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पूर्व कुलपति लालजी सिंह के भतीजे का आरोप, एयरपोर्ट पर नहीं दी गई एंबुलेंस सुविधा
ब्यूरो, अमर उजाला, जौनपुर
Updated Wed, 13 Dec 2017 10:35 AM IST
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डॉ. लालजी सिंह
- फोटो : file photo
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लालबहादुर शास्त्री एयरपोर्ट वाराणसी पर पद्मश्री और बीएचयू के पूर्व कुलपति डा. लालजी सिंह को दिल का दौरा पड़ने पर उन्हें व्हील चेयर व एंबुलेंस मुहैया नहीं करायी गई।
डॉ. लालजी सिंह के भतीजे अरुण सिंह ने कहा उन्होंने पूर्व में सूचना भी दी, बावजूद इसके लापरवाही बरती गई। प्राथमिक चिकित्सा और इलाज में देरी की वजह से डॉ. लालजी सिंह की मौत हो गई।
अरुण सिंह ने कहा कि तेरही के बाद वह कानूनी राय लेकर जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ केस करेंगे। अरुण सिंह ने आरोप लगाया है कि रविवार की सायं डॉ. लालजी सिंह को इंडिगो की 5.50 बजे वाली फ्लाइट से हैदराबाद जाना था।
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घर से ही फोन पर फ्लाइट के कार्यालय को ह्वील चेयर की मदद मांगी गई थी। लगभग आधे घंटे बाद व्यवस्था बनी तो उन्हें अंदर जाने से मना कर दिया गया। उनके यह बताने पर कि उनके बड़े पिता लालजी सिंह का स्वास्थ्य ठीक नहीं है, उन्हें उनकी जरूरत है।
अन्यथा वे प्लेन तक नहीं पहुँच पाएंगे लेकिन अफसरों ने एक नहीं सुनी। यह जानते हुए कि वे बीएचयू के पूर्व कुलपति रह चुके हैं। लाचार होकर उन्होंने एक दूसरी कंपनी के आफिस में जाकर मदद मांगी।
संयोग से काउंटर पर बैठा बाबू लालजी सिंह का छात्र रह चुका था। उसने रिस्क लेते हुए अपनी कंपनी से डिपार्चर पास दिलाया। अंदर उन्होंने देखा कि डॉ. लालजी सिंह को तत्काल चिकित्सीय सुविधा की जरूरत थी।
काउंटर पर वहाँ न तो कोई मेडिकल आफिसर उपलब्ध हुआ और न ही एक अदद टैबलेट देने वाला कोई जिम्मेदार। आधे घंटे बाद भी न तो एंबुलेंस मिल सकी और न ही सांस की तकलीफ दूर करने के लिए जरूरी आक्सीजन सिलेंडर मिला।
मजबूर होकर वह अपने वाहन से लालजी सिंह को लेकर वाराणसी के सर सुंदर लाल अस्पताल पहुंचे। एयरपोर्ट निदेशक अनिल कुमार राय का कहना है कि एयरपोर्ट पर इमरजेंसी में जो सुविधाएं मिलनी चाहिए, वह यात्रियों को समय से उपलब्ध कराई जाती हैं। हालांकि डॉ. लालजी के परिजनों की तरफ से किसी प्रकार की मेडिकल सुविधा की मांग नहीं की गई थी। फिर भी शिकायत आई तो जांच करवाई जाएगी।
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डॉ. लालजी सिंह के भतीजे अरुण सिंह ने कहा उन्होंने पूर्व में सूचना भी दी, बावजूद इसके लापरवाही बरती गई। प्राथमिक चिकित्सा और इलाज में देरी की वजह से डॉ. लालजी सिंह की मौत हो गई।
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अरुण सिंह ने कहा कि तेरही के बाद वह कानूनी राय लेकर जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ केस करेंगे। अरुण सिंह ने आरोप लगाया है कि रविवार की सायं डॉ. लालजी सिंह को इंडिगो की 5.50 बजे वाली फ्लाइट से हैदराबाद जाना था।
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घर से ही फोन पर फ्लाइट के कार्यालय को ह्वील चेयर की मदद मांगी गई थी। लगभग आधे घंटे बाद व्यवस्था बनी तो उन्हें अंदर जाने से मना कर दिया गया। उनके यह बताने पर कि उनके बड़े पिता लालजी सिंह का स्वास्थ्य ठीक नहीं है, उन्हें उनकी जरूरत है।
अन्यथा वे प्लेन तक नहीं पहुँच पाएंगे लेकिन अफसरों ने एक नहीं सुनी। यह जानते हुए कि वे बीएचयू के पूर्व कुलपति रह चुके हैं। लाचार होकर उन्होंने एक दूसरी कंपनी के आफिस में जाकर मदद मांगी।
