{"_id":"60cbac0c8ebc3e356970f047","slug":"adoption-of-health-centers-is-not-mentioned-in-mla-fund-rules-made-varanasi-news-vns595407518","type":"story","status":"publish","title_hn":"स्वास्थ्य केंद्रों को गोद लेने का जिक्र विधायक निधि में नहीं, बने नियम","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
स्वास्थ्य केंद्रों को गोद लेने का जिक्र विधायक निधि में नहीं, बने नियम
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
प्राथमिक और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों को जनप्रतिनिधियों द्वारा गोद लेने के मुख्यमंत्री के फैसले पर समाजवादी पार्टी (सपा) के एमएलसी शतरुद्र प्रकाश ने सवाल उठाए हैं। अपने बयान में उन्होंने मुख्यमंत्री से इसके लिए नियम बनाने की मांग की है।
सपा एमएलसी ने बताया कि मुख्य विकास अधिकारी ने 14 जून को एक पत्र के माध्यम से सभी जनप्रतिनिधियों से स्वास्थ्य केंद्रों को गोद लेने के सीएम के फैसले की जानकारी मुझे दी। किसी भी सीएचसी, पीएचसी को गोद लेने का जिक्र विधायक निधि में भी नहीं है ऐसे में मुख्यमंत्री चाहे तो उसका नियम भी बना सकते हैं। अच्छा होता कि मुख्यमंत्री जनप्रतिनिधियों से संवाद करते न कि अफसरों के जरिए सूचना मिलती। उन्होंने बताया कि शुक्रवार को सीएचसी हाथी बाजार को गोद लेने का शिलान्यास करने मुख्यमंत्री यहां आ रहे हैं। अधिकांश पीएचसी और स्वास्थ्य उप केंद्रों पर पैरामेडिकल स्टाफ, डॉक्टर नहीं है और भवन भी जर्जर है जबकि मुख्यमंत्री ने खुद भी इसकी उपलब्धता की घोषणा की थी।
उन्होंने बताया कि काशी विद्यापीठ ब्लाक में भी रमना पीएचसी को भी 1991 में उन्होंने ही शुरू कराया। लेकिन यहां डॉक्टर, पैरामेडिकल स्टाफ, बेड नहीं है। स्वास्थ्य केंद्र बच्छाव में ताला बंद है, जिसे शुरू कराने के लिए 7 जून को डीएम को पत्र लिखकर धनराशि देने की इच्छा जाहिर की है, लेकिन कुछ नहीं हुआ है।
विज्ञापन
सीएचसी मिसिरपुर पर जेनरेटर खरीदारी में भी गड़बड़ी का आरोप
एमएलसी ने बताया कि 1991 में उन्होंने खुद मिसिरपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र को का निर्माण शुरू कराया और 30 सालों बाद 25.41 लाख की धनराशि से उसकी चहारदीवारी बनवाने का कार्य 8 जून को आरंभ हो गया। 28 मई 2021 को 62.5 केवीए का यहां जनरेटर लगाने का प्रस्ताव सीएमओ ऑफिस को दिया था जिसके लिए एक कम्पनी का जेम पोर्टल पर दाम 9 लाख 6हजार 500 जबकि अन्य कंपनी का दाम 9 लाख से अधिक है। जब उन्होंने खुद कंपनी से कोटेशन मांगा तो दोनों कंपनी ने दाम 5.50 लाख बताया। इस प्रक्रिया में भी गड़बड़ी का आरोप लगाया है।
विज्ञापन
सपा एमएलसी ने बताया कि मुख्य विकास अधिकारी ने 14 जून को एक पत्र के माध्यम से सभी जनप्रतिनिधियों से स्वास्थ्य केंद्रों को गोद लेने के सीएम के फैसले की जानकारी मुझे दी। किसी भी सीएचसी, पीएचसी को गोद लेने का जिक्र विधायक निधि में भी नहीं है ऐसे में मुख्यमंत्री चाहे तो उसका नियम भी बना सकते हैं। अच्छा होता कि मुख्यमंत्री जनप्रतिनिधियों से संवाद करते न कि अफसरों के जरिए सूचना मिलती। उन्होंने बताया कि शुक्रवार को सीएचसी हाथी बाजार को गोद लेने का शिलान्यास करने मुख्यमंत्री यहां आ रहे हैं। अधिकांश पीएचसी और स्वास्थ्य उप केंद्रों पर पैरामेडिकल स्टाफ, डॉक्टर नहीं है और भवन भी जर्जर है जबकि मुख्यमंत्री ने खुद भी इसकी उपलब्धता की घोषणा की थी।
विज्ञापन
उन्होंने बताया कि काशी विद्यापीठ ब्लाक में भी रमना पीएचसी को भी 1991 में उन्होंने ही शुरू कराया। लेकिन यहां डॉक्टर, पैरामेडिकल स्टाफ, बेड नहीं है। स्वास्थ्य केंद्र बच्छाव में ताला बंद है, जिसे शुरू कराने के लिए 7 जून को डीएम को पत्र लिखकर धनराशि देने की इच्छा जाहिर की है, लेकिन कुछ नहीं हुआ है।
विज्ञापन
सीएचसी मिसिरपुर पर जेनरेटर खरीदारी में भी गड़बड़ी का आरोप
एमएलसी ने बताया कि 1991 में उन्होंने खुद मिसिरपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र को का निर्माण शुरू कराया और 30 सालों बाद 25.41 लाख की धनराशि से उसकी चहारदीवारी बनवाने का कार्य 8 जून को आरंभ हो गया। 28 मई 2021 को 62.5 केवीए का यहां जनरेटर लगाने का प्रस्ताव सीएमओ ऑफिस को दिया था जिसके लिए एक कम्पनी का जेम पोर्टल पर दाम 9 लाख 6हजार 500 जबकि अन्य कंपनी का दाम 9 लाख से अधिक है। जब उन्होंने खुद कंपनी से कोटेशन मांगा तो दोनों कंपनी ने दाम 5.50 लाख बताया। इस प्रक्रिया में भी गड़बड़ी का आरोप लगाया है।