मुंशी प्रेमचंद का गांव ‘अक्षर’ से बनेगा साक्षर, 13 साल के शिक्षक बुजुर्ग महिलाओं को सिखाएंगे क-ख-ग
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'पढ़ेगा इंडिया तभी तो बढ़ेगा इंडिया' इन पंक्तियों को अब मुंशी प्रेमचंद के गांव की बुजुर्ग महिलाएं सार्थक कर रहीं हैं। विश्व साक्षरता दिवस पर रविवार को लमही में बुजुर्गों को साक्षर बनाने की पहल हुई है। विशाल भारत संस्थान लमही की बुजुर्ग महिलाओं को अक्षर का पाठ पढ़ाएगी।
लमही स्थित सुभाष भवन में अक्षर स्कूल का उद्घाटन हुआ। खास बात यह है कि इस स्कूल का संचालन पांच से 13 साल के बच्चे करेंगे। साथ ही जो महिलाएं स्कूल आने में सक्षम नहीं हैं, उन्हें घर तक जाकर साक्षर बनाएंगे। अक्षर स्कूल में इन महिलाओं के लिए क्रैश कोर्स चलाकर हस्ताक्षर करने और मोबाइल चलाने का भी प्रशिक्षण दिया जाएगा।
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13 वर्षीय शालिनी भारतवंशी प्रधानाध्यापिका एवं सात वर्षीय दक्षिता भारतवंशी उप प्रधानाध्यापिका बनाई गईं हैं। स्कूल के पहले दिन 21 बुजुर्गों ने प्रवेश लिया, जिसमें बिटुना दादी और नगीना खातून ने सबसे पहले प्रवेश लिया।
अक्षर स्कूल के संस्थापक डॉ राजीव श्रीवास्तव ने कहा कि दुनिया में साहित्य के लिए जाना जाने वाला लमही गांव अभी भी निरक्षता से जूझ रहा है, लेकिन अब अक्षर स्कूल 24 यहां के लोगों को साक्षर बनाएगा। इस दौरान अर्चना भारतवंशी, नजमा परवीन, डॉ. मृदुला जायसवाल, नाजनीन अंसारी, सुनीता श्रीवास्तव, खुशी, इली, दक्षिता, उजाला आदि मौजूद रहे।
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बाल संसद में बच्चों ने रखे विचार :
विश्व साक्षरता दिवस पर रविवार को खोजवां स्थित साक्षर इंडिया फाउंडेशन में बाल संसद का आयोजन किया गया। जिसमें ‘भारत में साक्षरता की वर्तमान स्थिति’ विषय पर बच्चों ने अपने विचार रखे। कार्यक्रम की मुख्य अतिथि राज्य महिला आयोग की सदस्य मीना चौबे व विशिष्ट अतिथि राष्ट्रीय दिव्यांग आयोग के सलाहकार समिति के सदस्य डॉ. उत्तम ओझा रहे। इस दौरान डॉ. सुनील मिश्र, डॉ. स्वाति एस मिश्र, सुशील गुप्ता, अनूप जायसवाल, रमेश वर्मा, शिवा प्रजापति, पिंटू शेख आदि मौजूद रहे।