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Varanasi News: शिव नगरी में जगदंबा का उत्सव, आस्था और उल्लास में डूबी रही निशा

Mon, 19 Oct 2026 02:16 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Mon, 19 Oct 2026 02:16 AM IST
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A celebration of Jagdamba in the city of Shiva; the night was immersed in faith and jubilation.
सनातन धर्म इंटर कॉलेज में बद्रीनाथ की थीम पर बने दुर्गा पंडाल को देखने के लिए उमड़ी भीड़। अमर उ - फोटो : जू
वाराणसी। गोधूलि वेला में शहर मां जगदंबा के उत्सवी रंग में रंगा रहा। सतरंगी रोशनी बिखर रही थी। लोगों में आस्था और उल्लास चरम पर था। शहर की सड़कों और गलियों में भक्ति का समंदर लहरा रहा था। पंडालों से देश-विदेश के मंदिरों की झलक दिखी और भक्ति की अविरल धारा प्रवाहित होती रही। पंडालों तक जाने वाले मार्ग लोगों से पटे थे। पूरी रात, खासकर युवाओं का हुजूम उमड़ा रहा। मां दुर्गा की मनमोहक छवि निहारने और दुर्गा पूजा का लुत्फ उठाने के लिए श्रद्धालु पहुंचे। बंगीय पंडालों में ढाक की मधुर लय पर कदम थिरकते रहे। हाथों और सिर पर धुनुची लेकर किए जा रहे नृत्य से उत्सवी आभा और निखर उठी।
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कण-कण में शंकर को समेटे नगरी काशी में शक्ति की उपासना के पर्व नवरात्र की अष्टमी तिथि पर रविवार को पूजा पंडालों में पूजन और विविध प्रतियोगिताएं हुईं। शनिवार से ही पंडालों में माता के आह्वान के साथ प्रतिमाओं के पट खुल गए थे। रविवार दोपहर से ही लोग पैदल और वाहनों से मेला देखने निकल पड़े। शहर से लेकर गांव तक मां दुर्गा के जयकारों से पूजा पंडाल गूंजते रहे। शाम ढलते ही शहर की गलियां पंडालों से जुड़ने लगीं और हर तरफ भीड़ का रेला दिखने लगा। दुर्गा पंडाल मंदिरों के रूप में सजे थे और रंग-बिरंगी रोशनी में डूबे रहे। नयनाभिराम पंडालों में मां दुर्गा की आकर्षक छवि निहारने के लिए भीड़ उमड़ी रही। कई पंडालों में सांस्कृतिक कार्यक्रमों की धूम रही। जिले में 650 से अधिक पंडाल सजे हैं।
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पूर्वांचल के प्रख्यात पंडालों में से एक हथुआ मार्केट में कंबोडिया के 60 फीट ऊंचे अंकोरवाट मंदिर की प्रतिकृति बनाई गई। सनातन धर्म इंटर कॉलेज में बदरीनाथ धाम के रूप में बने पंडाल में मां जगदंबा ललिता स्वरूप में विराजमान दिखीं। मच्छोदरी का पंडाल कर्नाटक के ऐहोल स्थित दुर्गा मंदिर की तर्ज पर सजाया गया। वरुणापार इलाके में शिवपुर स्थित मिनी स्टेडियम में हवामहल और इसी क्षेत्र की न्यू कॉलोनी में स्वर्ण मंदिर की प्रतिकृति बनाई गई। अर्दली बाजार में केदारनाथ मंदिर के रूप में बने पंडाल में देवी के दर्शन हुए। रेशम कटरा में जबलपुर के बरगी डैम हादसे पर आधारित पंडाल में क्रूज पलटने की घटना के दौरान मां-बेटे के डूबने का दृश्य दिखाया गया।
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कैप्टन मच्छार की वीरता पर आधारित झांकी भी सजी थी। लहरतारा में न्यू लोटस क्लब के पंडाल में मुंबई के प्रसिद्ध मुंबा देवी मंदिर की झलक दिखी। बौलिया में कांतारा, बुलानाला में मां वैष्णो देवी की गुफा और त्रिकूट पर्वत की प्रतिकृति सजाई गई। जैतपुरा में बागेश्वरी देवी और मनसाराम फाटक में एलियन की झांकी सजी। जैतपुरा में ऑपरेशन सिंदूर की तर्ज पर पंडाल सजाए गए थे। चांदपुर, टाउनहाल, लंका, लोहटिया, सिगरा, महमूरगंज, खोजवां, बंगाली टोला, जंगमबाड़ी, सोनारपुरा, भेलूपुर, औसानगंज, कतुआपुरा, गायघाट और राजघाट आदि इलाकों के पूजा पंडालों में शाम से ही दर्शन-पूजन के लिए श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा।
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