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शहर के घनी आबादी वाले इलाकों में प्रतिबंध के बावजूद किया जा रहा पशुपालन

Mon, 31 May 2021 01:09 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Mon, 31 May 2021 01:09 AM IST
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Animal Husbandry despite being banned in densely populated areas of the city
शहर की गलियों और मुहल्लों में इन दिनों प्रशासन की अनदेखी के मवेशियों को पालने का कार्य किया जा रहा है। साथ ही इन्हें गलियों में छोड़ दिया जाता है। जिससे गली मोहल्लों और घाटों पर आय दिन गंदगी फैल रही है। इनके मल मूत्र को भी सीवर में बहाए जाने से सीवर जैम की समस्या उत्पन्न हो जाती है। इनके साथ ही बेसहारा घूमने वाले पशुओं की भी धरपकड़ नहीं होने से उनकी भी संख्या दिनों दिन बढ़ती जा रही हैं। इन्हीं बेसहारा पशुओं के हमले से कई लोगों के घायल होने की सूचनाएं भी मिलती रहती हैं।
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शहर की आबादी को देखते हुए उच्च न्यायालय द्वारा नगर निगम क्षेत्र में दो से ज्यादा मवेशियों को रखने पर पाबंदी लगाई थी। यदि कोई बिना पंजीकरण के मवेशियों को रखता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई कर मवेशी जब्त किए जाते हैं। जिसपर नगर निगम द्वारा अभियान चलते हुए कार्रवाई की जाती है। जिसका शहर में समुचित पालन नही किया जा रहा। गलयों और मुहल्लों वाले घनी आबादी वाले इलाकों में धड़ल्ले से सैकड़ों मवेशियों का पालन किया जा रहा है। वहीं निगम भी इन पशुपालकों पर लगाम लगाने में विफल दिखाई दे रही है।
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नगर निगम में आवारा पशुओं को पकड़े जाने के लिए अभियान चलाया जा रहा है, जिन्होंने पालतू मवेशियों के पंजीकरण नही कराया है उनके विरुद्ध कार्रवाई की जा रही है।- डॉ. अजय प्रताप सिंह, पशु चिकित्सा अधिकारी नगर निगम
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घर के बाहर निकलते समय कुछ दूर सड़क पर रोजाना पालतू पशु दिख जाते हैं। जिनकी वजह से सड़क पर गंदगी फैलती है।- अभय प्रताप सिंह, पहड़िया
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आवास से निकलते ही बाहर मवेशियों के मल मूत्र पड़ा मिलता है। जिससे आने जाने में दिक्कत होती है। कई बार तो यह बीच रास्ते पर खड़े हो जाते हैं।- हिमांशु गिरी, पांडेयपुर

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हमारे मुहल्ले में पालतू पशुओं के साथ आवारा पशुओं का भी आतंक है। सांड इतने हो गए हैं कि आते जाते लोगों को हुरपेट देते हैं। मुहल्ले के कई लोगों को घायल भी कर चुके हैं।- प्रमोद विश्वकर्मा, नदेसर
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