यूपी : बनारस के जिला जेल में कुख्यात अपराधियों का चल रहा नेटवर्क, करते हैं फोर-जी मोबाइल का इस्तेमाल
जिला जेल में पिछले दो साल से फोर-जी जैमर लगवाने की चल रही है कवायद
विस्तार
वाराणसी में पूर्वांचल के विभिन्न जनपदों के कुख्यात अपराधियों का नेटवर्क जेल से भी संचालित हो रहा है। जेल के अंदर फोर-जी मोबाइल धड़ल्ले से इस्तेमाल किया जा रहा है। जेल से फोन कर धमकाने और अपराधिक गतिविधियों को बढ़ावा देने में कुख्यात तनिक भी पीछे नहीं है। इसके पीछे एक मात्र कारण यह है कि जेल में अब तक फोर-जी जैमर नहीं लग सका है।
आधुनिकता के दौर में हम कदम तो फाइव-जी की ओर बढ़ा रहे हैं लेकिन जिला जेल के हालात इसके ठीक उलट है। अपराधी फोर-जी मोबाइल इस्तेमाल कर रहे हैं और जेल में टू-जी का ही जैमर लगा हुआ है। चित्रकूट जेल में हुए गैंगवार के बाद एक बार फिर जिला जेल में अपराधियों की तलाशी ली जाने लगी है।
जिला जेल में फोर-जी मोबाइल का अपराधी इसलिए उपयोग करते हैं कि वह व्हाट्सएप कालिंग के जरिए अपराधिक गतिविधियों को संचालित करते हैं। व्हाट्सएप कालिंग के जरिए किसी को धमकी भी देते हैं तो पुलिस के लिए यह पुष्ट कर पाना आसान नहीं होता है। विभागीय जानकारों के अनुसार जेल में अधिकतर मोबाइल जो पकड़े जाते हैं, वह फोर-जी ही होता है।
जब-जब उच्चाधिकारियों का जेल में दौरा होता है तो बैरकों के बाहर या फिर टायलेट के पीछे इस तरह के मोबाइल बंदी फेंक भी देते हैं। पूर्व में कई बार ऐसी स्थिति सामने आई है। जिला जेल में ही कई बार बंदी फेसबुक पर बैरक के अंदर ही फोटो भी शेयर करते हुए मिले हैं। जिसकी जेल मुख्यालय ने जांच भी कराई है।
चौकाघाट के जिला जेल प्रशासन के समक्ष चुनौती यह भी है कि क्षमता से तीन गुना बंदी भरे हुए हैं। इन पर नजर रखने के लिए मात्र 72 बंदी रक्षक हैं, इसमें चार महिला और 68 पुरूष हैं। जेल की क्षमता 747 बंदियों की है लेकिन वर्तमान में 2100 बंदी भरे हुए हैं। जेल के अंदर 17 बैरक है और एक बैरक की क्षमता 50 बंदी की है लेकिन बैरक में 170 बंदी रह रहे हैं। इसे लेकर आए दिन बंदियों में विवाद भी होता है, जिसे बंदी रक्षक स्तर पर सुलझा भी लिया जाता है। महिला बैरक एक ही है और उसमें भी संख्या महिला बंदियों की 25 से 30 है।
चित्रकूट जेल के अंदर जिस बैरक में कुख्यात अंशु दीक्षित रहता था, उस बैरक का सीसीटीवी दो माह से खराब था। हालांकि चौकाघाट जिला जेल प्रशासन का दावा है कि 30 सीसीटीवी कैमरे लगे हैं और सभी काम कर रहे हैं।
जेल में बढ़ाई गई मेराज के हिस्ट्रीशीटर भांजे परवेज की सुरक्षा
चित्रकूट जेल के अंदर गैंगवार में मारे गए मेराज के भांजे परवेज भी जिला जेल में बंद है। चित्रकूट घटना के बाद से जिला जेल प्रशासन ने परवेज की सुरक्षा बढ़ा दी है। फर्जी पते पर शस्त्र लाइसेंस नवीनीकरण कराने के आरोप में मेराज का साथ देने में नदेसर निवासी परवेज पर भी कैंट थाने में मुकदमा दर्ज था। मुख्तार के करीबी मेराज अहमद के भांजे को कैंट पुलिस ने 27 सितंबर 2020 को नदेसर स्थित घर से गिरफ्तार किया था। पुलिस रिकार्ड के अनुसार परवेज पर 21 आपराधिक मुकदमें दर्ज हैं।
जिला जेल के जेरल पीके त्रिवेदी ने कहा कि जेल में चेकिंग अभियान चलाई जाती है। किसी भी बंदी के पास मोबाइल या अन्य कोई भी प्रतिबंधित सामग्री नहीं पहुंचती है। जिला जेल में सुरक्षा व्यवस्था पुख्ता है।