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सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने लिया बड़ा फैसला, लोकसभा चुनाव में इन लोगों को ही मिलेगा टिकट
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गाजीपुर
Updated Sat, 17 Feb 2018 04:44 PM IST
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अखिलेश यादव
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सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने आगामी लोकसभा चुनाव में टिकट वितरण को लेकर संकेत दे दिए हैं। अखिलेश यादव ने कहा कि लोकसभा चुनाव के लिए एक ही सीट पर कई उम्मीदवार सामने आते हैं लेकिन पार्टी उन्हीं लोगों को मौका देगी जो जीतने की स्थिति में होंगे।
उन्होंने साफ कर दिया कि हर सीट पर कई साथियों ने टिकट के लिए आवेदन दिया है लेकिन पार्टी जिताऊ चेहरे को ही मौका देगी। पहले लोकसभा के लिए गोरखपुर तथा फूलपुर सीट के उप चुनाव को लेकर सपा का नहीं भाजपा की प्रतिष्ठा दांव पर लगी है। सपा दोनों सीटों पर अपना पूरा दमखम दिखाएगी।
अखिलेश यादव शुक्रवार को पूर्व मंत्री और कद्दावर नेता ओमप्रकाश सिंह के पिता की त्रयोदशाह में गाजीपुर आए थे। मुलायम सिंह यादव और अखिलेश के बीच चली राजनीतिक उठा-पटक के बाद यह पहला अवसर था जब अखिलेश यादव ओमप्रकाश सिंह के गांव पहुंचे थे। ओमप्रकाश सिंह के पिता की त्रयोदशाह का अवसर भले ही था लेकिन अखिलेश की इस यात्रा ने यह साफ कर दिया वह और मुलायम सिंह एक हैं।
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उन्होंने साफ कर दिया कि हर सीट पर कई साथियों ने टिकट के लिए आवेदन दिया है लेकिन पार्टी जिताऊ चेहरे को ही मौका देगी। पहले लोकसभा के लिए गोरखपुर तथा फूलपुर सीट के उप चुनाव को लेकर सपा का नहीं भाजपा की प्रतिष्ठा दांव पर लगी है। सपा दोनों सीटों पर अपना पूरा दमखम दिखाएगी।
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अखिलेश यादव शुक्रवार को पूर्व मंत्री और कद्दावर नेता ओमप्रकाश सिंह के पिता की त्रयोदशाह में गाजीपुर आए थे। मुलायम सिंह यादव और अखिलेश के बीच चली राजनीतिक उठा-पटक के बाद यह पहला अवसर था जब अखिलेश यादव ओमप्रकाश सिंह के गांव पहुंचे थे। ओमप्रकाश सिंह के पिता की त्रयोदशाह का अवसर भले ही था लेकिन अखिलेश की इस यात्रा ने यह साफ कर दिया वह और मुलायम सिंह एक हैं।
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समाजवादी पार्टी
मुलायम सिंह यादव और अखिलेश यादव के प्रबल समर्थक एक-दूसरे के खिलाफ जितना भी जोर लगाएं। लोग वह दौर भूले नहीं हैं जब पूर्वांचल के कद्दावर सपाई तत्कालीन सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव के पाले में खड़े थे और अखिलेश यादव की राजनीति को उखाड़ फेंकने का पुरजोर प्रयास कर रहे थे।
चाहे वह पूर्व मंत्री अंबिका चौधरी हो, नारद राय अथवा पूर्व मंत्री ओमप्रकाश सिंह सभी अखिलेश के राजनीतिक वट वृक्ष को उखाड़ फेंकने के लिए पूरा दमखम लगाए हुए थे। उस समय रामगोविंद चौधरी, पूर्व सांसद राधेमोहन सिंह, विधायक सुभाष पासी, विरेंद्र यादव सहित चंद नेता अखिलेश के पक्ष में खड़े थे।
समझौते के बाद ओमप्रकाश सिंह को टिकट जरूर मिला, लेकिन तब भी तल्खी इतनी थी कि अखिलेश यहां चुनावी सभा तक करने नहीं आए थे। मुलायम सिंह यादव की सभा के दम पर ओमप्रकाश ने चुनाव लड़ा और वह चुनाव हार गए।
मुलायम सिंह यादव के काफी करीबी माने जाने वाले ओम प्रकाश सिंह के पिता की त्रयोदशाह में मुलायम सिंह का न आना और अखिलेश सिंह का आना यहां के राजनीतिक गलियारे में नई चर्चा को जन्म दे गया है।
चाहे वह पूर्व मंत्री अंबिका चौधरी हो, नारद राय अथवा पूर्व मंत्री ओमप्रकाश सिंह सभी अखिलेश के राजनीतिक वट वृक्ष को उखाड़ फेंकने के लिए पूरा दमखम लगाए हुए थे। उस समय रामगोविंद चौधरी, पूर्व सांसद राधेमोहन सिंह, विधायक सुभाष पासी, विरेंद्र यादव सहित चंद नेता अखिलेश के पक्ष में खड़े थे।
समझौते के बाद ओमप्रकाश सिंह को टिकट जरूर मिला, लेकिन तब भी तल्खी इतनी थी कि अखिलेश यहां चुनावी सभा तक करने नहीं आए थे। मुलायम सिंह यादव की सभा के दम पर ओमप्रकाश ने चुनाव लड़ा और वह चुनाव हार गए।
मुलायम सिंह यादव के काफी करीबी माने जाने वाले ओम प्रकाश सिंह के पिता की त्रयोदशाह में मुलायम सिंह का न आना और अखिलेश सिंह का आना यहां के राजनीतिक गलियारे में नई चर्चा को जन्म दे गया है।