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ट्रांसपोर्टर की हत्या के मुख्य आरोपी अखंड प्रताप सिंह ने कोर्ट में सरेंडर किया, 36 मुकदमे हैं दर्ज

Thu, 12 Dec 2019 09:34 PM IST
गीतार्जुन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आजमगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आजमगढ़ Published by: गीतार्जुन गौतम Updated Thu, 12 Dec 2019 09:34 PM IST
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Akhand Pratap Singh surrendered in azamgarh court accused murder of varanasi transporter
अखंड प्रताप सिंह ने किया सरेंडर। - फोटो : अमर उजाला।

वाराणसी के मशहूर ट्रांसपोर्टर रहे धनराज यादव की हत्या के मामले में बीते छह साल से फरार गैंगस्टर तरवां ब्लाक के पूर्व प्रमुख अखंड प्रताप सिंह ने गैंगेस्टर कोर्ट आजमगढ़ में सरेंडर कर दिया। एडीजी वाराणसी ने अखंड प्रताप पर एक लाख रुपये का इनाम घोषित किया था।

Akhand Pratap Singh surrendered in azamgarh court accused murder of varanasi transporter

अखंड प्रताप पर 36 से ज्यादा हत्या, हत्या के प्रयास, लूट, रंगदारी जैसे संगीन मुकदमे दर्ज हैं। साथ ही वह 2017 में आजमगढ़ के अतरौलिया विधानसभा से बसपा से प्रत्याशी रह चुके हैं।

Akhand Pratap Singh surrendered in azamgarh court accused murder of varanasi transporter

अखंड प्रताप सिंह पुत्र साहब सिंह तरवां थाने के जमुवां गांव का निवासी है। 11 मई 2013 को तरवां थाना क्षेत्र के रहने वाले और वाराणसी के मशहूर ट्रांसपोर्टर धनराज यादव की ताबड़तोड़ गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस घटना का अखंड प्रताप सिंह को मुख्य आरोपी बनाया गया। घटना के बाद से ही वह फरार चल रहा था।

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Akhand Pratap Singh surrendered in azamgarh court accused murder of varanasi transporter

अखंड अपने मजबूत राजनीतिक पकड़ के चलते पुलिस की आंख में धुल झोंकते हुए लगातार कानून-व्यवस्था से खिलवाड़ कर रहा था। साल 2017 में हुए विधानसभा चुनाव में अखंड प्रताप सिंह पैरोल पर जेल से रिहा होकर बहुजन समाज पार्टी के बैनर तले अतरौलिया विधान सभा क्षेत्र से चुनाव भी लड़ा, हालांकि वह चुनाव हार गया। तभी से अखंड फरार चल था।

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Akhand Pratap Singh surrendered in azamgarh court accused murder of varanasi transporter

कोर्ट के आदेश पर पुलिस ने उसके घर हाजिर होने के लिए नोटिस चस्पा करते हुए डुगडुगी पिटवा चुकी थी। एसपी त्रिवेणी सिंह ने बताया था कि अखंड प्रताप सिंह के ऊपर एडीजी वाराणसी जोन की तरफ से एक लाख रुपये का ईनाम घोषित किया गया। उसके विषय में सूचना देकर पकड़वाने वाले को ईनाम की राशि दी जाएगी। सूचना देने वाले का नाम और पता गुप्त रखा जाएगा।

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