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अमर उजाला संवाद : छात्र बोले- प्रोफेसर साहब फलाना-ढिमाका कमेटी की मीटिंग में ही व्यस्त, पढ़ाएंगे कब

Thu, 09 Jan 2025 12:05 AM IST
अमन विश्वकर्मा अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: अमन विश्वकर्मा Updated Thu, 09 Jan 2025 12:05 AM IST
सार

Varanasi News : अमर उजाला के ऑफिस में जुटे छात्र-छात्राओं ने खुलकर अपनी बात रखी। शिक्षा से जुड़े मामलों पर उन्होंने कई सुझाव भी दिए इसके साथ ही शिकायतें और समस्याएं भी दर्ज कराईं। कहा कि हमारे संघ से ही लोकतंत्र खतरे में पड़ जाता है। हम अपनी बात तक नहीं रख सकते हैं।

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Amar Ujala Samvad Students said Professor busy committee meeting when he teach
अमर उजाला के संवाद कार्यक्रम में माैजूद छात्र-छात्राएं। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

बीएचयू में सुविधाओं और समस्याओं के मुद्दे पर छात्र-छात्राओं ने अमर उजाला के संवाद कार्यक्रम में खुलकर अपने विचार रखे। कहा कि बीएचयू की सुरक्षा व्यवस्था सिर्फ चार अधिकारियों कुलपति, रेक्टर, रजिस्ट्रार और चीफ प्रॉक्टर के इर्दगिर्द ही है।

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यूजीसी की गाइडलाइन के तहत हर सेमेस्टर में 45 दिन की क्लास जरूरी है, लेकिन कोविड के बाद 20-22 दिन भी क्लास नहीं चल रही। वजह ये कि प्रोफेसर साहब फलाना-ढिमाका कमेटी की मीटिंग में ही व्यस्त रहते हैं, तो पढ़ाएंगे कब। शोध छात्रों की पीएचडी प्रोफेसर साहब की बेटी को स्कूल पहुंचाने और मैडम को ब्यूटी पार्लर ले जाने और ले आनेे में ही पूरी हो रही है।
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छात्रों ने कहा कि मेस न चलने की समस्या को लेकर वार्डेन के पास जाओ तो कहते हैं कि खुद का रसोइया लेकर आओ। दुनिया भर में हर तरह के संघ हंै, लेकिन बीएचयू को छात्रसंघ, कर्मचारी संघ और अध्यापक संघ से ही दिक्कत है। यहां तक कि अपने आसपास चोर-चाईं तक के भी संघ हैं, लेकिन हमारे संघ से ही लोकतंत्र खतरे में पड़ जाता है।
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छात्र-छात्राओं ने कैंपस में उजड़ती कैंटीन, खराब सीसीटीवी, असुरक्षा, अनधिकृत प्रवेश और स्टूडेंट्स हेल्थ सेंटर की समस्या पर बात की। एमए के कपिश्वर मिश्र, मुरारी यादव और बीए के छात्र प्रियदर्शन मीणा ने कहा कि बिड़ला ए हॉस्टल में मेस नहीं चलता। शोध छात्रों ने कहा कि नॉन नेट फेलोशिप 8000 रुपये 2008 से ही है। इसमें कैसे कोई शहर में रहकर पढ़ाई कर पाएगा।

इनकी भी सुनें
पूर्व कुलपति ने बिना ईसी के 20 से ज्यादा सलाहकार नियुक्त कर दिए। तीन साल में चंदन के पेड़, एल्युमिनियम के रॉड, एसी केबल और बैटरियां भी चोरी हुईं। 2-3 महीने के अंतराल में दो-दो एग्जाम हो जा रहे हैं। कब सेशनल और कब प्रैक्टिकल हो रहा, पता नहीं। - राजीव नयन, एमए अर्थशास्त्र विभाग।

छात्र स्वास्थ्य केंद्र में पैरासिटामॉल समेत 2-4 दवाओं को छोड़ दें तो बाकी कोई भी दवा उपलब्ध नहीं है। जबकि प्रोफेसरों और कर्मचारियों को कर्मचारी स्वास्थ्य केंद्र में ज्यादातर दवाएं मिल जाएंगी। कोई भी बीमारी हो छात्र-छात्राओं को वही पांच दवाइयां ही मिलेंगी। बिड़ला हॉस्टल में डेढ़ साल से मेस नहीं चला है। - नील दुबे, शोध छात्र, हिंदी विभाग।

