बिस्मिल्लाह खां के आवास के विवाद में अखिलेश यादव का प्रदेश सरकार पर कटाक्ष, कहा-स्मारक के रूप में हो संरक्षण
पूर्व मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भारत रत्न उस्ताद बिस्मिल्लाह खां के आवास के विवाद में प्रदेश सरकार पर कटाक्ष किया। उन्होंने ट्वीट करते हुए कहा है कि भारत रत्न उस्ताद बिस्मिल्लाह खां ने जहां पूजा की तरह रियाज की, उस स्थान को भूपतियों के हाथों में जाने से बचाकर, उसे सरकार द्वारा एक स्मारक के रूप में संरक्षित करना चाहिए। जो लोग सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण नहीं करते, उन्हें इतिहास ही नहीं, वर्तमान भी शीघ्र भुला देता है।
कमरे को तोड़ना बहुत ही गलत
उस्ताद की दत्तक पुत्री पद्मश्री सोमा घोष ने बताया कि उस्ताद ने इसी कमरे में अपनी संगीत की तपस्या की थी और अमेरिका के राष्ट्रपति रोनाल्ड रीगन का अमेरिका बसने का निमंत्रण सिर्फ एक कमरे में रखी चारपाई पर आने वाली सुकून की नींद के लिए ठुकराया था। उस कमरे को तोड़ना कहीं से सही नहीं है।
इस धरोहर के आसपास के हिस्से को हम रेनोवेट करवा सकते हैं, पर उस कमरे को तोड़ना बहुत ही गलत है। विश्वमोहन भट्ट, रोनू मजूमदार का कहना है कि उस्ताद के रियाज का कमरा हमारे देश की धरोहर है। स्थानीय प्रशासन को इस ओर ध्यान देना चाहिए।
छह साल की उम्र में उस्ताद आए थे बनारस
उस्ताद के सबसे छोटे बेटे नाजिम हुसैन ने बताया कि बिस्मिल्लाह खान के परदादा हुसैन बख्श खान, दादा रसूल बख्श, चाचा गाजी बख्श खान और पिता पैगंबर बख्श खान भोजपुर और डुमरांव रियासतों के लिए शहनाई वादन करते थे। 21 मार्च 1916 को डुमरांव में जन्मे उस्ताद मात्र छह वर्ष की अवस्था में अपने पिता के साथ बनारस आए थे।
पहले कुछ साल उन्होंने अपने मामा अली बख्श विलायती के घर में बिताए। विलायती काशी विश्वनाथ मंदिर के नौबतखाने में शहनाई वादन करते थे। अपने मामा से शहनाई का ककहरा सीखने के कुछ सालों बाद उस्ताद अपने परिजनों के साथ रहने बेनियाबाग वाले मकान में आए। 21 अगस्त 2006 को इसी कमरे में उन्होंने अंतिम सांस भी ली।