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अमित शाह बोले- मुझे गुजराती से ज्यादा हिंदी भाषा पसंद, हमें अपनी राजभाषा को मजबूत करने की जरूरत

Sat, 13 Nov 2021 02:33 PM IST
गीतार्जुन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: गीतार्जुन गौतम Updated Sat, 13 Nov 2021 02:33 PM IST
सार

गृहमंत्री अमित शाह वाराणसी के दो दिवसीय दौरे पर आए हुए हैं। वह आज अखिल भारतीय राजभाषा सम्मेलन को संबोधित कर रहे हैं। उनके साथ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी है।

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Amit Shah varanasi visit Updates: Amit Shah addressing at All India Official Language Conference in Hastkala Sankul varanasi
हस्तकला संकुल में अखिल भारतीय राजभाषा सम्मेलन में गृहमंत्री अमित शाह। - फोटो : BJP Twitter

विस्तार

वाराणसी के हस्तकला संकुल में अखिल भारतीय राजभाषा सम्मेलन को गृहमंत्री अमित शाह संबोधित कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि अखिल भारतीय राजभाषा सम्मेलन को राजधानी दिल्ली से बाहर करने का निर्णय हमने वर्ष 2019 में ही कर लिया था। कोरोना काल की वजह से हम नहीं कर पाएं, लेकिन आज मुझे खुशी हो रही है कि ये नई शुभ शुरुआत आजादी के अमृत महोत्सव में होने जा रही है।

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि अमृत महोत्सव, देश को आजादी दिलाने वाले लोगों की स्मृति को फिर से जीवंत करके युवा पीढ़ी को प्रेरणा देने के लिए तो है ही, ये हमारे लिए संकल्प का भी वर्ष है। 
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अमित शाह ने कहा कि आजादी के अमृत महोत्सव के तहत में देश के सभी लोगों का आह्वान करना चाहता हूं कि स्वभाषा के लिए हमारा एक लक्ष्य जो छूट गया था, हम उसका स्मरण करें और उसे अपने जीवन का हिस्सा बनाएं। हिंदी और हमारी सभी स्थानीय भाषाओं के बीच कोई अंतर्विरोध नहीं है। उन्होंने कहा कि मुझे गुजराती से ज्यादा हिंदी भाषा पसंद है। हमें अपनी राजभाषा को मजबूत करने की जरूरत है।
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गृहमंत्री ने कहा कि पहले हिंदी भाषा के लिए बहुत सारे विवाद खड़े करने का प्रयास किया गया था, लेकिन वो वक्त अब समाप्त हो गया है। पीएम मोदी ने गौरव के साथ हमारी भाषाओं को दुनिया भर में प्रतिस्थापित करने का काम किया है।

गृहमंत्री ने कहा कि जो देश अपनी भाषा खो देता है, वो देश अपनी सभ्यता, संस्कृति और अपने मौलिक चिंतन को भी खो देता है। जो देश अपने मौलिक चिंतन को खो देते हैं वो दुनिया को आगे बढ़ाने में योगदान नहीं कर सकते हैं। दुनिया में सबसे ज्यादा बोली जाने वाली लिपिबद्ध भाषाएं भारत में हैं। उन्हें हमें आगे बढ़ाना है।

काशी हमेशा विद्या की राजधानी है। उन्होंने कहा काशी सांस्कृतिक नगरी है। देश के इतिहास को काशी से अलग कर नहीं देख सकते। काशी भाषाओं का गोमुख है। हिंदी का जन्म काशी से हुआ है। 1868 में काशी से ही शिक्षा हिंदी में हुई।

हिंदी के उन्नयन के लिए काशी से शुरुआत हुई। पहली हिंदी पत्रिका काशी से ही शुरु हुई। मालवीय ने हिंदी में बिना चंता के पढ़ाई की। गृहमंत्री ने कहा कि तुलसी दास को कैसे भूल सकते हैं। अगर उन्होंने राम चरित मानस नहीं लिखी होती तो आज रामायण लोग भूल जाते।

अनेक हिंदी के विद्वानों यहीं से भाषा को आगे बढ़ाया। हिंदी भाषा में  विवाद खड़ा किया गया। एक समय ऐसा आएगा कि लोग हिंदी नहीं बोल सकेंगे तो लघुता महसूस होगी। जो देश अपनी भाषा को खो देता है तो वह संस्कृति को खो देता है।

भाषा जितनी सशक्त और समृद्ध होगी, उतनी ही संस्कृति व सभ्यता विस्तृत और सशक्त होगी। अपनी भाषा से लगाव और अपनी भाषा के उपयोग में कभी भी शर्म मत कीजिए, ये गौरव का विषय है। शाह ने कहा, 'मैं गौरव के साथ कहना चाहता हूं कि आज गृह मंत्रालय में अब एक भी फाइल ऐसी नहीं है, जो अंग्रेजी में लिखी जाती या पढ़ी जाती है, पूरी तरह हमने राजभाषा को स्वीकार किया है। बहुत सारे विभाग भी इस दिशा में आगे बढ़ रहे हैं'

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