बाहरियों के लिए पर्यटन केंद्र बन गया है। यहां से पीएचडी कर रहा छात्र पूरे समय प्रोफेसर और उनके घर वालों की चाकरी करता है। हम अपना दर्द किसको सुनाएं कैंपस में कोई आगे नहीं आता। - डॉ. शुभम तिवारी, बीएचयू।

इमरजेंसी पॉवर को कॉमन बना दिया गया। शैक्षणिक संस्थानों का सलाहकार मिलिट्री के लोगों को बनाया गया। जबकि इनकी शैक्षणिक योग्यता स्नातक होती है। छात्रसंघ न होने से विद्यार्थियों का प्रशासनिक और एकेडमिक शोषण बढ़ जाता है। - डॉ. मृत्युंजय तिवारी, बीएचयू।

विश्वविद्यालय एक बाजार हो गया है। बाजार में गुणवत्ता का ध्यान दिया जाता है, लेकिन यहां पर उसका भी इल्म नहीं है। सीयूईटी के बजाय बीएचयू खुद के सिस्टम से प्रवेश परीक्षाएं कराए। जिन कोर्सों की 50 फीसदी सीटों पर भी प्रवेश नहीं हो रहे, उन्हें बंद कर दिया जा रहा है। ये कोई समाधान नहीं है। - अभिषेक सिंह, शोध छात्र।

बीएचयू की बस में अक्सर छेड़खानी होती है। आंदोलन के दौरान प्रॉक्टोरियल बोर्ड के लोग छात्रों को भड़काते हैं, जिससे छात्र उग्र प्रदर्शन करते हैं और उन लोगों को मुकदमा चलाने और जबरन आंदोलन खत्म कराने का अवसर मिल जाता है। - वंदना उपाध्याय, एमए।

प्रवेश के बाद कुछ ही दिनों में मिड टर्म और फिर सेमेस्टर परीक्षाएं शुरू हो जाती हैं। सालाना परीक्षा के पुराने पैटर्न को लागू करना चाहिए। सेमेस्टर पैटर्न यूरोपीय देशों से आया है। इसे बंद कर देना चाहिए। - अभय सिंह, शोध छात्र।

कैंपस में हर नेत्रहीन छात्र अपनी जान को हथेली पर लेकर सड़क पर चलता है। कब कार टक्कर मारकर चली जाए पता नहीं। कहीं भी ब्रेल साइनेज नहीं है। जबकि हजारों की संख्या में छात्र होंगे। - राहुल, दृष्टिबाधित शोध छात्र।

बीएचयू में ढेरों स्कीम और स्कॉलरशिप बनाई गई है। लेकिन जानकारी न होने के चलते जरूरतमंद छात्रों को इनका फायदा नहीं मिलता। विदेशों में रिसर्च पेपर प्रस्तुत करने के लिए प्रोफेसर को डेढ़ लाख और छात्र को सिर्फ 50 हजार दिया जाता है। - सत्यवीर सिंह, शोध छात्र।

बीएचयू की सुरक्षा सिर्फ चार अधिकारियों तक ही केंद्रित हो गईं हैं। कुलपति, रेक्टर, रजिस्ट्रार और चीफ प्रॉक्टर। पीएचडी आवेदन में कृषि, कला और विज्ञान संकाय के छात्रों को अलग-अलग श्रेणी में रखा गया है। इससे छात्रों की एकता प्रभावित हो जाएगी। - अधोक्षज पांडेय, शोध छात्र, एसवीडीवी।

Amar Ujala Samvad Students said Professor busy committee meeting when he teach
अमर उजाला के संवाद कार्यक्रम में माैजूद छात्र-छात्राएं। - फोटो : अमर उजाला

नहीं शामिल हुआ विवि प्रशासन
अमर उजाला के इस संवाद में बीएचयू का अधिकारिक पक्ष रखने के लिए बीएचयू के अधिकारियों को भी मेल से आमंत्रण दिया गया था लेकिन कोई भी इस कार्यक्रम में नहीं पहुंचा।

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