{"_id":"65415a32702d24607c014c74","slug":"amended-sue-non-working-agencies-and-those-responsible-dm-yogi-varanasi-news-c-20-vns1013-408032-2023-11-01","type":"story","status":"publish","title_hn":"Varanasi News: सरकार की हुई गैलेक्सी अस्पताल सहित तुलसीपुर की 12.44 एकड़ जमीन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Varanasi News: सरकार की हुई गैलेक्सी अस्पताल सहित तुलसीपुर की 12.44 एकड़ जमीन
विज्ञापन
अपर आयुक्त प्रशासन विश्व भूषण मिश्र की कोर्ट ने तुलसीपुर स्थित गैलेक्सी हॉस्पिटल समेत 12.44 एकड़ जमीन को बंजर घोषित करने के एसडीएम सदर के आदेश को बहाल रखा है। साथ ही सारी जमीन सरकार के नाम दर्ज कर दी है। यह जानकारी डीजीसी राजस्व ओंकार नाथ राय ने दी है। अब प्रशासन जमीन से कब्जा हटाने की कार्रवाई कर सकता है। जमीन की कीमत अरबों रुपये की बताई जा रही है।
डीजीसी राजस्व ने बताया कि एसडीएम सदर की कोर्ट ने बीते छह सितंबर को 12.44 एकड़ जमीन को बंजर घोषित किया था। इसके खिलाफ अपर आयुक्त प्रशासन की कोर्ट में अपील दाखिल की गई थी। प्रकरण के अनुसार, फसली वर्ष 1291 में तुलसीपुर मौजे के आराजी नंबर 183 में रकवा नौ एकड़ और आराजी नंबर 197 में रकवा 3.44 एकड़ पर मालिक का नाम महाराज ईश्वरी नरायन प्रसाद सिंह अंकित था। फसली वर्ष 1359 में गैलेक्सी हॉस्पिटल समेत कई अन्य लोगों का नाम दर्ज हो गया। एक शिकायत पर जांच हुई तो सभी को नोटिस दिया गया। सबने नगर निगम से नक्शा स्वीकृत होने और रजिस्ट्री का कागज पेश किया। उनकी तरफ से कहा गया कि महाराजा प्रभुनरायन सिंह ने 1911 में पट्टा किया था, लेकिन साक्ष्य नहीं दिया। कोर्ट में सरकार की तरफ से बताया गया कि बैनामा, गृहकर और जलकर से कोई जमीन का स्वामी नहीं बन सकता है। राजस्व रिकॉर्ड में सभी का नाम कैसे दर्ज हुआ, इसका कोई ठोस आधार ही नहीं है। क्रेता को बिक्री का कोई अधिकार नहीं है। ऐसे में एसडीएम सदर ने गैलेक्सी हॉस्पिटल समेत अन्य दर्ज नामों को राजस्व रिकॉर्ड से काटकर सरकारी भूमि को नगर निगम की बंजर जमीन दर्ज करने का आदेश दिया था। एसडीएम सदर के आदेश के खिलाफ दाखिल अपील में कोई बल नहीं पाते हुए अपर आयुक्त प्रशासन की अदालत ने विपक्षियों की अपील निरस्त कर दी।
विज्ञापन
डीजीसी राजस्व ने बताया कि एसडीएम सदर की कोर्ट ने बीते छह सितंबर को 12.44 एकड़ जमीन को बंजर घोषित किया था। इसके खिलाफ अपर आयुक्त प्रशासन की कोर्ट में अपील दाखिल की गई थी। प्रकरण के अनुसार, फसली वर्ष 1291 में तुलसीपुर मौजे के आराजी नंबर 183 में रकवा नौ एकड़ और आराजी नंबर 197 में रकवा 3.44 एकड़ पर मालिक का नाम महाराज ईश्वरी नरायन प्रसाद सिंह अंकित था। फसली वर्ष 1359 में गैलेक्सी हॉस्पिटल समेत कई अन्य लोगों का नाम दर्ज हो गया। एक शिकायत पर जांच हुई तो सभी को नोटिस दिया गया। सबने नगर निगम से नक्शा स्वीकृत होने और रजिस्ट्री का कागज पेश किया। उनकी तरफ से कहा गया कि महाराजा प्रभुनरायन सिंह ने 1911 में पट्टा किया था, लेकिन साक्ष्य नहीं दिया। कोर्ट में सरकार की तरफ से बताया गया कि बैनामा, गृहकर और जलकर से कोई जमीन का स्वामी नहीं बन सकता है। राजस्व रिकॉर्ड में सभी का नाम कैसे दर्ज हुआ, इसका कोई ठोस आधार ही नहीं है। क्रेता को बिक्री का कोई अधिकार नहीं है। ऐसे में एसडीएम सदर ने गैलेक्सी हॉस्पिटल समेत अन्य दर्ज नामों को राजस्व रिकॉर्ड से काटकर सरकारी भूमि को नगर निगम की बंजर जमीन दर्ज करने का आदेश दिया था। एसडीएम सदर के आदेश के खिलाफ दाखिल अपील में कोई बल नहीं पाते हुए अपर आयुक्त प्रशासन की अदालत ने विपक्षियों की अपील निरस्त कर दी।
विज्ञापन