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विंध्यवासिनी मंदिर में अमर सिंह व जया प्रदा ने किया दर्शन पूजन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मिर्जापुर
Updated Sun, 25 Mar 2018 10:40 AM IST
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अमर सिंह और जयाप्रदा पूजन करते हुए
- फोटो : अमर उजाला
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मां विंध्यवासिनी की नगरी में चल रहे वासंतिक नवरात्र के सातवें दिन अमर सिंह व जया प्रदा ने मां के सप्तम स्वरूप कालरात्रि के दर्शन के लिए पहुंचे। उनके साथ पूर्व प्रधानमंत्री गुलजारी लाल नंदा की पुत्री भी थीं।
चैत नवरात्रि की सप्तमी तिथि पर शनिवार की दोपहर एक बजे सपा के पूर्व महासचिव व राज्यसभा सांसद अमर सिंह एवं पूर्व राज्य सभा सांसद व फिल्म अभिनेत्री जया प्रदा ने दर्शन पूजन किया।
वहीं पूर्व प्रधानमंत्री गुलजारी लाल नंदा की पुत्री ने भी अमर सिंह फैन्स एसोसिएशन के परिसर में पालकी में बैठकर माता का दर्शन किया। तीर्थ पुरोहित पंडा समाज के अध्यक्ष राजन पाठक ने उन्हें दर्शन पूजन कराया।
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इसके बाद मोती झील मार्ग स्थित अमर सिंह फैंस एसोसिएशन में चल रहे भंडारे का शुभारंभ किया। अमर सिंह, जया प्रदा बाबतपुर से एयर पोर्ट से सड़क मार्ग से पहुंची थीं।
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चैत नवरात्रि की सप्तमी तिथि पर शनिवार की दोपहर एक बजे सपा के पूर्व महासचिव व राज्यसभा सांसद अमर सिंह एवं पूर्व राज्य सभा सांसद व फिल्म अभिनेत्री जया प्रदा ने दर्शन पूजन किया।
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वहीं पूर्व प्रधानमंत्री गुलजारी लाल नंदा की पुत्री ने भी अमर सिंह फैन्स एसोसिएशन के परिसर में पालकी में बैठकर माता का दर्शन किया। तीर्थ पुरोहित पंडा समाज के अध्यक्ष राजन पाठक ने उन्हें दर्शन पूजन कराया।
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इसके बाद मोती झील मार्ग स्थित अमर सिंह फैंस एसोसिएशन में चल रहे भंडारे का शुभारंभ किया। अमर सिंह, जया प्रदा बाबतपुर से एयर पोर्ट से सड़क मार्ग से पहुंची थीं।
कालरात्रि स्वरूप के दर्शन को उमड़े श्रद्धालु
दर्शन के लिए कतार में लगे श्रद्धालु
- फोटो : अमर उजाला
नवरात्र के सातवें दिन शनिवार को भक्तों ने मां के सप्तम स्वरूप कालरात्रि के दर्शन किए। सुबह से ही धाम में भक्तों की भीड़ उमड़ी रही। विंध्य पंडा समाज की मानें तो करीब चार लाख भक्तों ने मां विंध्यवासिनी का दर्शन पूजन कर सुख समृद्धि की कामना की।
श्रद्धालुओं ने झांकी, गर्भगृह से दर्शन करने के बाद मंदिर की छत पर जाकर पताका का दर्शन किया। इस दौरान मन्नतें मांगी। दर्शन को जाने से पूर्व भक्त धाम की सीढ़ियों पर सिर झुका कर मंगल कामना की। इसके अलावा मंदिर परिसर में विराजमान अन्य देवी देवताओं का भी दर्शन पूजन किया।
इसके अलावा त्रिकोण परिक्रमा कर मां काली, मां अष्टभुजा एवं मां तारा देवी की पूजा की। मंगला आरती के पूर्व विन्ध्याचल के समस्त गंगा घाटों पर स्नान करने वाले भक्तों की भीड़ लगी थी। भक्त बैरिकेडिंग के अंदर ही गंगा स्नान कर दर्शन को निकले।
मंदिर की छत पर शहनाई व नगाड़े की धुन पर मुंडन संस्कार होते रहे। वहीं नौ दिनों का व्रत करने वाले भक्त दुर्गा सप्तशती और दुर्गा चालीसा पाठ किया। इसके अलावा भक्त माता के पताका का दर्शन कर मंदिर का परिक्रमा की।
धाम की समस्त गलियां भक्तों से पटी रहीं तथा माता के जयकारा से वातावरण गूंजता रहा। हाथों में नारियल, चुनरी, माला-फूल व प्रसाद लिए व सर पे जय माता दी की लाल पट्टी लपेटे भक्त दर्शन को आगे बढ़ते रहे।
श्रद्धालुओं ने झांकी, गर्भगृह से दर्शन करने के बाद मंदिर की छत पर जाकर पताका का दर्शन किया। इस दौरान मन्नतें मांगी। दर्शन को जाने से पूर्व भक्त धाम की सीढ़ियों पर सिर झुका कर मंगल कामना की। इसके अलावा मंदिर परिसर में विराजमान अन्य देवी देवताओं का भी दर्शन पूजन किया।
इसके अलावा त्रिकोण परिक्रमा कर मां काली, मां अष्टभुजा एवं मां तारा देवी की पूजा की। मंगला आरती के पूर्व विन्ध्याचल के समस्त गंगा घाटों पर स्नान करने वाले भक्तों की भीड़ लगी थी। भक्त बैरिकेडिंग के अंदर ही गंगा स्नान कर दर्शन को निकले।
मंदिर की छत पर शहनाई व नगाड़े की धुन पर मुंडन संस्कार होते रहे। वहीं नौ दिनों का व्रत करने वाले भक्त दुर्गा सप्तशती और दुर्गा चालीसा पाठ किया। इसके अलावा भक्त माता के पताका का दर्शन कर मंदिर का परिक्रमा की।
धाम की समस्त गलियां भक्तों से पटी रहीं तथा माता के जयकारा से वातावरण गूंजता रहा। हाथों में नारियल, चुनरी, माला-फूल व प्रसाद लिए व सर पे जय माता दी की लाल पट्टी लपेटे भक्त दर्शन को आगे बढ़ते रहे।