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अंबिका चौधरी ने कहा था नेता और बाप बदले नहीं जाते...

Sat, 21 Jan 2017 06:00 PM IST
टीम डिजिटल, बलिया
टीम डिजिटल, बलिया Updated Sat, 21 Jan 2017 06:00 PM IST
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Ambika Chaudhary bsp said the leader and father do not change...
अंब‌िका चौधरी बसपा में शाम‌िल - फोटो : amar ujala

मुलायम सिंह के करीबी और समाजवादी पार्टी के कद्दावर नेता माने जाने वाले अंबिका चौधरी ने अंतत: पार्टी में मचे घमासान के बाद शनिवार को सपा छोड़कर बसपा का दामन थाम लिया। 27 साल तक वह समाजवादी पार्टी में रहकर फेफना विधानसभा से पार्टी का प्रतिनिधित्व करते आ रहे थे।

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समाजवादी पार्टी में टिकट बटवारे को लेकर पारिवारिक कलह के बाद करीब एक पखवारे पहले बलिया के फेफना स्थित पार्टी कार्यालय पर अंबिका चौधरी ने प्रेस वार्ता के दौरान पूछे गए एक सवाल के जवाब में कहा था कि नेता और बाप बदले नहीं जाते। लेकिन महीना दिन भी नहीं बीता, अंबिका चौधरी ने पार्टी बदल दिया।
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अब बसपा का दामन थामने के बाद फेफना विधानसभा सीट से प्रत्याशी के रूप में चुनाव मैदान में ताल ठोकेंगे। अंबिका चौधरी साल 2012 में फेफना विधानसभा सीट से समाजवादी पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़े थे। जिसमें उन्हें हार का सामना करना पड़ा था।
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भाजपा प्रत्याशी उपेंद्र तिवारी ने अम्बिका चौधरी को 7387 वोटों से हराया था। सपा के पारिवारिक घमासान में मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने अंबिका चौधरी को मंत्री पद से बर्खास्त कर दिया था। तभी से अम्बिका चौधरी के टिकट पर भी ख़तरा मंडराने लगा था।

शिवपाल जब सपा के प्रदेश अध्यक्ष थे तब उन्होंने अम्बिका चौधरी को फेफना विधानसभा सीट से 2017 चुनाव के लिए समाजवादी पार्टी का प्रत्याशी बनाया था लेकिन उसके बाद अखिलेश यादव की ओर से जारी की गयी प्रत्याशियों की सूची में अंबिका चौधरी को टिकट नहीं दिया गया था।

टिकट को लेकर असमंजस में थे अंबिका

Ambika Chaudhary bsp said the leader and father do not change...
साइक‌िल छोड़ हाथी की सवारी - फोटो : amar ujala

अखिलेश ने फेफना से पूर्व जिलाध्यक्ष संग्राम सिंह यादव को टिकट दिया था। उधर, अंबिका चौधरी के बसपा ज्वाइन करने के बाद फेफना से पार्टी के घोषित प्रत्याशी अभिराम सिंह दारा का टिकट कटना तय माना जा रहा है। अभिराम सिंह पिछले करीब एक साल से फेफना से प्रत्याशी के रूप में चुनाव प्रचार कर रहे हैं।

इस बीच समाजवादी पार्टी के कद्दावर नेता अंबिका चौधरी को फेफना विधानसभा सीट से प्रत्याशी घोषित किए जाने के बाद विधानसभा क्षेत्र में पार्टी को मजबूती मिलने की चर्चा की जा रही है।

समाजवादी पार्टी घमासान में अखिलेश यादव के तख्तापलट के बाद अंबिका चौधरी को ये लग रहा था कि अखिलेश यादव उन्हें टिकट नहीं देने वाले।

हालांकि अखिलेश ने अपनी नई सूची में अभी फेफना से प्रत्याशी नहीं घोषित किया है, लेकिन चर्चा है कि अंबिका चौधरी को ये विश्वास हो गया था कि समाजवादी पार्टी से उन्हें टिकट नहीं मिलेगा। जिसके बाद उन्होंने बसपा का दामन थामा।

सपा के वरिष्ठ नेता और एमएलसी अम्बिका चौधरी के सपा को छोड़कर के बसपा ज्वाइन करते हुए ही जहां उनके समर्थक प्रसन्न दिख रहे हैं वही अधिकांश सपा के कैडर सपा के वोट बैंक और कार्यकर्ता किंकर्तव्यविमूढ़ की स्थिति में दिखाई दे रहे है।

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