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चंद लोगों के बीच मनी धूमिल की जयंती
ब्यूरो, अमर उजाला/वाराणसी
Updated Thu, 10 Nov 2016 02:32 AM IST
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भतसार में धूमिल जयंती पर आयोजित बालिका महोत्सव।
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खेवली गांव में बुधवार को जनकवि सुदामा पांडेय ‘धूमिल’ की जयंती उनके पैतृक आवास में सिर्फ गिने-चुने लोगों के बीच मनाई गई। लेखक और साहित्यकार होने का दंभ भरने वालों की जमात से समारोह में कोई नहीं पहुंचा। राजनीतिक दलों और प्रशासनिक अमले के भी कोई नुमाइंदे नहीं दिखे। जनकवि की ऐसी उपेक्षा से उनके परिवारीजन ही नहीं, हिंदी जगत के लोग भी खासे आहत दिखे।
धूमिल जनसेवा समिति की ओर से आयोजित जयंती समारोह के मंच पर हिंदी जगत से जुड़े चंद विद्वानों की मौजूदगी हैरान करने वाली थी। बतौर मुख्य अतिथि महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के हिंदी विभागाध्यक्ष प्रो. शिव कुमार मिश्र ने कहा कि यह धूमिल की नहीं बल्कि हिंदी साहित्य की उपेक्षा है। उन्होंने कहा कि धूमिल जन मानस के कवि थे। वह कहते थे कि गांव से शहर बनता है, शहर से गांव नहीं। काशी विद्यापीठ के हिंदी विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रो. श्रद्धानंद ने कहा कि जब वाराणसी से छायावादी कवियों का युग समाप्त हो रहा था, तब धूमिल ने उस परंपरा को जीवित रखा।
डॉ. उमाशंकर मिश्र ने कहा कि मुंशी प्रेमचंद्र ने गांव की समस्याओं को कहानी के माध्यम से प्रस्तुत किया तो धूमिल ने कविताओं के जरिये आवाज उठाई। धूमिल जनसेवा समिति के सचिव देवी शंकर सिंह ने कहा कि भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व सूबे के राज्यमंत्री सुरेंद्र पटेल के क्षेत्र का हिस्सा है जनकवि का गांव। ऐसे में उनके कोई नुमाइंदे तक का समारोह में न आना कष्टदायक है। इस मौके पर धूमिल की पत्नी मूरत देवी, उनके पुत्र रत्नशंकर पांडेय एवं आनंद शंकर पांडेय के अलावा प्रो. रामसुधार सिंह, डॉ. सदानंद सिंह और धीरेंद्र सिंह आदि मौजूद थे।
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भतसार स्थित खेतार गांव में धूमिल की जयंती पर बालिका महोत्सव का आयोजन किया गया। जनकवि को श्रद्धासुमन अर्पित करने के बाद छात्राओं ने उनकी स्मृति में पौधे रोपे और रैली निकाली। बालिकाओं ने ने रैली के जरिये कन्या भ्रूण हत्या, यौन उत्पीड़न, दहेज उत्पीड़न और बाल विवाह के खिलाफ आवाज उठाई। रैली को जिला पंचायत सदस्य मंजू देवी और खेवली की ग्राम प्रधान राजकुमारी ने हरी झंडी दिखाई। इसके बाद बालिकाओं ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के जरिये अपने हक की आवाज उठाई। यह आयोजन धूमिल शोध संस्थान, विवेकानंद काशी जनकल्याण समिति, साझा संस्कृति मंच, आशा ट्रस्ट, लोक समिति और धूमिल जनसंपर्क समिति की ओर से किया गया था। इस मौके पर धूमिल के बेटे रत्नशंकर पांडेय, नंदलाल मास्टर और पप्पू यादव शामिल थे।
धूमिल जयंती पर अस्सी घाट पर धूमिल आपातकाल ‘माइम टाइम’ विषयक जनसभा हुई। वक्ताओं ने कहा कि देश भर में आरटीआई कार्यकर्ताओं, मीडिया, फिल्मकारों व साहित्यकारों पर प्रतिबंध लगाने, उनकी आवाज दबाई जा रही है। ऐसे में धूमिल का साहित्य, उनकी रचनाएं और उसकी संघर्ष हमें आगे की लड़ाई के लिए प्रेरणा दे रही है। इस दौरान एनडीटीवी पर सरकार द्वारा प्रतिबंध लगाए जाने के प्रयास की कड़े शब्दों में निंदा की गई। जनसभा में प्रो. एमपी सिंह, प्रो. बलिराज पांडेय, डॉ. गया सिंह, एसपी राय, जागृति राही, अनूप श्रमिक, डॉ. आनंद प्रकाश, धनंजय त्रिपाठी, विकास सिंह आदि मौजूद रहे।
