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मिलावट कुरान में नहीं, शरिया में : इंद्रेश कुमार

Mon, 21 Feb 2022 11:44 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Mon, 21 Feb 2022 11:44 PM IST
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Adulteration is not in Quran, it is in Sharia: Indresh Kumar
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय कार्यकारिणी सदस्य इंद्रेश कुमार ने कहा कि हर मुल्क का अपना कायदा-कानून होता है। इसलिए अच्छे नागरिक बनें। हम सभी भारतीय हैं। मिलावट कुरान में नहीं है, मिलावट शरिया में है। इसलिए इस्लाम के प्रति ईमानदार बनें। हर क्षेत्र का अलग-अलग ड्रेस कोड है। वतन का ईमानवाला बनकर जीना चाहिए और जरूरत पड़े तो कुर्बानी भी करनी चाहिए।
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सोमवार को मुस्लिम महिला फाउंडेशन की ओर से लमही स्थित सुभाष भवन में द्वितीय मुस्लिम महिला अधिवेशन को संबोधित करते हुए इंद्रेश कुमार ने कहा कि अच्छे नागरिक, ईमान वाले और अच्छे मुसलमनान बनना चाहिए। सामाजिक कार्यकर्ता नजमा परवीन ने कहा कि हमें कट्टरपंथी मौलानाओं के बहकावे में न आकर रसूल के रास्ते पर चलना है। हिजाब के चक्कर मे फंसाकर मौलाना मुस्लिम बेटियों को घर में बंद करना चाहते हैं। मुस्लिम महिलाओं को आज तक धर्म का हवाला देकर तालीम से दूर रखा गया। मुस्लिम महिलाएं दुनियां की सबसे अधिक अधिकार विहीन महिलाएं हैं। हमें हिजाब नहीं, किताब चाहिए। जो न पढ़ सकी, वो अपनी बेटियों को जरूर पढ़ाएं और आगे बढ़ाएं।
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परवीन ने बताया कि पहले अधिवेशन 2013 में पराड़कर भवन में हुआ था, इसमें तीन तलाक के खिलाफ आंदोलन पूरे देश में गया और संसद से कानून पारित हुआ। इंद्रेश कुमार ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस की प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं दीप जलाकर अधिवेशन का शुभारंभ किया। मौके पर मदीना, शाहजहां, नसीबुन्निशा, सायरा, मजीदून, रेहाना, जमीलून, रजिया, तबस्सुम, नूरजहां, शकीला, रेशमा, जीनत आदि मुस्लिम महिलाएं उपस्थित रहीं।
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अधिवेशन में मुस्लिम महिलाओं ने जारी की अपील
- मानवता और महिलाओं पर क्रूर अत्याचार जैसी गैर इस्लामिक हलाला कुप्रथा को तुरंत समाप्त किया जाए।
- मुस्लिम मर्दों द्वारा बहुविवाह करना जिसके कारण औरतों की जिंदगी दरबदर होती है और बच्चों का भविष्य बर्बाद होता है। इसलिए इस पर प्रतिबंध लगे।
- मुसलमानों को गरीबी, बेरोजगारी, अशिक्षा, पिछड़ेपन, अपराध आदि से मुक्त कराने के लिए परिवार नियोजन अपनाना चाहिए।
-सभी धर्मों में धार्मिक स्थल पर ईश्वर की पूजा करने का अपने तरीके से अधिकार है। मस्जिदों में भी महिला को नमाज पढ़ने का अधिकार मिले।
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