रविदास घाट पर हादसा: उफनाई गंगा में डूबा 12 साल का बच्चा, दोस्त के साथ गया था नहाने
वाराणसी के रविदास घाट पर शुक्रवार को दोस्त के संग नहाने पहुंचा 12 साल का बालक गंगा में डूब गया। एनडीआरएफ टीम के गोताखोरों ने खोजबीन की लेकिन बालक का कोई सुराग हाथ नहीं लगा।
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वाराणसी के रविदास घाट पर शुक्रवार को दोस्त के संग नहाने पहुंचा 12 साल का बालक गंगा में डूब गया। लंका पुलिस और एनडीआरएफ की टीमों ने खोजबीन की। बहाव तेज होने के चलते गोताखोर भी हिम्मत नहीं जुटा सके। उधर, परिजनों में कोहराम मचा हुआ है।
बंगाल के वीरभूमि निवासी सर्वजीत चाय विक्रेता है। नगवां में ओमप्रकाश के मकान में किराये पर रहता है। उसका बेटा सोबुध अपने दोस्त गोलू के संग रविदास घाट पर बाढ़ देखने गया। इस दौरान सोबुध किनारे पर ही नहाने लगा। तभी अचानक वह गहरे पानी में चला गया और डूबने लगा। यह देख गोलू ने शोर मचाया और घर आकर परिजनों को सूचना दी। सूचना पाकर लंका पुलिस भी मौके पर पहुंच गई।
कक्षा तीन का था छात्र
आसपास के मल्लाह और एनडीआरएफ टीम के गोताखोरों ने कुछ देर के लिए गंगा में खोजबीन की लेकिन सफल नहीं हो सके। पानी अधिक होने और बहाव तेज होने के चलते गंगा में कोई टिक नहीं पा रहा है। गोताखोरों ने आशंका भी व्यक्त किया कि सोबुध बहकर आगे राजघाट की ओर चला गया होगा। बोट के जरिए एनडीआरएफ ने खोजबीन की। उधर, हादसे के बाद से परिवार में कोहराम मच गया। मां लक्ष्मी देवी बेसुध हो गई। परिजनों के अनुसार सोबुध कक्षा तीन का छात्र है।
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बनारस में गंगा का रौद्र रूप, खतरे का निशान छूने को बेताब
चंबल में उफान का असर बनारस में नजर आ रहा है। चेतावनी बिंदु 70.26 मीटर पार करने के बाद बनारस में गंगा ने रौद्र रूप अख्तियार कर लिया है और अब तेजी से खतरे के निशान की ओर बढ़ चली हैं। जलस्तर में बढ़ाव की गति में उतार-चढ़ाव के बीच शुक्रवार की शाम को एक बार जलस्तर तेजी से बढ़ना शुरू हो गया है। गंगा के रौद्र रूप ने आम जनता की मुसीबतें बढ़ा दी है।
गंगा अब घाटों से आगे निकलकर सड़कों पर प्रवाहित होने लगी हैं जिसके कारण सड़कों और गलियों में नावें चल रही हैं। शुक्रवार की रात नौ बजे गंगा का जलस्तर खतरे के निशान 71.26 मीटर से छह सेंटीमीटर नीचे 71.20 सेंटीमीटर पर बह रहा था।
केन्द्रीय जल आयोग के अनुसार अभी बढ़ाव जारी रहेगा और शनिवार को भोर तक पानी खतरे के निशान से ऊपर पहुंच जाएगा। बाढ़ का पानी शहर की घनी आबादी में धीरे-धीरे से प्रवेश करने लगा है। निचले इलाकों की रिहाइशी बस्तियों में बाढ़ का पानी पहले ही घुस चुका है जिसके कारण स्थितियां बेहद खराब हैं।
इधर, गंगा किनारे के पुराने इलाके भी अब बाढ़ से घिरने लगे हैं, क्योंकि पानी सड़कों और गलियों में घुस गया है। पानी से भरे मणिकर्णिका घाट की गली में जहां नावें चलती नजर आई तो दूसरी ओर अस्सी और दशाश्वमेध घाट की सड़क पर भी यही नजारा था।
दशाश्वमेध से शीतला मंदिर घाट की ओर जाने वाले रास्ते पर पानी रात को आगे बढ़ते हुए अहिल्याबाई गली की ढलान तक पहुंच चुका था जबकि दूसरी ओर जलपुलिस के बूथ डूब चुका है और सड़क के बीच तीन सीढ़ियों का फासला बचा था। पुराने अस्सी घाट जाने वाले रास्ते को आवागमन के लिए पूरी तरह से बंद कर दिया गया था।
बाढ़ के मद्देनजर अलर्ट पर स्वास्थ्य विभाग,
गंगा में आई बाढ़ के मद्देनजर स्वास्थ्य विभाग ने तैयारियां तेज कर दी हैं। 40 मेडिकल टीमों का गठन किया गया है, जिसमें बाढ़ राहत शिविरों में 11 टीमों को सक्रिय किया गया है। सीएमओ डॉ. संदीप चौधरी ने बताया कि टीम को ओआरएस का पैकेट, क्लोरीन की गोलियां वितरित करने के निर्देश दिए गए हैं।
सरकारी अस्पतालों में भी इलाज की सुविधाओं के साथ दवा भी मौजूद है। डिप्टी सीएमओ डॉ. पीयूष राय ने बताया कि शुक्रवार को बाढ़ राहत शिविरों में कुल 235 मरीज देखे गए। साथ ही ओआरएस के 190 पैकेट व क्लोरीन टैबलेट की 1280 गोलियां वितरित की गईं।