UP Crime: वीडीए का क्लर्क पांच हजार रुपये घूस लेते गिरफ्तार, अधिवक्ता की शिकायत पर हुई कार्रवाई
वाराणसी जिले में मंगलवार को एंटी करप्शन की टीम को बड़ी सफलता हाथ लगी। विकास प्रधिकरण के एक कर्मचारी को पांच हजार रुपये घूस लेते रंगे हाथ दबोच लिया गया।
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भ्रष्टाचार निवारण संगठन की टीम ने मंगलवार को वाराणसी विकास प्राधिकरण के संपत्ति विभाग के कनिष्ठ लिपिक को पांच हजार रुपये घूस लेते हुए रंगेहाथ पकड़ा। आरोपी की पहचान प्रयागराज के घूरपुर थाना क्षेत्र के बिगहिया गांव के मूल निवासी और सरदार पटेल मार्ग, सिविल लाइन क्षेत्र में रहने वाले रवि शंकर के रूप में हुई है। रवि शंकर के खिलाफ कैंट थाने में मुकदमा दर्ज कराया गया है।
यह है पूरा मामला
शास्त्री नगर, सिगरा निवासी शिव कुमार सिन्हा सिविल कोर्ट में अधिवक्ता हैं। शिव कुमार सिन्हा ने बताया कि उनके एक फ्लैट के नामांतरण का मसला गत चार साल से वीडीए में अटका हुआ है। उन्होंने बहुत भागदौड़ की, लेकिन पैसा दिए बगैर नामांतरण की कार्रवाई संपन्न ही नहीं हो रही थी। बीच में एक बार किसी तरह से बात बनी भी तो पैसा न देने के कारण नामांतरण निरस्त कर दिया गया। इस पर उन्होंने लिपिक रवि शंकर से बातचीत की तो उसने पहले दो लाख रुपये मांगा। लंबी बातचीत के बाद 50 हजार रुपये देने पर रवि शंकर नामांतरण का काम करने की हामी भरा।
पहली किश्त के लिए रुपये देने पहुंचे थे
इस पर उन्होंने भ्रष्टाचार निवारण संगठन की वाराणसी इकाई में शिकायत दर्ज कराई। शिव कुमार सिन्हा की शिकायत के आधार पर भ्रष्टाचार निवारण संगठन के पुलिस कर्मियों ने उन्हें रवि शंकर को पहली किश्त के रूप में पांच हजार रुपये देने के लिए कहा। मंगलवार को वह केमिकल लगे पांच हजार रुपये रवि शंकर को देने पहुंचे। रवि शंकर अपनी टेबल से उठ कर संपत्ति अनुभाग के बरामदे में आया। वह जैसे ही पैसा थामा, इंस्पेक्टर राजेश कुमार यादव, इंस्पेक्टर नीरज कुमार सिंह व इंस्पेक्टर उमाशंकर यादव ने हेड कांस्टेबल शैलेंद्र कुमार राय और कांस्टेबल अजीत सिंह के साथ उसे रंगेहाथ पकड़ लिया।
अधिवक्ता का यह हाल, आमजन की सोचिए
शिव कुमार सिन्हा ने कहा कि एक अधिवक्ता ने चार साल तक वीडीए में भागदौड़ की, लेकिन सुनवाई नहीं हुई। अधिकारी कहते थे कि बाबू को पैसा देकर मामला निस्तारित करा लीजिए। बाबू कहता था कि आप जो पैसा देंगे, उसमें अफसरों को भी हिस्सा देना पड़ता है। शिव कुमार सिन्हा ने कहा कि जब एक अधिवक्ता का यह हाल है तो वीडीए में आम आदमी का काम कैसे होता होगा, यह सोचने वाली बात है।