीत में अपना दल के समर्पित और साहसी कार्यकर्ताओं के सहयोग का बड़ा योगदान है।
दोनों पार्टियों के झंडे में शामिल भगवा रंग की नई व्याख्या के जरिए यह बताया गया कि ये गठबंधन स्वाभाविक और नैसर्गिक है। सबका साथ-सबका विकास तभी संभव है, जब दोनों दल पिछड़ों, दलितों, वंचितों के हक-हकूक की लड़ाई को साथ मिलकर लड़ेंगे।
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अपना दल संस्थापक डॉ. सोनेलाल पटेल की 68वीं जयंती पर रविवार को आयोजित जन स्वाभिमान रैली में इस गठबंधन को प्रदेश में और ईमानदारी से मजबूत करने के लिए एक कदम और बढ़ गया है। इसे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और डॉ. पटेल की बेटी और केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण राज्यमंत्री अनुप्रिया पटेल अपना दल (एस) के बैनर तले अंजाम देंगे।
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दोनों नेताओं ने इस एकजुटता को आगे भी बनाए रखने का संदेश साफ-साफ दे दिया।प्रदेश में सत्तारूढ़ गठबंधन में शामिल अद (एस) का कद विधानसभा में कांग्रेस से बड़ा है। इस समय विधानसभा में कांग्रेस के सात सदस्यों के मुकाबले अद (एस) के नौ सदस्य हैं।
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अद (एस) को विधानसभा में यह कामयाबी केवल 12 सीटों पर चुनाव लड़ने से ही मिल गई थी। लोकसभा में उत्तर प्रदेश से अपना दल के दो सदस्य हैं तो कांग्रेस की संख्या दो ही है। रैली में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से लेकर स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री सिद्धार्थ नाथ सिंह ने विधानसभा में अद (एस) सदस्यों की संख्या कांग्रेस से ज्यादा होने के तथ्य का उल्लेख भी किया।
वहीं अद (एस) का इरादा प्रदेश में सपा और बसपा का विकल्प बनने का है। यही वजह है कि केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल ने संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अंबेडकर के सामाजिक न्याय की सोच को कार्यरूप देने की इच्छा के साथ-साथ राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग को संवैधानिक दर्जा देने में अड़ंगा डालने के लिए सपा-बसपा पर निशाना साधा।
साथ ही मुख्यमंत्री से उत्तर प्रदेश पिछड़ा वर्ग आयोग को सक्रिय करने के साथ-साथ न्यायपालिका में पिछड़ों और दलितों की हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए प्रयास करने की मांग भी की। राष्ट्रपति पद के लिए रामनाथ कोविंद को प्रत्याशी बनाने के लिए उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रशंसा करते हुए कांग्रेस की कथनी-करनी पर सवाल खड़े किए।
मुख्यमंत्री योगी ने अनुप्रिया की मेहनत, समझ और सांगठनिक क्षमता तारीफ करते हुए कहा कि उनकी पार्टी कांग्रेस से राष्ट्रीय पार्टी का हक छीनने जा रही है। डॉ. पटेल को उन्होंने डॉ. अंबेडकर द्वारा शुरू की गई समानता की लड़ाई को आगे बढ़ाने वालों में सबसे बड़ा पुरोधा करार दिया।
कहा-‘डॉ. पटेल 25 साल पहले सामाजिक न्याय के लिए संघर्ष शुरू किया था। उनकी बेटी अनुप्रिया पटेल ने उनके सपने को साकार करके दिखा दिया है।’ भारी भीड़ से गदगद मुख्यमंत्री ने साफ कहा कि किसी समाज के साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा।
यों तो रैली अद (एस) की थी लेकिन इसमें भाजपा के कार्यकर्ताओं ने पूरी शिद्दत से भागीदारी की। मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह के अलावा बेसिक शिक्षा मंत्री अनुपमा जायसवाल ने यह बताने में गुरेज नहीं की कि उनकी जीत में अपना दल के समर्पित और साहसी कार्यकर्ताओं के सहयोग का बड़ा योगदान है।
दोनों पार्टियों के झंडे में शामिल भगवा रंग की नई व्याख्या के जरिए यह बताया गया कि ये गठबंधन स्वाभाविक और नैसर्गिक है। सबका साथ-सबका विकास तभी संभव है, जब दोनों दल पिछड़ों, दलितों, वंचितों के हक-हकूक की लड़ाई को साथ मिलकर लड़ेंगे।
किसी की नजर न लग जाएः अनुप्रिया पटेल
जनसभा को संबोधित करतीं अनुप्रिया पटेल
- फोटो : अमर उजाला
रोहनिया की धरती को अपने लिए भाग्यशाली बताने के साथ ही अनुप्रिया पटेल ने अपने इरादे तो जाहिर किए ही, आशंकाएं भी बताने से परहेज नहीं किया। बोलीं- 2014 में हुए भाजपा-अपना दल के शुभ गठबंधन के बाद आपसी सामंजस्य से बहुजनवादी और समाजवादी ताकतों को करारा जवाब दिया गया है। इसे किसी की नजर न लग जाए। विधानसभा चुनाव के समय उनसे अलग हुई मां और बहन के बारे में उन्होंने साफ तो कुछ नहीं कहा लेकिन उनके कार्यकर्ता उनके भाव समझ गए।