संयोग से काउंटर पर बैठा बाबू लालजी सिंह का छात्र रह चुका था। उसने रिस्क लेते हुए अपनी कंपनी से डिपार्चर पास दिलाया। अंदर उन्होंने देखा कि डॉ. लालजी सिंह को तत्काल चिकित्सीय सुविधा की जरूरत थी।
काउंटर पर वहाँ न तो कोई मेडिकल आफिसर उपलब्ध हुआ और न ही एक अदद टैबलेट देने वाला कोई जिम्मेदार। आधे घंटे बाद भी न तो एंबुलेंस मिल सकी और न ही सांस की तकलीफ दूर करने के लिए जरूरी आक्सीजन सिलेंडर मिला।
मजबूर होकर वह अपने वाहन से लालजी सिंह को लेकर वाराणसी के सर सुंदर लाल अस्पताल पहुंचे। एयरपोर्ट निदेशक अनिल कुमार राय का कहना है कि एयरपोर्ट पर इमरजेंसी में जो सुविधाएं मिलनी चाहिए, वह यात्रियों को समय से उपलब्ध कराई जाती हैं। हालांकि डॉ. लालजी के परिजनों की तरफ से किसी प्रकार की मेडिकल सुविधा की मांग नहीं की गई थी। फिर भी शिकायत आई तो जांच करवाई जाएगी।
पूर्व कुलपति के निधन से दुखी है विश्वविद्यालय परिवार
बीएचयू में डा लालजी सिंह के निधन पर शोक मे क्षद्घांजलि देते शिक्षक व अद्यिकारी
- फोटो : अमर उजाला
बीएचयू के पूर्व कुलपति डॉ. लालजी सिंह के निधन पर आयोजित शोक सभा में विश्वविद्यालय शिक्षकों, अधिकारियों, कर्मचारियों ने शोक जताया है। इस दौरान उनके चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर दो मिनट का मौन रखकर डॉ. सिंह को श्रद्धांजलि दी गई।
इस दौरान उनके जीवनी के साथ ही कार्यकाल में उपलब्धियों की विस्तृत चर्चा की गई। उधर दक्षिणी परिसर और आईआईटी में भी शोकसभा आयोजित कर लोगों ने श्रद्धांजलि दी।
केंद्रीय कार्यालय समिति कक्ष में आयोजित शोक सभा में चिकित्सा विज्ञान संस्थान मेडिसीन विभाग के वरिष्ठ प्रोफेसर डॉ. श्यामसुंदर अग्रवाल ने डॉ.सिंह का जीवन वृत पढ़ा।
इस दौरान उन्होंने बीएचयू में उनके द्वारा शुरू कराई गई सुविधाओं को याद करते हुए कुलपति रहते हुए एक रुपये महीने वेतन लेने सहित कई प्रसंगों का जिक्र किया गया है। कार्यक्रम का संचालन सामान्य प्रशासन विभाग के अनुभाग अधिकारी अशोक कुमार शर्मा ने किया।
इस दौरान वित्ताधिकारी डॉ. श्याम बाबू पटेल, सम्पदा अधिकारी डॉ. लाल बाबू पटेल, डॉ.केपी उपाध्याय, डॉ.एमआर पाठक, छात्र अधिष्ठाता प्रो.एमके सिंह, प्रो.केके सिंह सहित कई लोग मौजूद रहे।
उधर आईआईटी में भी बोर्ड आफ गवर्नर के पहले अध्यक्ष डॉ. सिंह के निधन पर शोक जताया गया। एनी बेसेंट थियेटर में शोकसभा के बाद संस्थान में अवकाश घोषित कर दिया गया।
इस दौरान उनके जीवनी के साथ ही कार्यकाल में उपलब्धियों की विस्तृत चर्चा की गई। उधर दक्षिणी परिसर और आईआईटी में भी शोकसभा आयोजित कर लोगों ने श्रद्धांजलि दी।
केंद्रीय कार्यालय समिति कक्ष में आयोजित शोक सभा में चिकित्सा विज्ञान संस्थान मेडिसीन विभाग के वरिष्ठ प्रोफेसर डॉ. श्यामसुंदर अग्रवाल ने डॉ.सिंह का जीवन वृत पढ़ा।
इस दौरान उन्होंने बीएचयू में उनके द्वारा शुरू कराई गई सुविधाओं को याद करते हुए कुलपति रहते हुए एक रुपये महीने वेतन लेने सहित कई प्रसंगों का जिक्र किया गया है। कार्यक्रम का संचालन सामान्य प्रशासन विभाग के अनुभाग अधिकारी अशोक कुमार शर्मा ने किया।
इस दौरान वित्ताधिकारी डॉ. श्याम बाबू पटेल, सम्पदा अधिकारी डॉ. लाल बाबू पटेल, डॉ.केपी उपाध्याय, डॉ.एमआर पाठक, छात्र अधिष्ठाता प्रो.एमके सिंह, प्रो.केके सिंह सहित कई लोग मौजूद रहे।
उधर आईआईटी में भी बोर्ड आफ गवर्नर के पहले अध्यक्ष डॉ. सिंह के निधन पर शोक जताया गया। एनी बेसेंट थियेटर में शोकसभा के बाद संस्थान में अवकाश घोषित कर दिया गया।