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धूमिल जनसेवा समिति की ओर से आयोजित जयंती समारोह के मंच पर हिंदी जगत से जुड़े चंद विद्वानों की मौजूदगी हैरान करने वाली थी। बतौर मुख्य अतिथि महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के हिंदी विभागाध्यक्ष प्रो. शिव कुमार मिश्र ने कहा कि यह धूमिल की नहीं बल्कि हिंदी साहित्य की उपेक्षा है। उन्होंने कहा कि धूमिल जन मानस के कवि थे। वह कहते थे कि गांव से शहर बनता है, शहर से गांव नहीं। काशी विद्यापीठ के हिंदी विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रो. श्रद्धानंद ने कहा कि जब वाराणसी से छायावादी कवियों का युग समाप्त हो रहा था, तब धूमिल ने उस परंपरा को जीवित रखा।
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डॉ. उमाशंकर मिश्र ने कहा कि मुंशी प्रेमचंद्र ने गांव की समस्याओं को कहानी के माध्यम से प्रस्तुत किया तो धूमिल ने कविताओं के जरिये आवाज उठाई। धूमिल जनसेवा समिति के सचिव देवी शंकर सिंह ने कहा कि भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व सूबे के राज्यमंत्री सुरेंद्र पटेल के क्षेत्र का हिस्सा है जनकवि का गांव। ऐसे में उनके कोई नुमाइंदे तक का समारोह में न आना कष्टदायक है। इस मौके पर धूमिल की पत्नी मूरत देवी, उनके पुत्र रत्नशंकर पांडेय एवं आनंद शंकर पांडेय के अलावा प्रो. रामसुधार सिंह, डॉ. सदानंद सिंह और धीरेंद्र सिंह आदि मौजूद थे।
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भतसार स्थित खेतार गांव में धूमिल की जयंती पर बालिका महोत्सव का आयोजन किया गया। जनकवि को श्रद्धासुमन अर्पित करने के बाद छात्राओं ने उनकी स्मृति में पौधे रोपे और रैली निकाली। बालिकाओं ने ने रैली के जरिये कन्या भ्रूण हत्या, यौन उत्पीड़न, दहेज उत्पीड़न और बाल विवाह के खिलाफ आवाज उठाई। रैली को जिला पंचायत सदस्य मंजू देवी और खेवली की ग्राम प्रधान राजकुमारी ने हरी झंडी दिखाई। इसके बाद बालिकाओं ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के जरिये अपने हक की आवाज उठाई। यह आयोजन धूमिल शोध संस्थान, विवेकानंद काशी जनकल्याण समिति, साझा संस्कृति मंच, आशा ट्रस्ट, लोक समिति और धूमिल जनसंपर्क समिति की ओर से किया गया था। इस मौके पर धूमिल के बेटे रत्नशंकर पांडेय, नंदलाल मास्टर और पप्पू यादव शामिल थे।
धूमिल जयंती पर अस्सी घाट पर धूमिल आपातकाल ‘माइम टाइम’ विषयक जनसभा हुई। वक्ताओं ने कहा कि देश भर में आरटीआई कार्यकर्ताओं, मीडिया, फिल्मकारों व साहित्यकारों पर प्रतिबंध लगाने, उनकी आवाज दबाई जा रही है। ऐसे में धूमिल का साहित्य, उनकी रचनाएं और उसकी संघर्ष हमें आगे की लड़ाई के लिए प्रेरणा दे रही है। इस दौरान एनडीटीवी पर सरकार द्वारा प्रतिबंध लगाए जाने के प्रयास की कड़े शब्दों में निंदा की गई। जनसभा में प्रो. एमपी सिंह, प्रो. बलिराज पांडेय, डॉ. गया सिंह, एसपी राय, जागृति राही, अनूप श्रमिक, डॉ. आनंद प्रकाश, धनंजय त्रिपाठी, विकास सिंह आदि मौजूद रहे।