Gyanvapi Case: ज्ञानवापी केस के पैरोकार को पाकिस्तान से आई धमकी भरी कॉल, बोले- कोई फर्क नहीं पड़ता
पाकिस्तान से आए धमकी भरे कॉल के बाद ज्ञानवापी केस के पैरोकार ने कहा कि हिंदुत्व और मंदिर की रक्षा के लिए अगर प्राण भी चला जाए तो कोई फर्क नहीं पड़ता है।
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ज्ञानवापी केस के पैरोकार डॉ. सोहनलाल आर्य को बुधवार को पाकिस्तान से धमकी भरा फोन आया। इसमें उन्हें जान से मारने की धमकी दी गई है। डॉ. सोहनलाल ने इसकी जानकारी पुलिस और प्रशासन के आला अफसरों को दी है। उधर शाम को मामले में लक्सा थाने में अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया है।
ज्ञानवापी केस के पैरोकार डॉ. सोहनलाल को इसके पहले दो बार और जान से मारने की धमकी मिल चुकी है। डॉ. सोहनलाल ने कहा कि हिंदुत्व और मंदिर की रक्षा के लिए अगर जान भी चली जाए तो कोई फर्क नहीं पड़ता है। पुलिस प्रशासन की ओर से उनकी सुरक्षा में दो पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं।
पहले भी मिल चुकी है धमकी
बताया कि उन्होंने कमिश्नर और जिलाधिकारी से मिलने का समय मांगा है और लक्सा थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई है। पुलिस आयुक्त को लिखे पत्र में डॉ. सोहनलाल ने यह बताया है कि इसके पहले भी इसी मामले को लेकर 19 और 20 जुलाई को पाकिस्तान से ही धमकी मिल चुकी है। इसकी शिकायत पुलिस अधिकारियों से पहले ही की जा चुकी है।
धमकी भरे कॉल के माध्यम से उन पर मुकदमा वापस लेने का दबाव बनाया जाता है। यह भी बताया है कि मां शृंगार गौरी के नियमित दर्शन को लेकर याचिका दाखिल करने वाली महिलाओं में उनकी पत्नी लक्ष्मी देवी भी वादी है और डॉ. सोहनलाल इस मामले में पैरोकार हैं। इस पूरे मामले में डीसीपी काशी आरएस गौतम ने बताया कि मुकदमा दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी गई है।
ज्ञानवापी मामले में पांच सितंबर को होगी सुनवाई
ज्ञानवापी मामले में सिविल जज फास्ट ट्रैक कोर्ट महेंद्र कुमार पांडेय की अदालत में अब पांच सितंबर को सुनवाई होगी। अदालत में विश्व वैदिक सनातन संघ के अध्यक्ष जितेंद्र सिंह विसेन की पत्नी किरन सिंह के अधिवक्ता मानबहादुर सिंह ने वाद दाखिल कर ज्ञानवापी परिसर में मुस्लिमों के प्रवेश पर रोक, सर्वे में मिले कथित शिवलिंग की पूजा पाठ के साथ परिसर हिंदुओं को सौंपे जाने की मांग की है।
इसके अलावा तब तक अदालत से यह अंतरिम निषेधाज्ञा आदेश दिए जाने का अनुरोध किया गया कि आदि विश्वेश्वर की पूजा पाठ करने में अंजुमन इंतजामिया और अन्य विपक्षियों को व्यवधान डालने से रोका जाए। इसी पर आपत्ति देने के लिए कोर्ट से अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमेटी ने समय देने की मांग की।
इसी के साथ अंजुमन ने वादिनी की तरफ से ज्ञानवापी को लेकर दाखिल नक्शे और मस्जिद गिराने के साक्ष्य के तौर पर औरंगजेब के आदेश संबंधी पर्यटन विभाग के बुकलेट पर भी आपत्ति दाखिल पहले ही की है। इन आवेदनों का निस्तारण अभी होना ही है। इस बीच वाद पोषणीय है या नहीं इस मुद्दे पर सुनवाई के लिए अंजुमन ने आवेदन दिया है, जिस पर पांच सितंबर को सुनवाई होनी है।