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आवासीय योजना: पैसे लेकर भूल गया वाराणसी विकास प्राधिकरण, आवंटन के लिए फरियादी लगा रहे चक्कर

Sat, 02 Apr 2022 10:05 AM IST
वाराणसी ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: वाराणसी ब्यूरो Updated Sat, 02 Apr 2022 10:05 AM IST
सार

वाराणसी विकास प्राधिकरण (वीडीए)  की ओर से लंबे समय से कोई आवासीय योजना लांच तो नहीं की गई। मगर, पुराने भूखंड और संपत्तियों की ई नीलामी में विभागीय कुप्रबंधन अब लोगों के लिए मुसीबत बन गया है।

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Allottees are facing the brunt of negligence in the allocation of housing scheme
वाराणसी विकास प्राधिकरण - फोटो : सोशल मीडिया।

विस्तार

निजी बिल्डरों की धोखाधड़ी के किस्से तो बनारस में आम है, मगर अब वाराणसी विकास प्राधिकरण (वीडीए) के अधिकारियों की करतूत भी सरकारी योजनाओं से लोगों का विश्वास कम कर रही है। शहर के कई लोग ऐसे ही वीडीए की योजनाओं के लालच में फंसे हैं और दफ़्तर के चक्कर काट रहे हैं।

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आलम यह है अपना लाखों रुपये देने और वर्षों चक्कर काटने के बाद भी इन्हें कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिल रहा है। दरअसल, वीडीए की ओर से लंबे समय से कोई आवासीय योजना लांच तो नहीं की गई।
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मगर, पुराने भूखंड और संपत्तियों की ई नीलामी में विभागीय कुप्रबंधन अब लोगों के लिए मुसीबत बन गया है। यही कारण है कि इसे एक बार ई नीलामी में लेने के बाद इससे मुकरना भी वीडीए के बाबुओं के जाल में फंसना है।

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संपत्ति विभाग में खुलेआम मनमानी

वीडीए के संपत्ति विभाग में बाबुओं की मनमानी पर किसी का अंकुश नहीं है। यहां एक लिपिक ऐसा भी है जो किसी भी आवेदक से दावा करता है कि जिस फाइल पर लाल निशान लगा दिया उसे शासन भी पास नहीं कर सकता।

यही कारण है कि इस पूरे विभाग में पीड़ितों को सुनने वाला कोई नहीं है। किसी भी व्यक्ति को किसी तरह की शिकायत हो तो सीधे मुझसे संपर्क कर सकता है। पीड़ितों के मामलों की जांच कराई जाएगी और उसमें नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।-ईशा दुहन, वीडीए वीसी

केस-1
सिगरा निवासी डॉ. मुकेश राय ने वर्ष 2009 में वाराणसी विकास प्राधिकरण के हबीबपुरा आवासीय योजना में प्लाट नंबर 12 को बोली के जरिए खरीदा और 15.90 लाख रुपये बैंक लोन के जरिए जमा किया। 13 वर्ष से लगातार वे वीडीए से अपने प्लाट पर कब्जा दिलाने के लिए आवेदन कर रहे हैं, मगर अधिकारी हर बार उन्हें आश्वासन देकर लौटा रहे हैं। डॉ. मुकेश का कहना है कि बैंक लोन लेकर एक अदद घर बनाने का सपना संजोया था, मगर वीडीए अफसरों की लापरवाही के चलते 13 साल बाद भी खाली हाथ हैं।

केस-2
धौकलगंज निवासी नीलम जायसवाल ने वीडीए के ई आक्शन की सूचना पर उन्होंने ले आउट के लिए कार्यालय में संपर्क किया। छह सितंबर 2021 को ई नीलामी में उन्होंने बड़ालालपुर में ई 28 प्लाट पर बोली लगाई और उन्हें यह आवंटित हो गया। उन्होंने छह लाख 20 हजार 100 रुपये जमा कर दिया। नक्शा देखा तो पता लगा कि यह भूखंड त्रिमुखाकार है और हाईटेंशन लाइन गुजरी है। इसके बाद नीलम ने प्लाट न लेकर अग्रिम धनराशि वापस मांगी। मगर, छह महीने बीत जाने के बाद अब तक वीडीए की ओर से कोई जवाब नहीं मिला है।

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