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अमर उजाला संवाद: हम किस समाज का निर्माण कर रहे हैं... खुलेआम दी जा रही हैं गालियां; मानसिकता बदलने की है जरूरत

Sun, 25 Aug 2024 12:28 PM IST
अमन विश्वकर्मा अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: अमन विश्वकर्मा Updated Sun, 25 Aug 2024 12:28 PM IST
सार

Varanasi News: अमर उजाला की ओर से आयोजित संवाद कार्यक्रम में वाराणसी शहर के सम्मानित लोगों ने यहां की समस्याओं पर खुलकर अपने विचार रखे। साथ ही सुझाव को लेकर भी कई टिप्स दिए। महिलाओं ने मां-बहन की गालियों को लेकर नाराजगी जताई। इस मानसिकता को बदलने पर जोर दिया।

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Amar Ujala Samvad in varanasi society are we building need to change mentality
अमर उजाला कार्यालय में आयोजित संवाद कार्यक्रम में शामिल लोग। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हम किस समाज का निर्माण कर रहे हैं... और किससे शिकायत कर रहे हैं। जबकि यहां हर गली मोहल्ले में मां-बहन की गालियां धड़ल्ले से दी जा रही हैं। इस मानसिकता को बदलने की जरूरत है। यह बात अमर उजाला कार्यालय में समाज और शहर विषय पर आयोजित संवाद में श्रद्धा अग्रवाल ने कही।

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उन्होंने कहा कि यह बड़ा मुद्दा है और इस पर सभी को मुहिम चलाकर समाप्त कराना चाहिए। यदि ऐसा हुआ तो भी समाज की बड़ी जीत होगी। राकेश जैन ने कहा कि शहर में जाम इतनी बड़ी समस्या है कि व्यापारी वर्ग से लेकर हर तबका इसे प्रशासन और शासन के सामने बेहद गंभीरता से उठा चुका है मगर इस पर कोई काम नहीं हो रहा है।
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ऐसे में मेरा सुझाव यह है भाई इस शहर का नाम ही जामनगर रख दीजिए। फिर हम लोगों को जाम से कोई दिक्कत नहीं होगी। संवाद कार्यक्रम में जैन समाज, मारवाड़ी समाज, जायसवाल सभा, अग्रवाल सभा और सिंधी समाज के लोगों ने हिस्सा लिया।

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कार्यक्रम में इन लोगों ने रखे सुझाव
राकेश जैन, घनश्याम जैन, महेंद्र चौधरी, पवन कुमार अग्रवाल, कमलेश कुमार अग्रवाल, बृजेश जायसवाल, अजय जायसवाल, मनोज जायसवाल, हीरानंद, रवि जायसवाल, भानू जायसवाल, लोकेंद्र, नेहा, राजेश, कृष्ण कुमार, रश्मि, अनीता, पुष्पा, मंजू चौहान, अल्का, भारती समेत अन्य रहे।

शहर के मुद्दे और सुझाव

  • जाम इतनी बड़ी समस्या है कि इस शहर का नाम जामनगर रख दीजिए।
  • गड्ढे खोदकर छोड़ दे रहे हैं, सड़क बनने के बाद पानी की लाइन डाली जाती है, समन्वय से काम होना चाहिए।
  • गोदौलिया क्षेत्र में आम वाहन नहीं जा रहे मगर वीआईपी वाहन जा रहे, इस पर रोक लगे।
  • सभी चौराहों का चौड़ीकरण होना जरूरी है, खराब योजनाएं बनाने पर अफसरों की जबावदेही भी तय हो।
  • सड़क पर गलत साइड चलने वालों पर सख्ती से कार्रवाई हो।
  • अनियोजित तरीके से विकास हो रहा है, तभी दिक्कतें आ रही हैं।
  • जहां कोई प्रोजेक्ट लगे उससे पहले स्थानीय लोगों से बात कर व्यावहारिक दिक्कतों को समझा जाए।
  • तिलक, चंदन, दर्शन, पूजन के नाम पर तीर्थयात्रियों को लूटा जा रहा, इस पर रोक लगे।
  • रोडवेज बस अड्डों को भी शहर के बाहर स्थानांतरित करने पर विचार किया जाए।
  • बिजली इतनी जाती है कि फैक्टरी चलाना दूभर है, कोई समय ही नहीं आने-जाने का।
  • जी-20 सम्मेलन के नाम गुमटियां तोड़ दी गईं। सीएम के कहने बाद भी आज तक उन्हें स्थापित नहीं किया गया।
  • पुरानी काशी में ही फेरबदल न करें, नई काशी तैयार करें, शहर का विस्तार करें और व्यापारियों को काम का माहौल दें।
  • स्वास्थ्य विभाग ब्लड कैंप लगवाकर रक्त इकट्ठा करता है, मगर जरूरत पर कभी नहीं मिलता।

समाज के मुद्दे और सुझाव

  • स्कूलों में पढ़ाई के साथ नैतिक शिक्षा की भी बात हो ताकि हम समाज को बेहतर मनुष्य दे सकें।
  • बच्चों की पढ़ाई बहुत महंगी है, स्कूलों में फीस तय करने में मनमानी हो रही है, इसकी मॉनीटिरिंग जरूरी।
  • समाज में मां-बहन की गालियां खुलेआम दी जाती है, यह ठीक नहीं, इस पर हमें खुद नियंत्रण बनाना होगा।
  • काशी विश्वनाथ में दर्शन के समय कई बार प्रशासन के लोगों के द्वारा महिलाओं के साथ अच्छा व्यवहार नहीं किया जाता है।
  • घरों में काम करने वाली महिलाओं के पति उनके साथ मारपीट करते हैं और रुपये छीन लेते हैं, इस पर कानून बने और सुधार की दिशा में काम हो
  • सोशल मीडिया से कुछ एक घंटे हटकर माता-पिता सप्ताह में एक दिन बच्चों को दें उन्हें अच्छा बुरा बताएं।
  • सिर्फ लड़कों को ही मर्यादा की सीख न दें, लड़कियों को भी सिखाएं, अंकुश दोनों पर जरूरी है।
  • डीजे की तेज आवाज से शहर का हर वर्ग परेशान होता है, डीजे की आवाज का मानक तय हो और उसका पालन भी।
  • जनसंख्या नियंत्रण के बारे में गंभीरता से हर व्यक्ति सोचे।
  • विकास के नाम पर सिर्फ पेड़ काटे जा रहे हैं, लगाए नहीं जा रहे, इस पर ध्यान देने की जरूरत है सरकार को।
  • स्वच्छता बनाए रखने के लिए खुद आगे आना होगा, चलती गाड़ी से खाली बोतल फेंकना, पान थूकना ही बंद करिए।
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